गैंगरेप पीड़िता की हत्या पर समाजवादी पार्टी विधायक अरुण वर्मा के खिलाफ केस, पिता ने दर्ज कराई शिकायत

गैंगरेप पीड़िता की मौत से पूरे इलाके में तनाव फैल गया जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू की और विधायक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

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सुल्तानपुर। गैंगरेप का आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की की मौत बाद समाजवादी पार्टी के विधायक अरुण वर्मा पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मामला सुल्तानपुर के कोतवाली थाने से जुड़ा है। विधायक पर आरोप लगाने वाली लड़की शनिवार को अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित पंचायत भवन के पास घायल मिली थी। उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। लड़की के पिता ने विधायक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है।

3 साल पहले का है मामला

3 साल पहले का है मामला

गैंगरेप पीड़िता की मौत से पूरे इलाके में तनाव फैल गया जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू की और विधायक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआत में पुलिस विधायक को इस मामले में क्लीन चिट दे चुकी है। अब पीड़िता की मौत से एक बार इस मामले में नया मोड़ आया है। घटना तीन साल पहले हुई थी। 5 अक्टूबर 2013 को ग्राम चोरमा थाना जयसिंहपुर निवासी पीड़िता के पिता राजेद्र सिंह ने कोतवाली थाने पर एफआईआर दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि वे लोग 18 सितंबर 2013 को डॉक्टर को दिखाने सुल्तानपुर शहर आए थे, जहां से उनकी नाबालिग बेटी गायब हुई थी। READ ALSO: टीचर ने 10 साल में 200 बच्चों को बनाया हवस का शिकार, पैसों के लिए करता था ब्लैकमेल

ये है पूरा मामला

ये है पूरा मामला

केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने जांच में विधायक को मिली क्लीन चिट को खारिज करने के बाद निचली अदालत की ओर से उनके खिलाफ अग्रिम जांच का आदेश न मानने पर उक्त आदेश पारित किया। कोर्ट के दखल के बाद जांच अधिकारी बदल दिया गया है। वहीं हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गंभीर रुख अपनाया और कोर्ट ने पुलिस को दो हफ्ते में जांच कर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने पुलिस को हिदायत दी थी कि यदि विवेचना में कोई खामी नजर आई तो जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी। इस बीच कोर्ट ने रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष से पीड़िता को 7 लाख रुपए सहायता राशि भी दिए जाने का आदेश भी दिया था। पीड़िता के वकील सुशील कुमार सिंह के मुताबिक, कोर्ट के आदेश पर सख्त सुरक्षा के बीच अन्य अभियुक्तों के खिलाफ चल रही सुनवाई में पीड़िता ने 27 मई 2016 के अपने पहले के लिखित बयान का समर्थन किया था, जिसमें उसने विधायक अरुण वर्मा का नाम लिया था। READ ALSO: ननद-भाभी दोनों से थे NRI के अवैध संबंध, घरवालों ने आंखों में मिर्च पाउडर डालकर काटा गला

विधायक समेत 7 लोगों पर है आरोप

विधायक समेत 7 लोगों पर है आरोप

पीड़िता के 6 अक्टूबर 2013 को बरामद होने के बाद 9 अक्टूबर 2013 को कोर्ट में उसका लिखित बयान हुआ, जिसमें उसने जयसिंहपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अरुण वर्मा पर सात लोगों के साथ मिलकर गैंगरेप का आरोप लगाया। पीड़िता ने बयान में विधायक के अलावा पूनम यादव, धीरेंद्र, आशुतोष सिंह, मोनू खान, अंजुम खान, गुड्डू लाला और अनिता सिंह के भी घटना में शामिल होने का आरोप लगाया। सीओ सिटी वीपी सिंह ने जांच में 2 फरवरी 2014 को विधायक अरुण वर्मा, पूनम यादव और धीरेंद्र को क्लीन चिट दे दी और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट भेज दिया जहां अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम सुल्तानपुर की कोर्ट में उनका केस चल रहा है। READ ALSO: महिला ने रेप के 9 साल बाद लिखी प्रेमी को चिट्ठी तो जवाब पढ़कर रह गई हैरान

क्‍लीन चीट के खि‍लाफ दायर की थी याचिका

क्‍लीन चीट के खि‍लाफ दायर की थी याचिका

पीड़िता ने विधायक और उनके दो साथियों को मिली क्लीन चिट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी। जिस पर निचली अदालत ने अग्रिम जांच का आदेश दे दिया लेकिन उस पर अमल नही हुआ। इस बीच अन्य अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई तेजी से चली। हर तरफ से निराश होकर पीड़िता के पिता ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने सवाल उठाया कि पुलिस विधायक की प्राइवेट आर्मी की तरह क्यों पेश आ रही है। गृह सचिव एमपी मिश्रा के हस्तक्षेप पर सुल्तानपुर एसपी ने जांच बदल कर नए इनवेस्टिगेशन ऑफिसर को सौंप दी गई और पहले जांच करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का भी आदेश दिया।

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English summary
Samajwadi Party mla arun verma accused in murder of gang rape victim.
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