S. Janaki Passed Away: दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में 11 जुलाई को निधन हो गया। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बाद उन्हें मैसूर के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी परिवार ने दी।
उनकी पोती अप्सरा वैद्युला (Apsara Vydyula) ने इंस्टाग्राम पर भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि जानकी अम्मा ने अपने परिवार के बीच शांतिपूर्वक दुनिया को अलविदा कहा। करीब छह दशक तक अपनी आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाली जानकी अम्मा के जाने से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि पूरे देश का संगीत जगत शोक में डूब गया है।
जानकी अम्मा के जाने के बाद उनके परिवार ने फैंस से इस मुश्किल घड़ी में प्राइवेसी बनाए रखने की अपील की है। उनकी पोती अप्सरा वैद्युला ने इंस्टाग्राम पर परिवार की तरफ से एक नोट शेयर किया। अप्सरा ने लिखा कि दुनिया के लिए वो एक ऐसी महान आवाज थीं, जिनके गाने अनगिनत यादों का हिस्सा बन गए। लेकिन हमारे लिए वो हमारी प्यारी दादी थीं, जिनकी सादगी, दयालुता और गरिमा हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। हमारा दिल भारी है लेकिन हम खुशकिस्मत हैं कि हमें उनके साथ जीने का मौका मिला। एस. जानकी का जन्म 23 अप्रैल 1938 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी (अब आंध्र प्रदेश) के गुंटूर जिले के पल्लापाटला गांव में हुआ था। उनके पिता सिस्टला श्रीराममूर्ति आयुर्वेदिक डॉक्टर होने के साथ शिक्षक भी थे। जानकी ने बचपन का बड़ा हिस्सा सिरसिल्ला में बिताया। महज नौ साल की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी। उन्होंने नादस्वरम वादक पैडिस्वामी से संगीत की शुरुआती शिक्षा ली, लेकिन उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। जानकी ने महज 19 साल की उम्र में फिल्मी गायन की शुरुआत की। उनका पहला प्लेबैक तमिल फिल्म 'विधियिन विलायट्टु' (1957) के लिए था। उसी साल उन्होंने छह अलग-अलग भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए। जानकी अम्मा की मातृभाषा तेलुगु थी लेकिन वे कमाल की बहुभाषी (Multilingual) थीं। वे तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी जैसी भाषाओं को न सिर्फ फ्लूएंट बोल सकती थीं, बल्कि लिख भी लेती थीं। इसके बाद उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, हिंदी समेत कई भाषाओं में हजारों गीत गाए। उनका करियर करीब 60 वर्षों तक चला। साल 2016 में उन्होंने फिल्मों और स्टेज शो से संन्यास लेने का ऐलान किया। हालांकि, 2018 में उन्होंने तमिल फिल्म 'पन्नाड़ी' के लिए एक बार फिर अपनी आवाज दी और अपने लंबे संगीत सफर को यादगार अंदाज में पूरा किया। एस. जानकी भारतीय संगीत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में गिनी जाती थीं। उन्हें अपने शानदार करियर में चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) मिले। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के 33 राज्य फिल्म पुरस्कार भी उनके नाम रहे। उनकी बहुभाषी गायकी और भावपूर्ण आवाज ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे अलग पहचान दिलाई। जानकी अम्मा सिर्फ अपनी बेमिसाल गायकी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक और निडर अंदाज के लिए भी जानी जाती थीं। साल 2013 में उन्होंने देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' लेने से साफ मना करके सबको चौंका दिया था। उन्होंने बेहद बेबाकी से कहा था कि दक्षिण भारत के संगीत को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है। उनका मानना था कि संगीत में उनके ऐतिहासिक और लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें बहुत पहले ही देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' मिलना चाहिए था। इस उम्र में आकर पद्म भूषण लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता। एस. जानकी का निधन भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। उनकी आवाज आज भी करोड़ों लोगों की यादों का हिस्सा है और आने वाली पीढ़ियां भी उनके गीतों के जरिए उन्हें हमेशा याद रखेंगी।पोती अप्सरा का छलका दर्द: 'हमारे लिए वो सिर्फ स्टार नहीं, प्यारी दादी थीं'
एस जानकी का आंध्र प्रदेश से शुरू हुआ सुरों का सफर (S. Janaki Early Life)
एस जानकी 60 साल तक चला सुनहरा करियर
पद्म भूषण को ठुकराकर मचा दिया था हड़कंप, मांगा था 'भारत रत्न'
एस जानकी का परिवार और निजी जिंदगी