यूपी चुनाव: भारतीय राजनीति में कब, क्यों और कैसे शुरू हुआ 'आया राम, गया राम' का ट्रेंड

'आया राम गया राम' का जिक्र उस समय चर्चा में आया जब 1967 में हरियाणा के नेता गया लाल कांग्रेस पार्टी छोड़कर यूनाइटेड फ्रंट में चले गए। बाद में वापस कांग्रेस में आ गए।

Subscribe to Oneindia Hindi

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारे में हलचल तेज है। प्रमुख सियासी पार्टियां रणनीति के तहत चुनावी चालें चल रही हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर वोटरों के मिजाज को देखते हुए सभी दल अपनी रणनीति बना रहे हैं।

कई नेता जो इस ट्रेंड में हुए शामिल

इसमें कई ऐसे नेता हैं जो अपना नफा-नुकसान देखते हुए अपनी पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जाते दिखाई दिए। एक तरह से कहा जाए तो ये हालात आया राम-गया राम की स्थिति को दर्शाता है। भारतीय राजनीति में कई बार ऐसे मौके देखने को मिले जिसमें नेता आया राम-गया राम के रवैये पर चलते दिखाई दिए। इस चुनाव में भी ये ट्रेंड नजर आ रहा है।

इसे भी पढ़ें:- अखिलेश यादव ने जारी की 191 सपा उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

कांग्रेस नेता रहे नारायण दत्त तिवारी आए भाजपा के समर्थन में

कांग्रेस नेता रहे नारायण दत्त तिवारी आए भाजपा के समर्थन में

यूपी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण दत्त तिवारी ने इस बार के चुनावी मौसम में बीजेपी को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। उनके उनके बेटे रोहित ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है। भारतीय राजनीति में इस स्थिति को 'आया राम-गया राम' कहा जाता है। इसके कई उदाहरण सियासत में देखने को मिले हैं जहां कई ऐसे नेता थे जो कई साल तक एक ही दल में रहे लेकिन अचानक ही दूसरे दल में जाने से भी गुरेज नहीं किया।

1967 में पहली बार हुआ 'आया राम गया राम' का जिक्र

1967 में पहली बार हुआ 'आया राम गया राम' का जिक्र

'आया राम गया राम' का जिक्र उस समय चर्चा में आया जब 1967 में हरियाणा के नेता गया लाल कांग्रेस पार्टी छोड़कर यूनाइटेड फ्रंट में चले गए, बाद में वापस कांग्रेस में आ गए। जब वो कांग्रेस में वापस लौटे तो पार्टी के नेता रहे राव बीरेंद्र सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि गया 'राम इज आया राम'। ये बेहद छोटी घटना थी लेकिन उस समय से भारतीय राजनीति इस फ्रेज को अपना लिया।

1979 में जॉर्ज फर्नांडीस चौधरी चरण सिंह कैंप में हुए शामिल

1979 में जॉर्ज फर्नांडीस चौधरी चरण सिंह कैंप में हुए शामिल

भारतीय राजनीति में 'आया राम-गया राम' का ट्रेंड बढ़ने के बाद 1985 में दलबदल विरोधी कानून को लागू किया गया। जिसके चलते ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। कई बड़े नेता हैं जिन्होंने इस तरह से आया राम-गया राम की तर्ज पर पार्टी छोड़ी। 1979 में जॉर्ज फर्नांडीस ने महज इसलिए प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का संसद में मजबूती से बचाव किया, जिससे की वो चरण सिंह कैंप में शामिल हो सकें। अगले ही दिन वो चरण सिंह कैंप में शामिल हो गए।

अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू भी पार्टी बदलकर बीजेपी में पहुंचे

अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू भी पार्टी बदलकर बीजेपी में पहुंचे

ऐसा ही मामला हाल में अरुणाचल प्रदेश में दिखाई दिया, जहां मुख्यमंत्री पेमा खांडू, जो कि कांग्रेस विधायक थे। उन्होंने 2016 में महज तीन महीने के अंदर तीन पार्टियों में शामिल हुए। पहले वो कांग्रेस से विधायक थे और पार्टी छोड़कर पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश में शामिल हुए, बाद में उस पार्टी का साथ छोड़कर वो बीजेपी में पहुंच गए। वर्तमान में वो बीजेपी में हैं और नॉर्थ ईस्ट में गठित बीजेपी की दूसरी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।

सपा सांसद नरेश अग्रवाल का नाम भी इस लिस्ट में

सपा सांसद नरेश अग्रवाल का नाम भी इस लिस्ट में

समाजवादी पार्टी के बड़े नेता नरेश अग्रवाल के साथ ही ये ट्रेंड जुड़ा रहा है। उन्होंने अपना सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया। सपा में जाने से पहले वो लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 2007 में बीएसपी की सरकार यूपी में आई तो उन्होंने बीएसपी ज्वाइन कर ली। 2012 के विधानसभा चुनाव में वो सपा में शामिल हो गए, वर्तमान में वो सपा से राज्यसभा के सांसद हैं। बीजेपी सांसद जगदंबिका बाल भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में पहुंचे हैं। चार बार सांसद रहे रमेश तोमर इस बार के यूपी चुनाव में धौलाना से बीजेपी के उम्मीदवार हैं। राजनीति में आया राम-गया राम का ट्रेंड हमेशा देखा जाता रहा है। इन नेताओं को इसका फायदा भी मिलता रहा है।

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
up assembly election 2017: who starts Aaya Ram Gaya Ram phenomenon of Indian politics.
Please Wait while comments are loading...

LIKE US ON FACEBOOK