गोरखपुर: चर्चित गीता पाल रेप एंड मर्डर केस में ग्रामीणों ने घेरा जिलाधिकारी कार्यालय

सूचना पर स्थानीय पुलिस गीता के शव का पोस्टमार्टम कराई ।पत्नी की मृत्यु की सूचना पाकर जब वह घर आया तो गांव वालों के बताएं तथ्यों के आधार पर एक लिखित दरख्वास्त पिपराइच थाने पर दिया।

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गोरखपुर । पिपराइच थाना क्षेत्र के रतनपुर परती टोला निवासी श्रीमती गीता पाल की हत्या और बलात्कार में मुख्य आरोपी मोनू चौधरी को बचाने में लिप्त एक बड़े नेता और स्थानीय थानाध्यक्ष की अकर्मण्यता के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया।

गोरखपुर: चर्चित गीता पाल रेप एंड मर्डर केस में ग्रामीणों ने घेरा जिलाधिकारी कार्यालय
आज जिलाधिकारी कार्यालय पर ग्रामीणों के साथ घेराव करने आए मृतका गीता पाल के पति चंद्रभान पाल ने बताया कि वह सूरत में रहकर मजदूरी करता है । विगत 19 अक्टूबर को गांव के नंदकिशोर गौड़ ने सूचना दिया था कि उसकी पत्नी गीता पाल 30 वर्ष ,आज सुबह करीब 5:00 बजे सोच के लिए बाहर गई थी तथा साथ में अपना मोबाइल नंबर 8381 84 13 59 वह 75 23 84 38 92 भी लेकर गई थी ।जिसे किसी जानवर ने मार डाला ।सूचना पर स्थानीय पुलिस गीता के शव का पोस्टमार्टम कराई ।पत्नी की मृत्यु की सूचना पाकर जब वह घर आया तो गांव वालों के बताएं तथ्यों के आधार पर एक लिखित दरख्वास्त पिपराइच थाने पर दिया। लेकिन आज स्थानीय पुलिस ना कोई रिपोर्ट दर्ज कि ना ही इस संबंध में कोई जांच कर रही थी। जब उसने पोस्टमार्टम की प्रति प्राप्त किया तो पता चला कि उसकी पत्नी की हत्या किसी हिंसक जानवर ने नहीं, बल्कि गांव के कुछ शातिर अपराधियों द्वारा बलात्कार कर साक्ष्य छिपाने हेतु की गई थी। अपने प्रार्थना पत्र ने चंद्रभान पाल ने लिखा है कि गांव के सूत्रों से पता चला कि गांव के मोनू चौधरी पुत्र रामचंद्र चौधरी से मृतका की जेठानी कि लड़की उम्र करीब 20 साल पुत्री मुंशी पाल से करीब 2 वर्षों से अवैध संबंध था और मृतका ने मोनू चौधरी और उक्त लड़की अनीता पाल को आपत्ति जनक स्थिति में जुलाई 2016 में पकड़ा था ।साथ ही लोगों से दोनों के राज खोलने की बात भी की थी ।इसके बाद मोनू चौधरी ने उसे धमकी दी थी कि हम तुम को जान से मार देंगे।
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चंद्रभान पाल ने आरोप लगाया कि राजस्थानी पुलिस की उदासीनता और न्याय की उम्मीद ना देख कर उसने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के पश्चात आई जी जोन गोरखपुर से मिलकर तथा घटना के संबंध में 14 नवंबर को रजिस्ट्री के जरिए सूचना भी दिया ।आईजी के आदेश पर 19 नवंबर को थाना पिपराइच में धारा 302 आईपीसी का मुकदमा अज्ञात में दर्ज हुए तत्पश्चात स्थानीय पुलिस छह संदिग्ध लोगों को थाने ले गई और पूछताछ कर उपरोक्त मोनू को चौधरी और संतोष शंकर को थाने पर ही रोक ली ।इसी दौरान जनपद के एक बड़े नेता के माध्यम से मोनू चौधरी को इस केस से बचाने हेतु नेता द्वारा 400053 थानाध्यक्ष पिपराइच को दिया गया और पुलिस नेता तथा पैसे के प्रभाव में मोनू चौधरी को बचाने की योजना के तहत मोनू चौधरी की मोबाइल का काल डिटेल नहीं निकाले। संतोष सोनकर के मोबाइल का कॉल डिटेल पुलिस ने निकलवाया। जिसमें मृतका गीता पाल के नंबर पर 150 काल पाया गया। अभियुक्त मोनू चौधरी व थानाध्यक्ष पिपराइच के बीच बड़े नेता के माध्यम से जो डील हुई ।
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उसकी जानकारी पीड़ित पति को सूत्रों के माध्यम से हो गई और इस संदर्भ में उसने 7 दिसंबर को एसएसपी गोरखपुर को प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन मोनू चौधरी की कॉल डिटेल के मामले पर पुलिस प्रशासन मौन है और कोई कार्यवाही या जांच मोनू चौधरी के कॉल डिटेल के बिंदु पर नहीं कर रही। इस संबंध में मृतका के पति चंद्रभान पाल ने प्रदेश के राज्यपाल, डीजीपी, आईजी , डीआईजी , राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य महिला आयोग, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी गोरखपुर को पत्रक देकर न्याय मांगते हुए कहा है कि उपरोक्त तथ्यों परिस्थितियों के आधार पर थानाध्यक्ष पिपराइच जियो चौरीचौरा sp ग्रामीण और एसएसपी गोरखपुर की भूमिका संदिग्ध है। इनके रहते हुए न्याय मिलना असंभव है । यह लोग वर्तमान समाजवादी सरकार की न्याय प्रियता एवं लोकप्रियता को बदनाम करने का दुष्चक्र रच रहे हैं।

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English summary
Villagers hoop collector office in Geeta Pal Rape and Murder Case,Gorakhpur.
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