30 दिन में अखिलेश सरकार की योजनाओं पर चला योगी का डंडा

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कमान संभालते ही कई ऐसे फैसले लिए जिसको लेकर वह मीडिया की सुर्खियों में बने रहे। मुख्यमंत्री पद संभालते ही उन्होंने पहले अवैध बूचड़खानों पर धावा बोला इसके बाद उन्होंने मनचलों पर लगाम लगाने के लिए एंटी रोमियो दल का गठन किया तमाम जगहों पर सादे कपड़ों में पुलिसवाले इन रोमियों की धरपकड़ के लिए तैनात कर दिए गए।

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एक्शन में आएं मुख्यमंत्री

एक्शन में आएं मुख्यमंत्री

एक तरफ जहां प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री ताबड़तोड़ फैसले ले रहे थे, खुद लखनऊ के हजरतगंज थाने में औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो दूसरी तरफ वह प्रशासनिक फैसलों को लेने से भी नहीं चूक रहे थे, तमाम ऐसे अधिकारियों पर योगी आदित्यनाथ ने अपनी नजर टेढ़ी करनी शुरु कर दी जो किसी ना किसी तरह की अनियमितता में लिप्त थे। मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के तमाम फैसलों, प्रोजेक्टस और करीबी अधिकारियों की एक के बाद एक क्लास लगानी शुरु की और कई अहम निर्देश दिए। पिछले 30 दिनों में मुख्यमंत्री के इन्ही पॉवरपैक एक्शन पर आईए डालते हैं एक नजर

रिवर फ्रंट पर योगी का डंडा

रिवर फ्रंट पर योगी का डंडा

सरकार में आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो बड़ा कदम उठाया वह यह कि लखनऊ में अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट का दौरा करने पहुंचे, इस दौरान उन्होंने तमाम अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट पर खर्च हुई राशि का ब्योरा मांगा, मुख्यमंत्री के तमाम सवालों का जवाब देने में जब अधिकारी हिचकने लगे तो उन्होंने इसकी जांच बैठा दी और 15 दिनों के भीतर असिस्टैंट इंजीनियर को उन्होंने बर्खास्त कर दिया। यहां गौर करने वाली बात है कि गोमती रिवर फ्रंट का अभी सिर्फ 60 फीसदी ही काम पूरा हुआ है लेकिन कुल 1600 करोड़ रुपए की धनराशि जो इस प्रोजेक्ट लिए आवंटित की गई थी उसमें से 1500 करोड़ रुपए खर्च हो गए है।

खत्म हुई समाजवादी पेंशन योजना

खत्म हुई समाजवादी पेंशन योजना

मुख्यमंत्री ने रिवर फ्रंट के बाद दूसरा सबसे बड़ा फैसला जो लिया वह यह कि उन्होंने अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना को बंद करने का फैसला लिया और इसकी जांच के आदेश दे दिए। गौरतलब है कि इस योजना के तहत गरीब परिवारों को हर महीने 500 रुपए दिए जाते थे, लेकिन इस योजना को अब खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब विधवाओं, दिव्यांगों और बुजुर्गों को 500 रुपए की जगह 100 रुपए की पेंशन दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक प्लान पेश करने को भी कहा है।

योजनाओं का नाम बदला

योजनाओं का नाम बदला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की सरकार में चल रही कई योजनाओं के नामों को भी बदल दिया, जिसमें सबसे अहम है शादी अनुदान योजना, योगी सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर कन्यादान योजना कर दिया। आपको बता दें कि इस योजना के तहत गरीब परिवार की बेटियों को शादी के लिए आर्थिक मदद की जाती थी, इसके तहत गरीब परिवार को बेटी के विवाद के लिए 20,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने समाजवादी एंबुलेंस सेवा का नाम बदलकर एएलएस (एडवांस लाइफ सर्पोट) एंबुलेंस रख दिया गया है।

साईकिल ट्रैक पर चलेगा बुल्डोजर

साईकिल ट्रैक पर चलेगा बुल्डोजर

मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ अखिलेश यादव के चर्चित साईकिल ट्रैक पर भी बुल्डोजर चलाने की योजना बना रहे हैं, इसके लिए उन्होंने बकायदा आदेश भी दे दिए हैं। उन्होंने निर्देश देते हुए साफ कर दिया है कि अगर रोड़ को चौड़ा करने के लिए साईकिल ट्रैक को तोड़ने की जरूरत है तो उसे तोड़ दीजिए। गौरतलब है कि सपा सरकार के दौरान अखिलेश यादव ने लखनऊ, नोएडा सहित कई जगहों पर साईकिल ट्रैक बनवाया गया था, जिसपर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे।

सपा सरकार के करीबी अधिकारियों की छुट्टी

सपा सरकार के करीबी अधिकारियों की छुट्टी

सपा सरकार के दौरान जिन अधिकारियों पर सपा के करीबी होने का आरोप लगा सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने उनकी छुट्टी की और एक साथ 20 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया, यही नहीं आज एक बार फिर से मुख्यमंत्री ने 41 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया, जिसमें सबसे चर्चित नाम एलडीए के वीसी और लखनऊ के पूर्व जिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह का नाम भी शामिल हैं, उनपर लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप है।

बड़ें नामों पर भी गिरी गाज

बड़ें नामों पर भी गिरी गाज

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जिन अधिकारियों की छुट्टी की उसमें नवनीत सहगल जोकि अखिलेश सरकार में मुख्य सचिव सूचना थे, इसके अलावा मुख्यमंत्री की मुख्य सचिव अनीता सिंह का भी योगी आदित्यनाथ ने तबादला कर दिया। अनीता सिंह को अखिलेश का काफी करीबी माना जात था। यही नहीं अमर कुमार और पंढारी यादव, नएडा के अध्यक्ष रमा रमण,गुरदीप सिंह की भी छुट्टी कर दी गई। इन तमाम अधिकारियों को सपा सरकार के दौरान अखिलेश यादव का करीबी माना जाता था।

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English summary
Top decisions of Yogi adityanath against Akhilesh Yadav projects and officials. Yogi Adityanath take few big decisions in his last 30 days tenure.
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