वाराणसी में पिता को बेटियों ने दी मुखाग्नि,कहा- हम ऐसा शास्त्र नहीं मानते जो बेटा-बेटी में करे फर्क

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वाराणसी। बेटियां अब सिर्फ घर का बोझ नहीं होती हैं बल्कि वो अपने पिता का बोझ भी कंधों पर उठा सकती हैं। यह साबित किया है उत्तर प्रदेश स्थित वाराणसी की 5 बेटियों ने।

वाराणसी की इन 5 बेटियों ने अपने पिता के शव को कंधा दिया और शमशान घाट तक ले गईं। इतना ही नहीं इन्होंने हर वो रस्म की जो परंपरा के अनुसार सिर्फ एक बेटा ही कर सकता है।

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संक्रमण के कारण काटा गया था बांया पैर

वाराणसी स्थति भदैनी में के निवासी योगेश चंद्र उपाध्याय का निधन शुक्रवार (4 अक्टूबर) को उनकी बड़ी बेटी गरिमा के पास हुआ जो राजस्थान स्थित धौलपुर में पीसीएस अधिकारी हैं।

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कुछ दिनों पहले संक्रमण के कारण उनका बांया पैर काटा गया था। जिसके बाद से वो गरिमा के पास ही रहते थे।

पिता के निधन के बाद गरिमा उनका शव राजस्थान से वाराणसी लाई। वहां उनका अंतिम संस्कार हरिश्चन्द्र घाट पर किया गया।

हम वो शास्त्र नहीं मानते

अपने पिता का अंतिम संस्कार कर मिसाल कायम करने वाली इन बेटियों का कहना है कि इनके पिता ने उन्हें कभी बेटों से कम नहीं समझा। उन्होंने हमें इस काबिल बनाया कि हम किसी से पीछे न रह सके।

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उन्होंने यह भी कहा कि वो ऐसा कोई शास्त्र या नियम नहीं मानतीं जो बेटा और बेटी में फर्क करे। योगेश अपने पीछे पांच बेटियां, राम्या, गरिमा,सौम्या, महिमा, अरिमा के साथ पत्नी उर्मिला को छोड़ गए हैं।

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English summary
Daughters carry bier of father on their shoulders in varanasi
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