शंख से बन गए सम्राट, संगम पर सभी को किया मंत्रमुग्ध

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इलाहाबाद। तीर्थराज प्रयाग यानी संगम के तट पर आयोजित 11वें शंख सम्राट प्रतियोगिता को इलाहाबाद के योगेंद्र प्रताप सिंह ने जीत लिया है। योगेंद्र देश के 11वें शंख सम्राट बने हैं। उन्होंने लगातार 50 सेकेंड तक शंख बजाकर ये स्वर्णिंम उपलब्धि हासिल की। इस प्रतियोगिता का आयोजन पिछले 10 वर्षों से प्रयागराज सेवा समिति व अखिल भारतीय ब्राह्मण चेतना समिति के द्वारा किया जाता रहा है।

शंख से बन गए सम्राट, संगम पर सभी को किया मंत्रमुग्ध

ये ग्याराहवी शंख सम्राट प्रतियोगिता थी। संगम बांध के दारागंज स्थित धकाधक चौराहे पर आयोजित इस प्रतियोगिता का टाइटल 'शंख बाजाओ, जीवन बढांओ' था। सबसे अहम बात ये है कि ये आयोजन स्वर्गीय पंजिक द्विज राज पांडेय (खड़िया पंजित) जी की पुण्य स्मृति में मनाया जाता है। साथ ही संगम व शंख की महत्वा को विश्व धरोहर के रूप में दर्शाते हुए जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

कौन चुने गए विजेता?

11वें शंख सम्राट प्रतियोगिता और सुर-ताल महासंग्राम में शंख के साथ ही सावनी कजरी के गीतों की फुहार भी बही। प्रतियोगिता में इलाहाबाद के अलावा प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, सुल्तानपुर, रीवा, चित्रकूट, मिर्जापुर और जौनपुर के 35 शंखवादकों ने भाग लिया। जिनकी शंखनाद सुनते ही वाद निर्णायक मंडल के सदस्यों ने एकमत स्वर में विजेता के नाम की घोषणा की। जिसमें 50 सेकेंड तक लगातार शंख बजाकर सबका दिल जीतने वाले युवा योगेंद्र प्रताप सिंह को शंख सम्राट घोषित कर मुकुट पहनाया गया और प्रमाण पत्र भी दिया गया।

योगेंद्र इलाहाबाद के अल्लापुर मोहल्ले के रहने वाले हैं। जबकि अन्य विजेता में श्लोक मिश्र ने 22 सेकेंड तक शंख बजाकर दूसरा स्थान हासिल किया। मयंक करमहा ने 21 सेकेंड से तीसरा तो रविराज पांडेय ने 20 सेकेंड तक शंख बजाकर चौथा स्थान पाया। शंख प्रतियोगिता के अलावा सुर-लय संग्राम प्रतियोगिता ने गजब का समा बांधा। पं. राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी मधुकर और टीम के कलाकारों ने कजरी दंगल और पारंपरिक चैती-चैता गीत प्रस्तुत कर सावनी छटा बिखेरी और लोगों को मंत्रमुग्ध किया।

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English summary
Winner of Conch shelling competition
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