सपा घमासान : संंकेत, जो साफ करते हैं कि चाचा-भतीजा विवाद में अखिलेश यादव बनेंगे 'बाजीगर'

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi

नई दिल्‍ली। समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह से अब तक तो हर कोई परिचित हो चुका है। अब देखना यह होगा कि पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव चाचा-भतीजे की तकरार में किस पक्ष का साथ देते हैं। फिलहाल, दो प्रमुख तथ्‍य सामने आ रहे हैं।

पहला तथ्‍य यह है कि अ‍खिलेश यादव को रामगोपाल यादव का करीबी माना जाता है और उन्‍होंने अब तक अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर सरेआम कोई भी टिप्‍पणी नहीं की है।

मुलायम से मिले पीके, सपा-कांग्रेस साथ में लड़ सकती हैं यूपी चुनाव

अ‍खिलेश यादव की जीत लगभग तय

पहला तथ्‍य यह है कि अ‍खिलेश यादव को रामगोपाल यादव का करीबी माना जाता है और उन्‍होंने अब तक अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर सरेआम कोई भी टिप्‍पणी नहीं की है। जबकि दूसरा तथ्‍य यह है कि अखिलेश विरोधी कैंप से ताल्‍लुक रखने वाले शिवपाल यादव बीते शुक्रवार को पार्टी के कई वरिष्‍ठ राज्‍य अधिकारी और नेताओं समेत सहारनपुर आैर गाजियाबाद गए थे और वहां रुके लेकिन अखिलेश विरोधी होने की वजह से कई पार्टी नेताओं ने उनसे दूरी बनाए रखी। 

विशेषज्ञों की मानें तो चाचा-भतीजा विवाद से उभरती तस्‍वीर से साफ है कि अखिलेश यादव की जीत होने वाली है और वही पार्टी की कमान संभालने वाले हैं। जबकि इसमें चाचा शिवपाल और उनके गुट को हार का मुंंह देखना पड़ सकता है।

अखिलेश के मर्सिडीज बेंज विकास रथ से चाचा शिवपाल गायब

प्रेस कॉन्‍फ्रेंस अखिलेश को समर्थन का संकेत

सपा के वरिष्‍ठ पार्टी नेताओं की मानें तो मुलायम सिंह राजनीति की बिसात पर दांव चलने में माहिर हैं। उन्‍हें साफ दिख रहा है कि अखिलेश यादव को समर्थन दिए बगैर पार्टी का भला संभव नहीं है। चाचा-भतीजा विवाद के ठीक एक दिन बाद 25 अक्‍टूबर को मुलायम सिंह यादव का प्रेस कॉन्‍फ्रेंस आयोजित करना सीधा संकेत है कि वह अखिलेश यादव को नकार नहीं सकते।

पहला तथ्‍य यह है कि अ‍खिलेश यादव को रामगोपाल यादव का करीबी माना जाता है और उन्‍होंने अब तक अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर सरेआम कोई भी टिप्‍पणी नहीं की है।

मुलायम सिंह ने इसमें साफ किया कि जनता की तरफ से चुने गए प्रतिनिधि ही अपना नेता चुनेंगे। हालांकि, उन्‍होंने यह भी स्‍पष्‍ट किया था कि अब वह अखिलेश यादव पर छोड़ते हैं कि शिवपाल सिंह यादव व उनके निष्‍कासित साथियों को कैबिनेट में वापस लेंगे या नहीं।

महागठबंधन की कवायद को बड़ा झटका, सपा के रजत जयंती कार्यक्रम में नहीं होंगे शामिल नीतीश

शिवपाल और रामगोपाल की चुप्‍पी के मायने

इस पूरे मामले में शिवपाल सिंह यादव और रामगाेपाल जितना चुप रहेंगे, अखिलेश उतना ही प्रखर होकर सामने आएंगे। पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में सपा के एक प्रमुख नेता ने अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया कि,'आप इस पूरे विवाद को एक चक्रव्‍यूह की तरह देख सकते हैं लेकिन अंत में आपको आभास हो जाएगा कि यह सब अभिमन्‍यु यानी अखिलेश यादव को मदद करने के लिए बनाई गई रणनीति का हिस्‍सा था।'

युवाओं का है अखिलेश यादव को खुला समर्थन

लोकसभा सांसद धर्मेंद यादव, अक्षय और तेज प्रताप यादव समेत यादव परिवार के युवा नेता अखिलेश के साथ नजर आ रहे हैं। पार्टी के एक नेता की मानें तो ऐसी संभावना कम ही है कि असेंबली इलेक्‍शन पूरे होने तक रामगोपाल यादव पार्टी में वापस आएं।

वहीं इटावा के अन्‍य सपा नेता ने कहा कि सभी युवा अखिलेश यादव के समर्थन में खड़े हैं। हकीकत तो यह है कि अखिलेश यादव का विरोध करने को लेकर शिवपाल सिंह यादव की घर में ही थू-थू हो रही है।

पहला तथ्‍य यह है कि अ‍खिलेश यादव को रामगोपाल यादव का करीबी माना जाता है और उन्‍होंने अब तक अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर सरेआम कोई भी टिप्‍पणी नहीं की है।

अगर मुलायम सिंह यादव अब भी शिवपाल सिंह यादव के साथ है तो राजनीति के हिसाब से यह अहम भी है। सपा प्रमुख को पता है कि पार्टी को जमीनी मजबूती प्रदान करने में शिवपाल यादव का अहम रोल रहा है। यही वजह है कि वह फिलहाल रामगोपाल यादव से किनारा करते नजर आ रहे हैं।

नरेंद्र मोदी की छवि से अखिलेश की तुलना

बीते एक महीने में चाचा-भतीजा विवाद का पूरा घटनाक्रम देखें तो मुलायम सिंह यादव के पुराने सगे-संबंधी और शुभचिंतक उनसे लगातार मिल रहे हैं। वे सलाह दे रहे हैं कि वह अखिलेश यादव को सामने रखें। चाचाओं से अलग रहकर ही अखिलेश यादव का 'विकास की आंधी' नारा सफल होता नजर आएगा। यहां तक कि कुछ लोगाें ने तो मुलायम सिंह यादव को सलाह दी कि अखिलेश यादव की छवि नरेंद्र मोदी की ओबीसी छवि से मिलती है।

यादव परिवार के एकसाथ आने के मुद्दे पर बोलते हुए एक सपा नेता ने बताया कि,'अखिलेश यादव को यह अच्‍छे से पता है कि एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी वोटरों में क्‍या अंतर है और उनकी क्‍या जरूरतें हैं।'

देश-दुनिया की तबरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Samajwadi party crisis: As father lets uncles battle it out, Akhilesh Yadav may be the only winner
Please Wait while comments are loading...