उत्तर प्रदेश के सर्वे में सामने आई बात बिजली और नौकरी है बड़ा मुद्दा, पर्यावरण की भी चिंता

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लखनऊ। 11 फरवरी को उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान होगा। इससे पहले इंडिया स्पेंड के लिए फोर्थलाइन की ओर से किए गए सर्वे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। इस सर्वे के लिए 2,513 फोन इंटरव्यू के लिए किए गए। 24 जनवरी से 31 जनवरी के बीच किए गए सर्वे में तमाम जमीनी मुद्दों से जुड़ सवाल भी पूछे गए।

पावर कट से हैं परेशान

पावर कट से हैं परेशान

सर्वे में यह बात सामने आई कि प्रदेश की बड़ी आबादी बिजली कटने की समस्या से खासा परेशान है। सर्वे के मुताबिक 38 फीसदी लोगों का कहना था कि वो हर रोज पावर कट का सामना करते हैं। वहीं 16 फीसदी ने कहा कि रोज तो नहीं लेकिन हफ्ते में एक बार पावर कट होता है। सर्वे के मुताबिक महिलाएं, जो पुरुषों के मुकाबले ज्यादा घरों और गांवों में रहती हैं, उन्हें शहरी इलाकों में रहने वालों से ज्यादा पावर कट्स का सामना करना पड़ता है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि 33 फीसदी पुरुष और 45 फीसदी महिलाओं का कहना है कि हर रोज पावर कट होता है।

वहीं 18 फीसदी पुरुष और 13 फीसदी महिलाओं का यह कहना है कि हर रोज नहीं लेकिन हफ्ते में एक बार पावर कट का सामना करना पड़ता है। 18 फीसदी पुरुषों और 15 फीसदी महिलओं का कहना है कि पावर कट कभी-कभी होता है। 28 फीसदी पुरुष और 25 फीसदी महिलाओं का कहना है कि पावर कट कभी नहीं होता।

नौकरी भी है बड़ा मुद्दा

नौकरी भी है बड़ा मुद्दा

बिजली के बाद बारी आती है नौकरी की। इंडिया स्पेंड के सर्वे में यह बात सामने आई है कि 20 फीसदी लोगों का मानना है कि नौकरी, उत्तर प्रदेश में बहुत ही जरूरी मुद्दा है।

बता दें कि प्रति 1000 काम करने वाली जनसंख्या 2009 से 2015 के बीच घट कर सिर्फ 82 से 52 तक सिमट रह गई है। सर्वे में पर्यावरण के मुद्दों पर पूछे गए सवालों पर 26 फीसदी ग्रामीण मतदाताओं के मुकाबले 46 फीसदी लोगों ने कहा कि वो जिस हवा में सांस ले रहे हैं।

यह बात दीगर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के कानपुर,फिरोजाबाद,इलाहाबाद और लखनऊ सरीखे बड़े शहर विश्व के 25 उन शहरों में शामिल हैं जो सबसे ज्यादा टॉक्सिक हैं।

सोलर एनर्जी करेंगे प्रयोग

सोलर एनर्जी करेंगे प्रयोग

हालांकि सर्वे में यह बात सामने आई कि एक बड़ा वर्ग है जिसने कहा कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और सोलर एनर्जी का उपयोग करेंगे। इसमें कम आय वाले व्यक्ति ज्यादा शामिल हैं। सर्वे में यह पूछा गया कि क्या सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का उपयोग करेंगे, इसके जवाब में 95 फीसदी शहरी और 92 फीसदी ग्रामीण मतदाताओं ने हां में जवाब दिया।

वहीं इसी सवाल के जवाब में जिनके पास कोई गाड़ी है उनमें 87 फीसदी ही इसे स्वीकार किया। जबकि जिनके पास कोई गाड़ी नहीं है, उनमें 96 फीसदी लोग सार्वजनिक परिवहन सेवाओं प्रयोग करने के सवाल पर हां जवाब दिया।

क्या कम हो जाएगा प्रदूषण ?

क्या कम हो जाएगा प्रदूषण ?

यह पूछे जान पर कि क्या सोलर एनर्जी के प्रयोग से उनके इलाके में प्रदूषण कम हो जाएगा इस पर 87 फीसदी शहरी और 88 फीसदी ग्रामीण लोगों ने इसे सही माना। वो लोग जिनके पास गाड़ी है उनमें 85 फीसदी और जिनके पास गाड़ी नहीं उनमें 90 फीसदी का मानना है कि सोलर एनर्जी के प्रयोग से प्रदूषण कम होगा।

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English summary
UP Assembly election 2017: Surey reveals power cuts and jobs are biggest issue
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