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नैचुरल फार्मिंग की मिसाल : 10वीं पास किसान खेती में ऐसे रमे कि मिल गया देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान

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झालावाड़ (राजस्थान), 11 मई : किसी ने क्या खूब कहा है कि किताबी ज्ञान की तुलना में अनुभव अधिक सिखाता है। राजस्थान के झालावाड़ में रहने वाले किसान हुकुमचंद पाटीदार पर यह कथन सटीक है। ऐसा इसलिए क्योंकि 10वीं क्लास पास करने के बाद उन्होंने एकेडमिक ज्ञान या डिग्री हासिल नहीं की। हुकुमचंद पाटीदार को नेचुरल फार्मिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अब वे राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों में ग्रैजुएशन और मास्टर्स डिग्री की पढ़ाई करने आने वाले युवाओं के लिए खेती-किसानी की पढ़ाई का सिलेबस तैयार कर रहे हैं। एग्रीकल्चर में बीएससी, एमएससी और रिसर्च (पीएचडी) करने को इच्छुक युवा हुकुमचंद पाटीदार के व्यावहारिक जीवन के अनुभव से लाभ उठा सकेंगे।

हुकुमचंद पाटीदार को पद्मश्री सम्मान

हुकुमचंद पाटीदार को पद्मश्री सम्मान

राजस्थान के झालावाड़ में रहने वाले 10वीं कक्षा पास किसान, कृषि विश्वविद्यालयों में बीएससी, एमएससी और पीएचडी के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। प्राकृतिक खेती में प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस रखने वाले झालावाड़ निवासी हुकुमचंद पाटीदार को 2019 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जा चुके हुकुमचंद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की समिति के सदस्य भी हैं। ICAR भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

प्राकृतिक खेती का अनुभव यूनिवर्सिटी सिलेबस में

प्राकृतिक खेती का अनुभव यूनिवर्सिटी सिलेबस में

पाटीदार को उम्मीद है कि प्राकृतिक खेती भारत में कई समस्याओं का समाधान कर सकती है। पद्म अवॉर्ड मिलने के बाद उन्होंने कहा था, ICAR ने खेती के दौरान होने वाली परेशानी से निपटने के लिए एक समिति का गठन किया है। उन्होंने बताया था कि समिति बीएससी, एमएससी और पीएचडी की कक्षाओं में एग्रीकल्चर से जुड़ी पढ़ाई के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेगी। समिति में कुछ किसान, वैज्ञानिक और प्रोफेसर भी शामिल हैं। इसकी रिपोर्ट में कई विषयों पर किए गए शोध होंगे। रिसर्च का मकसद कृषि में खर्च कम करना है।

किसानों ने अपनाया पाटीदार का मॉडल

किसानों ने अपनाया पाटीदार का मॉडल

बता दें कि हुकुमचंद पाटीदार खेती के क्षेत्र में झालावाड़ में रोल मॉडल हैं। पाटीदार ने गहन शोध और अध्ययन के बाद एक मॉडल तैयार किया है। 200 से अधिक किसानों ने इस मॉडल को अपनाया है। इससे उनकी फसलों का उत्पादन बढ़ा है। मॉडल के पॉजिटिव रिजल्ट को देखते हुए और भी लोग इससे जुड़ रहे हैं। खेती में हुकुमचंद पाटीदार के मॉडल को प्रकृति- और पशु-आधारित जैविक कृषि के रूप में जाना जाता है। इस मॉडल की चर्चा कोटा, इंदौर और झालावाड़ के विश्वविद्यालयों में एक सफल मॉडल के रूप में की जाती है। इसके साथ ही कोर्स के हिस्से के रूप में पाटीदार के मॉडल पर आधारित प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसी मॉडल को बीएससी, एमएससी और पीएचडी में भी पढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि लोगों का नजरिया बदला जा सके।

मिशन बनी प्राकृतिक खेती

मिशन बनी प्राकृतिक खेती

बकौल पाटीदार, शुरुआत में उन्होंने रासायनिक खेती को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि पिता के साथ खेत में काम करने के दौरान ज्यादातर रासायनिक खेती होती थी। लंबे समय तक रासायनिक खेती से उत्पादन के बाद प्राकृतिक खेती की शुरुआत की क्योंकि रासायनिक खेती से न केवल फसलों को बल्कि इंसानों को भी नुकसान होता है। यह जानवरों और पक्षियों के अलावा इंसानों की सेहत के लिए भी अच्छा नहीं है।

10वीं के बाद छोड़ी पढ़ाई

10वीं के बाद छोड़ी पढ़ाई

पाटीदार बताते हैं कि उन्होंने कक्षा 10 तक पढ़ाई की और खेती-किसानी में पिता की मदद करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी। वे बताते हैं कि 10वीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद वे कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन उन्हें जो मुकाम मिला है, इसके पीछे उनकी इच्छाशक्ति और समर्पण है। यह एक सपने जैसा है। प्राकृतिक खेती के विचार पर पाटीदार बताते हैं कि उनके दिमाग में यह आइडिया तब आया जब उन्होंने अपने पिता के साथ खेतों में काम किया।

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English summary
Hukumchand Patidar, awarded Padma Shri in 2019 for contribution in natural farming. He is a Class 10 pass farmer from Jhalawar, Rajasthan designing curriculum on natural farming. Students of BSc, MSc and PhD in agricultural universities shall be benefited from his practical life experience.
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