यूपी विधानसभा चुनाव 2017: क्या यूपी चुनाव में हटेगा आजमगढ़ से 'आतंक' का टैग?

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नई दिल्ली। पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले का जिक्र आते ही आतंक पर चर्चा शुरु हो जाती है। आजमगढ़ को आतंक की नर्सरी तक कहा जाता था लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र पर खास ध्यान दिया जा रहा है। कोशिश यही है कि इस इलाके से आतंक का टैग जल्दी से जल्दी हट सके। 2008 के बटला हाउस एनकाउंटर को शायद ही लोग भूले होंगे इस बीच 2013 में हैदराबाद के दिलसुख नगर धमाका मामले में असदुल्लाह अख्तर को दोषी ठहराया गया। असदुल्लाह अख्तर आजमगढ़ के मशहूर डॉक्टर थे। उनके पिता का नाम जावेद अख्तर है। असदुल्लाह अख्तर को हैदराबाद के दिलसुख नगर धमाका मामले में यासीन भटकल के साथ आरोपी बनाया गया। इस मामले में असदुल्लाह अख्तर को फांसी की सजा सुनाई गई।

azamgarh क्या यूपी चुनाव में हटेगा आजमगढ़ से 'आतंक' का टैग?

आजमगढ़ पर सभी सियासी दलों की निगाहें

बटला हाउस एंकाउंटर के बाद आजमगढ़ आतंक के मामले में पहली बार चर्चा में आया। इस एंकाउंटर में आजमगढ़ के दो युवा मारे गए थे। उस समय से ऐसी चर्चाएं शुरू हुई कि यहां से कई युवा आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन में शामिल हुए थे। 2008 के बटला हाउस एंकाउंटर के बाद से खुफिया एजेंसियों की नजर इस इलाके पर गड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक इस इलाके के कई युवा संदिग्ध गतिविधि में शामिल हैं। इस मामले ने तूल पकड़ने पर इंडियन मुजाहिदीन का नेटवर्क बिहार के दरभंगा पहुंच गया। यहां यासिन भटकल ने बेहद मजबूत नेटवर्क स्थापित किया। ये इंडियन मुजाहिदीन का दूसरा सबसे मजबूत नेटवर्क माना जाता है। इसके बाद ये माड्यूल दरभंगा से पुणे पहुंच गया। इस दौरान आजमगढ़ पर लगा आतंक का टैग धीरे-धीरे समाप्त होने लगा।

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2015 में आतंक का टैग एक बार फिर से वापस हुआ जब खुफिया एजेंसियों को संदेह हुआ कि तीन युवाओं ने इस्लामिक स्टेट ज्वाइन किया है। हालांकि उन तीन युवाओं को लेकर आगे कोई भी जानकारी नहीं मिली। फिलहाल यहां के लोग अब इस आतंक के टैग को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होते हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें इस टैग के साथ रहने की आदत हो गई है। हालांकि यहां के निवासी अपने नेताओं से इस इलाके के लिए ज्यादा से ज्याद काम करने की मांग करते हैं। उनका कहना है कि अगर इलाके में विकास होगा और युवाओं को नौकरी मिलेगी तो आजमगढ़ पर लगा टेरर टैग अपने से ही हट जाएगा। इस मामले पर खुफिया विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यहां कुछ लोग गलत रास्ते पर हो सकते हैं लेकिन ये गलत है कि पूरे इलाके पर ही आतंक का टैग लगा दिया जाए।

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आजमगढ़ सीट पर सभी सियासी दलों की नजरें हैं। ये इलाका मुस्लिम बहुल है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने यहां के मुस्लिम मतदाताओं के साथ कई बार बैठक की। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ और मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी बाद में उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़ दिया और आजमगढ़ सीट अपने पास रखी। बीएसपी की नजर भी आजमगढ़ पर गड़ी हुई है। पिछले एक साल से बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने इस क्षेत्र में खास ध्यान दिया है। आजमगढ़ के निवासियों की नजर नेताओं पर होती है, वो क्या करते हैं इससे इनका कोई लेना-देना नहीं होता है।

आजमगढ़ से जुड़े तथ्य:

यूपी विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र का नंबर 347 है। इस इलाके में छठे चरण में मतदान होगा। ये विधानसभा क्षेत्र आजमगढ़ जिले और आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आता है। आजमगढ़ में 3,41,273 रजिस्टर्ड मतदाता हैं। इनमें 1,89,034 पुरुष और 1,52,220 महिला मतदाता हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने 31,441 वोटों से यहां जीत हासिल की थी। सपा से दुर्गा प्रसाद पांडेय ने ये सीट अपने नाम की। उन्हें 93,629 वोट मिले ते।

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English summary
UP Elections 2017: Will Azamgarh finally lose its ‘terror’ tag?
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