यूपी की राजनीति में ये अंधविश्वास जिसे कोई भी नेता तोड़ने की हिम्मत नहीं करता

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव सात चरणों में होने हैं लेकिन अगर अखिलेश यादव अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत ऐसी जगह से करें जहां चुनाव पांचवे चरण में होना है, यह बात आसानी से गले नहीं उतरती है। दरअसल यूपी चुनाव प्रचार की शुरुआत अखिलेश यादव ने सुल्तानपुर से की, जहां चुनाव पांचवे चरण में होना है, लेकिन इसके पीछे की अहम वजह है अखिलेश का ज्योतिष पर विश्वास। सुल्तानपुर को चुनने के पीछे की अहम वजह हैं कि ज्योतिष के अनुसार इस जगह की दिशा शूल अनुकुल है और मंगलवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना अपशकुन है, लिहाजा पूर्व की ओर जाना बेहतर रहेगा।

अखिलेश के लिए लकी है सुल्तानपुर

अखिलेश के लिए लकी है सुल्तानपुर

चुनाव के प्रथम चरण के लिहाज से अखिलेश यादव को पश्चिमी यूपी का दौरा पहले करना चाहिए था लेकिन बजाए पश्चिमी यूपी जाने के अखिलेश ने पूर्वी यूपी से अपना अभियान शुरु करना बेहतर समझा। सुल्तानपुर को पहले चुनने के पीछे की एक वजह यह भी है कि पांच साल पहले भी यहीं से अपने अभियान की शुरुआत की थी और अखिलेश इसे सौभाग्यशाली मानते हैं।

कार्यालय में पेंट कराने से होती है हार

कार्यालय में पेंट कराने से होती है हार

यूपी में चुनाव के नतीजे 11 मार्च को आएंगे, ऐसे में ना सिर्फ अखिलेश बल्कि अन्य पार्टियां भी अपने अंधविश्वास पर भरोसा कर रहे हैं और उसे नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि कि अगर प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय में पेंट कराते हैं तो उनके लिए अगले चुनाव का खेल खत्म है। इसका उदाहरण 1992 में महावीर प्रसाद, 1995 में एनडी तिवारी, 2912 में सलमान खुर्शीद और 2012 में रीता बहुगुणा जोशी जोकि अब भाजपा में हैं।

इस मूर्ती पर शृद्धांजलि देने से होती है मौत

इस मूर्ती पर शृद्धांजलि देने से होती है मौत

पूर्वी यूपी के बलिया में लोगों का मानना है कि जो नेता स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडे को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होने भारत छोड़ो आंदोलन की इस क्षेत्र में अगुवाई की थी, वह उसके लिए बड़ा अपशकुन साबित होता है और उसे अपनी जान देनी पड़ती है। इंदिरा गांधी ने मृत्यु से छह महीने पहले चित्तू पांडे की मूर्ति का अनावरण किया था। राजीव गांधी ने हत्या से कुछ महीने पहले यहां चित्तू पांडे की मूर्ति पर माला पहनाई थी, जबकि जैल सिंह ने जब इस मूर्ति पर पुष्प भेंट किए थे तो कुछ महीने बाद उन्हें हार्ट अटैक आया था और उनकी मृत्यु हो गई थी।

कपड़ों के रंग का विशेष खयाल

कपड़ों के रंग का विशेष खयाल

यूपी में सबसे बड़ी दलित नेता और चार बार की मुख्यमंत्री मायावती भी इन अंधविश्वास से खुद को बाहर नहीं निकाल पाई और उन्होंने खुशी के मौके पर सफेद धूमिल सफेद कपड़ों के अलावा कुछ भी पहनने से परहेज किया। मायावती खुशी के मौके जैसे उनका जन्मदिन पर गुलाबी कपड़े पहनती हैं। पार्टी के भीतर इस बात की सुगबुगाहट है कि धूमिल सफेद और गुलाबी कपड़े उनके लिए शुभ हैं लिहाजा वह उसे ही पहनती हैं।

प्रमोद तिवारी हर रोज अलग रंग के साबुन से नहाते हैं

प्रमोद तिवारी हर रोज अलग रंग के साबुन से नहाते हैं

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी हर रोज अलग रंग के साबुन से नहाते हैं और उसी रंग का कपड़ा पहनते हैं जिस रंग के साबुन से वह नहाते है, इस बात का विशेष खयाल रखते हैं। सोमवार को वह सफेद, बुधवार को हरा, शुक्रवार को फिर से सफेद रंग का कपड़ा पहनते हैं। लेकिन जब वह सफेद रंग का कुर्ता पायजामा पहनते हैं तो वह साबुन के रंग की जैकेट पहनते हैं।

नोएडा का अंधविश्वास

नोएडा का अंधविश्वास

लेकिन इन सब अंधविश्वास से उपर हैं यूपी में नोएडा का दौरा। ऐसा माना जाता है कि जो भी नेता नोएडा जाता है वह दोबारा सत्ता में नहीं आता है। 80 के दशक में जब एनडी तिवारी और वीर बहादुर सिंह जब नोएडा गए थे तो उसके कुछ महीने बाद ही वह चुनाव हार गए थे। इसी वजह से मुलायम सिंह यादव 2006 में नोएडा जाने से इनकार कर दिया था। वर्ष 2002 में राजनाथ सिंह ने नोएडा दिल्ली फ्लाइओवर का उद्घाटन किया था लेकिन दिल्ली के पास ही रहे थे और नोएडा नहीं आए थे। 2011 में मायावती नोएडा गई और उन्हें अगले वर्ष चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था, यही नहीं अखिलेश यादव भी यहां आने से बचते आए हैं और आजतक यहां का दौरा नहीं किया।

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English summary
UP leaders are full of superstition know every leader specifically. Akhilesh, Mayawati, Mulayam, congress each has his own superstition
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