By Election: दामोदर यादव बदल देंगे इतिहास! दतिया विधानसभा उपचुनाव में किसकी होगी जीत?

By एल एन मालवीय

By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव इस बार सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच का मुकाबला नहीं रह गया है। आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी दामोदर यादव के मैदान में उतरने से चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय होती दिखाई दे रही है। गांवों की चौपालों, कस्बों और राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार जातीय और सामाजिक समीकरण पारंपरिक राजनीति को चुनौती देंगे।

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ग्राउंड पर स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों से बातचीत में सामने आया कि दतिया में ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, अनुसूचित जाति, कुशवाहा और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता चुनाव परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाता बड़ी संख्या में दामोदर यादव के साथ आते हैं और उन्हें दलित और अन्य पिछड़े वर्गों का भी पर्याप्त समर्थन मिलता है तो वे इस उपचुनाव में मजबूत दावेदार बन सकते हैं। हालांकि यह राजनीतिक विश्लेषण है, अंतिम फैसला मतदाताओं के मतदान से ही होगा।

पिछले चुनाव के आंकड़े क्या कहते हैं?

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से हराया था।

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  • राजेंद्र भारती (कांग्रेस) - 88,977 वोट (50.34%)
  • डॉ. नरोत्तम मिश्रा (भाजपा) - 81,235 वोट (45.96%)
  • जीत का अंतर - 7,742 वोट

डॉ. नरोत्तम मिश्रा की हार ने यह संदेश दिया था कि दतिया का मतदाता बदलाव करने से पीछे नहीं हटता। यही कारण है कि इस बार भी सभी दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हैं।

उपचुनाव क्यों हो रहा है?

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद दतिया विधानसभा सीट खाली हुई। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की और अब सभी दल पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।

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दामोदर यादव क्यों चर्चा में हैं?

दामोदर यादव पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि वे यादव समाज के साथ-साथ दलित, ओबीसी और युवाओं को जोड़ने में सफल होते हैं, तो वे पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं और मुकाबले को बेहद रोचक बना सकते हैं।

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नामांकन के बाद क्या बोले दामोदर यादव?

नामांकन दाखिल करने के बाद एल. एन. मालवीय से विशेष बातचीत में दामोदर यादव ने कहा,'आज दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मैंने आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रत्याशी के रूप में हजारों साथियों, युवाओं, माताओं-बहनों, किसानों, मजदूरों और बहुजन समाज के अपार जनसमर्थन के बीच अपना नामांकन दाखिल किया।'

'सम्मान की राजनीति को आगे बढ़ाने का जनसंकल्प'

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उन्होंने कहा,'यह सिर्फ मेरा नामांकन नहीं, बल्कि संविधान बचाने, सामाजिक न्याय स्थापित करने और सम्मान की राजनीति को आगे बढ़ाने का जनसंकल्प है। जो लोग सत्ता के अहंकार में जनता की आवाज़ दबाना चाहते हैं, उन्हें दतिया की जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।'

'अब दतिया में डर नहीं, अधिकार की राजनीति होगी'

दामोदर यादव ने आगे कहा कि यह चुनाव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान, मान्यवर कांशीराम के मिशन और हर वंचित, शोषित, पिछड़े, किसान, मजदूर, युवा एवं बहन-बेटियों के अधिकारों की लड़ाई है।उन्होंने कहा 'अब दतिया में डर नहीं, अधिकार की राजनीति होगी। अब समझौता नहीं, संविधान की बात होगी। अब सत्ता नहीं, जनता का सम्मान सर्वोपरि होगा।'

जनसमर्थन को मतदान में बदल पाएंगे दामोदर यादव?

भाजपा के पास मजबूत संगठन और परंपरागत वोट बैंक है, जबकि कांग्रेस पिछली जीत का लाभ उठाकर सीट बचाने की कोशिश करेगी। ऐसे में दामोदर यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जनसमर्थन को मतदान में बदलने की होगी। यदि वे सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में साधने में सफल रहते हैं, तो मुकाबला त्रिकोणीय होने के साथ बेहद कांटे का हो सकता है।

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