झांसी: सपा-कांग्रेस गठबंधन की वजह से मजबूरन देना पड़ रहा है विरोधी कांग्रेसी प्रत्याशी का साथ

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झांसी। बुंदलेखंड की राजनीति में राजा समथर यानी राजा रणजीत सिंह जूदेव का बड़ा नाम रहा है। उनके कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक दौर में उनकी सीधे इंदिरा और राजीव गांधी जैसे शीर्षस्थ नेताओं से सीधे बात होती थी। गरौठा सीट पर रणजीत सिंह के नाम का ही सिक्का चलता था. बुंदलेखंड की यही इकलौती सीट है जहां कांग्रेस नेता व समथर रियासत के राजा रणजीत सिंह जूदेव के नाम जीत की डबल हैट्रिक रही। अब सूबे में गठबंधन की राजनीति से बदले हालातों के बीच वह उस प्रत्याशी के पक्ष में ही वोट मांगने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिसने उन्हें दो बार हराकर राजपरिवार की पुश्तैनी सियासत पर पूर्ण विराम लगाया था। सपा विधायक व गरौठा प्रत्याशी दीपनारायण यादव के समर्थक उनके साथ के फ़ोटोज़ सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। संभव है कि गठबंधन की मजबूरी के चलते कांग्रेस के पुराने दिग्गज राजा समथर दीप नारायण को जिताने की अपील करते नज़र आयेंगे।

1974 में कांग्रेस विरोधी लहर में जीत दर्ज कर की थी सियासत में एंट्री

1974 में कांग्रेस विरोधी लहर में जीत दर्ज कर की थी सियासत में एंट्री

समथर महाराज रणजीत सिंह जूदेव का राजनीतिक उदय 70 के दशक में हुआ। यह वह दौर था, जब झांसी जिला या कहें समूचे बुन्देलखण्ड की राजनीति में रणजीत सिंह जूदेव का व्यक्तित्व सबसे प्रभावशाली था। रणजीत सिहं जूदेव 1974 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1977 के चुनाव में जब जनता लहर में कांग्रेस के पैर उखड़ गये थे। उस समय जूदेव यह सीट कांग्रेस की झोली में डाल कर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था। जब जेपी आंदोलन की आग में कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए जमानत भी बचाना मुश्किल था। पूरे देश में जनता दल की आंधी चल रही थी, तब भी 1989 में उन्होंने जीत दर्ज की थी। राममंदिर आंदोलन से भाजपा की लहर में भी 1991 में राजा रणजीत सिंह ने अपने इलाके में कांग्रेस को परास्त नहीं होने दिया।

सबसे कम उम्र के विधायक थे रणजीत सिंह, भाजपा से हारे

सबसे कम उम्र के विधायक थे रणजीत सिंह, भाजपा से हारे

जूदेव के नाम प्रदेश के सबसे कम उम्र के विधायक के रूप में रिकार्ड दर्ज है। वह 23 साल की उम्र में ही विधायक बन गए थे। भाजपा के कु . मानवेन्द्र सिंह ने पहली बार राजा समथर को 1985 के चुनाव में मात दी, लेकिन अगले चुनाव में उन्होंने अपनी पराजय का बदला मानवेन्द्र सिंह से ले लिया। वह 1993 तक विधायक रहे।

1996 से सपा नेता का चन्द्रपाल सिंह का उदय

1996 से सपा नेता का चन्द्रपाल सिंह का उदय

गरौठा विधान सभा से सपा नेता का चन्द्रपाल सिंह का उदय हो गया। चन्द्रपाल ने 1996 के चुनाव में जूदेव को पराजित किया। इसके बाद 2002 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी व पहली बार राजनीति में उतरे बृजेन्द्र कुमार व्यास डमडम ने सपा के चन्द्रपाल सिंह यादव को हराया। जूदेव इस चुनाव में तीसरे स्थान पर पहुंच गये। यहीं से जूदेव पिछड़ते चले गये। सपा नेता दीपनारायण सिंह यादव ने 2007 के चुनाव में कांग्रेस के जूदेव को पराजित किया। वहीं लगातार दूसरी बार बसपा के देवेश पालीवाल को हराकर वह विधायक बने। माना जाता है कि दीपनारायण ने जूदेव की राजनीति को सीमित कर दिया।

सपा-कांग्रेस गठबंधन बना राजा की मजबूरी

सपा-कांग्रेस गठबंधन बना राजा की मजबूरी

इस बार वह सपा कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनावी समर में उतरे हैं। यही कारण है कि गरौठा विधानसभा में अपना प्रभावशाली वजूद रखने वाले राजा रणजीत सिंह जूदेव की मजबूरी उसी प्रत्याशी के साथ खड़े होने की हो गई है, जिसने उनको दो बार हराकर राजनीतिक सूर्यास्त के मुहाने पर ला खड़ा किया था। वहीं, सपा प्रत्याशी दीपनारायण सिंह के मुकाबले इस बार राजा रणजीत सिंह जूदेव तो मैदान में नहीं हैं, लेकिन भाजपा प्रत्याशी और किसान नेता जवाहर लाल राजपूत से उनको कड़ी चुनौती मिल रही है। जवाहर के समर्थन में गरीब और किसानों के खड़े होने के डर को भांपते हुए दीपनारायण सिंह रणजीत सिंह को खुलकर अपने साथ खड़ा करना चाहते हैं। हालाँकि अभी रणजीत सिंह के समर्थकों का बड़ा तबका पूरे हालातों पर खामोश बैठा है।

राजा रणजीत सिंह के पूर्व गरौठा की यह थी सियासी तस्वीर

राजा रणजीत सिंह के पूर्व गरौठा की यह थी सियासी तस्वीर

राजा रणजीत सिंह जूदेव से पहले गरौठा से 1951 में रामसहाय शर्मा- कांग्रेस, 1957 -लक्ष्मण राव कदम-कांग्रेस, 1962 काशीप्रसाद द्विवेदी कांग्रेस, 1967-कन्हैया लाल भारतीय जनसंघ, 1969-आत्माराम गोविंद खैर विधायक रहे। ये भी पढे़ं:सहारनपुर: यूपी की नंबर 3 विधानसभा पर लगी है सपा, भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर, क्या है खास

 
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English summary
jhansi congress worker agaisnt sp congress tie up election, worker of sp are supporiting to congress candidate.
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