सेम मार्क्स फिर आर्यन गुप्ता-पांशुल बंसल के रैंक में क्यों अंतर? NTA ने NEET रिजल्ट में लगाया कौन सा फार्मूला?

NEET UG 2026 का रिजल्ट 16 जुलाई को आ गया है। इस बार करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने नीट की परिक्षा दी थी जिसमें से किसी को भी फुल मार्कस यानी 720/720 नंबर नहीं मिले हैं। इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता AIR 1 के साथ टॉपर बने हैं जबकि पांशुल बंसल को AIR 2 मिला है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही स्टूडेंट्स को बराबर नंबर आए हैं। आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल ने नीट यूजी 2026 में 720 में से 715 मार्कस स्कोर किया है।

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कई लोगों को ये कंफ्यूजन हो रहा है कि एक जैसे नंबर आने के बाद भी दोनों की रैंक अलग-अलग क्यों है। अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो चलिए आपका भी कंफ्यूजन दूर करते हैं। दरअसल, दोनों स्टूडेंटस के रैंक के अतंर की वजह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का टाई ब्रेकिंग रूल (Tie-Breaker Formula) है। अब सवाल है कि टाई ब्रेकिंग रूल क्या होता है? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।

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क्या है NTA का टाई ब्रेकिंग रूल?

कई बार ऐसा होता है कि एक से अधिक स्टूडेंट को एक जैसे नंबर आ जाते हैं। ऐसे में ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि किसे कौन सी रैंक दी जाए। इस परेशानी से बचने के लिए NTA ने टाई ब्रेकिंग रूल बनाया है। NTA का टाई-ब्रेकिंग रूल तब लागू होता है, जब NEET में दो या उससे अधिक एस्पिरेंट के टोचल मार्कस एकदम एक जैसे होते हैं। रैंक डिसाइड करने के लिए पहले एक जैसे मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स का अलग-अलग सब्जेक्ट के नंबर को चेक किया जाता है।

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अगर इस स्टेप से बात नहीं बनती है तब नेगेटिव मार्क्स देखे जाते हैं, अगर इससे भी रैंक नहीं निकल पाता है तो एक इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट कमेटी लॉटरी सिस्टम के माध्यम से रैंक डिसाइड करती है। आइए ये प्रोसेस स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं-

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मान लीजिए किसी दो नीट एस्पिरेंट का नंबर सेम-टू-सेम है, जैसा की इस बार आर्यन और पांशुल के साथ हुआ है। ऐसे में सबसे पहले दोनों के अलग-अलग सब्जेक्ट के मार्क्स देखे जाते हैं।

  • मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट होने की वजह से जिस स्टूडेंट का बायोलॉजी में नंबर ज्यादा होगा उसे प्रायोरिटी दी जाती है।
  • अगर बायोलॉजी में नंबर सेम हैं तो केमिस्ट्री का मार्क्स चेक किया जाता है, अगर वो भी एक समान होते हैं तब फिजिक्स के मार्क्स पर फोकस किया जाता है।
  • तीनों विषयों में एक बराबर मार्क्स होने पर ये देखा जाता है कि दूनो स्टूडेंट्स ने जितने क्वेश्चन एटेम्पट किए हैं उनमें से किसने ज्यादा नेगेटिव किया है यानी किसने ज्यादा आंसर गलत किए हैं। जिसने कम नेगेटिव किया होता है उसे ऊपर की रैंक दी जाती है।
  • अगर इस प्रोसेस से भी रैंक नहीं फाइनल हो पाता है तब एक इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट कमेटी रैंडम लॉटरी के माध्यम से स्टूडेंट्स का रैंक तय करती है।

पहले नीट में टाई ब्रेक करने के लिए उम्र का भी फैक्टर रखा गया था। ऐसे में ज्यादा उम्र वाले स्टूडेंट्स को ऊपर की यानी बेहतर रैंक दी जाती थी। साल 2020 तक इसी प्रोसेस के जरिए टॉपर तय किए गए थे। लेकिन इसे लेकर विवाद होने के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इसे पूरी तरह से हटा दिया। अब टाई ब्रेकिंग रूल में उम्र का पैमाना नहीं देखा जाता है। इस बार भी टाई ब्रेकिंग रूल के जरिए ही टॉपर चुने गए हैं। इस वजह से सेम मार्क्स होने के बाद भी आर्यन को AIR 1 और पांशुल को AIR 2 दिया गया है।

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