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Organic Farming : मिट्टी के अलावा इच्छाशक्ति भी जरूरी, जमीन नहीं मिली तो प्रोफेसर ने छत पर बनाया किचन गार्डन

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मिदनापुर (पश्चिम बंगाल), 11 मई : जमीन की कमी होने का बहाना बनाकर खेती न करने वाले लोगों के लिए पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर ने मिसाल कायम की है। उन्होंने अपने आवास की छत पर जैविक खेती की। सब्जियों को किचन गार्डन में उगाने वाले प्रोफेसर डॉ केशब चंद्र मंडल के घर की छत किसी छोटी बगिया से कम नहीं लगती। उनकी पत्नी भी इस काम में सहयोग करती हैं। शहरीकरण और कंक्रीट के अंधाधुंध फैलते जंगलों के बीच पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में जमीन की कमी के बावजूद विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अपने घर की छत पर जैविक सब्जी उद्यान विकसित कर दिखाया है। विद्यासागर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ केशब चंद्र मंडल ने बताते हैं कि शहर में जमीन की कमी के बीच, कई लोगों ने अपनी छतों पर फल, सब्जियां और फूल उगाना शुरू कर दिया है।

घरेलू खाद के उपयोग पर जोर

घरेलू खाद के उपयोग पर जोर

प्रोफेसर डॉ केशब चंद्र मंडल केवल जैविक खाद के उपयोग की सिफारिश करते हैं। वे बताते हैं कि जैविक उर्वरक के उपयोग से फसल सामान्य से अधिक महीनों तक टिकती है। उन्होंने बेहतर उपज के लिए रसोई के कचरे से तैयार होने वाली घरेलू खाद के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा, एक कंटेनर में 1-2 महीने के लिए सब्जी के कचरे को स्टोर करके उर्वरक तैयार किया जा सकता है। फल, फूल या सब्जी के पौधों को लंबे समय तक टिकाने सहित इनकी गुणवत्ता में सुधार के लिए घरेलू उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है।

सब्जियों के अलावा फूलों की बगिया से बढ़ा सौंदर्य

सब्जियों के अलावा फूलों की बगिया से बढ़ा सौंदर्य

मिट्टी से 30 फीट ऊपर अपने घर की कंक्रीट की छत पर बने रूफटॉप गार्डन में प्रोफेसर मछली पालन भी करते हैं। उन्होंने मत्स्यपालन के लिए छोटा टब रखा है। उन्होंने छत पर सब्जी, लेट्यूस, पालक, शलजम, हरी मिर्च, बीन्स, टमाटर, चुकंदर, भिंडी, बैंगन सहित विभिन्न सब्जियां उगाने के अलावा फूलों का बगीचा भी बनाया है।

फूलों की बगिया से बढ़ा सौंदर्य
वनस्पति उद्यान के साथ-साथ, प्रोफेसर और उनकी पत्नी ने जो फूलों का बगीचा तैयार किया है इसमें सर्दियों के मौसम में धूप खिलने पर पेटुनिया जैसे फूलों से शानदार नजारा और मौसम बनता है। प्रोफेसर बताते हैं कि, पेटुनिया आमतौर पर एक या दो महीने तक ही रहता है, लेकिन व्यवस्थित रूप से रखने के कारण बारिश के मौसम में भी यह बचा रहा। इसका कारण पौधों में जैविक और स्वस्थ तरीकों का उपयोग है।

छत पर पौधों की सुरक्षा

छत पर पौधों की सुरक्षा

प्रोफेसर डॉ केशब चंद्र मंडल ने रूफ टॉप फार्मिंग के बारे में यह भी कहा कि छत पर पौधों को सीधी धूप मिलती है। इस कारण पौधों को कीड़ों, कीटों और फंगस से बचाने में मदद मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया, किसी को हमेशा जैविक फसलों को उगाने के लिए घरों की छत का उपयोग करना चाहिए। घर में जगह चाहे छोटी हो या बड़ी लोगों को पौधे लगाने चाहिए। इससे अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और खुद की सेहत भी ठीक रहती है।

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English summary
Professor Dr Keshab Chandra Mondal of Vidyasagar University doing rooftop farming in Midnapore, West Bengal.
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