यूपी में पीएम नरेन्द्र मोदी ने संवार दी 'स्कैम' की सूरत!

By: राजीव रंजन तिवारी
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दिल्ली। बेशक, शब्दों की महिमा अपरंपार है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में आजकल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जबरदस्त सियासी 'घमासान' छिड़ा हुआ है। परंपरागत तरीके से हर कोई एक-दूसरे को मात देने की कोशिश में है। इसी क्रम में पिछले दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक नए नकारात्मक शब्द 'स्कैम' यानी घोटाला का अविष्कार किया। मोदी के 'स्कैम' का अर्थ यानी एस से समाजवादी पार्टी, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश यादव और एम से मायावती है। इस 'स्कैम' पर आजकल खूब बहस छिड़ी हुई है। इस नकारात्मक 'स्कैम' के जवाब में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक सकारात्मक 'स्कैम' गढ़ा है। राहुल गांधी के 'स्कैम' का मतलब एस से सर्विस (सेवा), सी से करेज (बहादुरी, हिम्मत), ए से एबिलिटी (क्षमता), एम से मॉडेस्टी (विनम्रता)। कहा जा रहा है कि अब इन्हीं दोनों 'स्कैम' के बीच टक्कर होगी।

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सपा-कांग्रेस, बसपा और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

सपा-कांग्रेस, बसपा और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

हालांकि पहले यह माना जा रहा था कि यूपी में राहुल-अखिलेश गठबंधन, बसपा और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा, लेकिन मोदी ने ‘स्कैम' में मायावती को शामिल कर न सिर्फ अपने नकारात्मक ‘स्कैम' की सूरत संवार दी बल्कि मुकाबले को भी आमने-सामने कर दिया है। मतलब ये कि भले बसपा राहुल-अखिलेश गठबंधन से अलग है लेकिन चुनाव बाद जरूरत पड़ने पर वह इस गठबंधन में शामिल हो सकती हैं। मोदी के ‘स्कैम' को बिहार के ‘डीएनए' से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल खड़ा करके मोदी ने भाजपा की बेहद स्वस्थ सेहत को खराब कर दी थी। ठीक उसी तरह यूपी में भी उन्होंने जिस ‘स्कैम' की चर्चा की है, वह भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि यूपी के सर्वाधिक वोटर यानी 80 फीसदी से अधिक सपा, बसपा और कांग्रेस के हैं।

मोदी का स्कैम से आजादी पाने का आह्वान

मोदी का स्कैम से आजादी पाने का आह्वान

गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने मेरठ में अपनी पहली रैली की। 1857 में मेरठ से आजादी की लड़ाई शुरू होने का हवाला देते हुए उन्होंने लोगों से इस चुनाव में "स्कैम" से आजादी पाने का आह्वान किया। उन्होंने "स्कैम" की व्याख्या करते हुए कहा- "एस से समाजवादी पार्टी, सी से कांग्रेस, ए से अखिलेश यादव और एम से मायावती।" उन्होंने सपा के परिवारवाद पर भी तंज कसा और कहा कि जनता त्रस्त है और यहां की सत्ताधारी पार्टी चाचा-भतीजा, मामा-साला और भतीजे की बहू, न जाने कहां-कहां किस-किस में फंसी हुई है। लेकिन शायद मोदी यह भूल गए कि इस बार भाजपा ने ही सबसे ज्यादा परिवाववाद को बढ़ावा दिया है। जानकारी के अनुसार, भाजपा के सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह, भाजपा नेता विजय बहुगुणा की बहन और कांग्रेस से भाजपा में आईं रीता बहुगुणा जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री और अब राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह, भाजपा नेता लालजी टंडन के पुत्र आशुतोष टंडन और छह माह पहले बसपा से भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मौर्य भी भाजपा के कमल के निशान पर चुनाव लड़ेंगे। इस सवाल का जवाब मोदी को देना चाहिए कि इसे परिवारवाद कहा जाए या नहीं।

अल्पसंख्यकों का वोट किनके पाले में जाएगा?

अल्पसंख्यकों का वोट किनके पाले में जाएगा?

खैर, इस आलेख का मूल विषय मोदी का ‘स्कैम' है। इसलिए विषयांतर होने से पहले यह स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि जो सोचकर मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल खड़ा किया था, वह उलटा पड़ गया। भाजपा बिहार में गर्त में चली गई और मोदी के धुर विरोधी नीतीश कुमार पुनः सत्ता पर काबिज हो गए। दरअसल, मोदी के डीएनए टेस्ट से हुई नकारात्मक प्रतिक्रिया ने भी भाजपा की लुटिया डूबो दी थी। इसी दरम्यान में मैंने ‘मोचक ने ही भाजपा को संकट में डाला' शीर्षक से एक आलेख भी लिखा था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। आखिर में वही हुआ, जो लेख में आशंका जताई गई थी। ठीक उसी तरह यूपी में जो हालात बन रहे हैं, वे बिहार से बहुत इत्तर नहीं हैं। एक तो नोटबंदी की वजह से हुई परेशानियों ने लोगों को भाजपा से नाराज किया। अभी वह नाराजगी घटी भी नहीं थी कि मोदी ने ‘स्कैम' की चर्चा छेड़कर यूपी के 80 फीसदी से अधिक वोटरों की दुखती रग पर हाथ रख दिया। आपको बता दें कि करीब तीस वर्ष से यूपी का अधिसंख्य वोटर सपा और बसपा में ही बंटा हुआ है। इन वोटरों को सपा-बसपा के अलावा कोई भी पार्टी प्यारी नहीं है। इन वोटरों में अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, जिनकी संख्या यूपी में लगभग 30 से 35 प्रतिशत है, जो सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच ही बंटता है। चूंकि इस बार कांग्रेस और सपा का गठबंधन है, इसलिए यह उम्मीद जताई जा रही है कि पूरा अल्पसंख्यक वोटर इन्हीं के खाते में जाएगा।

बसपा और दलित का वोट बैंक

बसपा और दलित का वोट बैंक

रहा सवाल बसपा का तो उसका वोट बैंक दलित है। यूपी में दलित वोटरों की अच्छी-खासी संख्या है। उन दलित वोटरों को अपने पाले में करने के लिए भी भाजपा ने बहुत कोशिशें की, लेकिन यह पहले से संभव नहीं दिख रहा था कि दलित वोटर भाजपा की ओर मुखातिब होगा। इसी बीच मोदी ने ‘स्कैम' की चर्चा कर दलित वोटरों को और नाराज कर दिया है। सबसे पहले तो यहां यह स्पष्ट कर दें कि यूपी के दलित वोटरों को किसी भी सूरत में बसपा सुप्रीमो मायावती की बुराई पसंद नहीं है। मायावती की बुराई करने वाले को यूपी के दलित वोटर अपना बड़ा दुश्मन मानता हैं। मोदी ने कुछ इसी तरह का काम कर दिया है। दूसरी तरफ दलित वोटों के लिए मोदी और शाह ने यूपी में काफ़ी प्रयास किए थे लेकिन बिहार की तरह यहां भी आरएसएस के एक पदाधिकारी ने भरभंड कर दिया। संघ के नेता आरक्षण को हमेशा के लिए समाप्त करने की बात कहकर दलितों को और नाराज कर दिया। इसका नुकसान भाजपा को होगा। इतना ही नहीं भाजपा में आंतरिक कलह भी गजब है, जो उसके लिए खतरे की घंटी है। पिछले दिनों गोंडा में भाजपा नेता महेश नारायण तिवारी खूब रोए, फिर निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर दिया, आज़मगढ़ के पूर्व सांसद रमाकंत यादव ने ग़ुस्से में पार्टी से इस्तीफ़ा देकर अपने निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया। अमेठी में भाजपाइयों ने ही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का पुतला फूंका । इलाहाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं ने ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य का पुतला जलाया। बरेली में कंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के भाजपा कार्यकर्ता हंगामा खड़ा किए हुए हैं। फ़ैज़ाबाद के नाराज़ भाजपाइयों ने पार्टी दफ़्तर में ताला डाल कर प्रदर्शन तक किया। इस तरह कह सकते हैं कि भाजपा का अपना घर तो संभल नहीं रहा और ‘स्कैम' की चर्चा कर वे दूसरों पर आरोप मढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभाओं में होने वाली चर्चाओं में एक और बात नोट की जा रही है कि वे जहां फर्राटे से बोलना शुरू करते हैं वहां कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निशाना पर जरूर लेते, जबकि राहुल गांधी अपनी सभाओं में भले सरकार के कामकाज की आलोचना करते हों, पर मोदी का नाम तक नहीं लेते। इतना ही नहीं राहुल गांधी की सभाओं में मोदी मुर्दाबाद के नारे लगाने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वे यह करने से मना भी करते हैं। इसे भी यूपी का वोटर नोट कर रहा है। लोग समझने लगे हैं कि सिर्फ नकारात्मक राजनीति करने से काम चलने वाला नहीं है। केवल झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक लाभ भले थोड़े वक्त के लिए आनन्द दे दे, लेकिन वह टिकाऊ नहीं होता। बहरहाल, इसमें कोई शक नहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद अपनी ही कार्यशैली से यूपी में भाजपा की खटिया खड़ी करते दिख रहे हैं। यदि मौजूदा ग्राफ की बात करें कि राहुल-अखिलेश की जोड़ी को यहां खूब पसंद किया जा रहा है। बाद में मतदान तक क्या हालात बनेंगे, कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस के रग-रग से वाकिफ और धर्मनिरपेक्षता को आधार मानने वाले तहसीन पूनावाला कहते हैं-‘नकारात्मक राजनीति कांग्रेस का कल्चर नहीं है। नकारात्मक राजनीति करने का जिम्मा अन्य दलों के पास है।' वहीं यूपी में कांग्रेस के प्रचार अभियान के प्रमुख व राज्य सभा सांसद डा.संजय सिंह कहते हैं-‘चाहे कुछ भी हो राहुल जी अपनी शालीनता को नहीं छोड़ सकते। राहुल जी फेयर पोलिटिक्स करते हैं, उन्हें डिस्प्यूट में नहीं फंसना'।

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English summary
In UP election, PM Narendra Modi's SCAM is in debate. Rahul Gandhi and Narendra Modi both told different meanings of scam.
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