हाईकोर्ट ने कहा जो दरोगा नहीं बन सके उन्हें टीचर बनाओ

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इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दरोगा न बन पाने वाले अभ्यार्थियों को टीचर बनाने का आदेश दिया है। ये आदेश उन अभ्यार्थियों के लिए है। जिनका चयन दरोगा और टीचर दोनों पदों पर हुआ था। लेकिन दरोगा भर्ती अधर में लटक जाने के कारण अभ्यार्थी भी बीच में ही लटक गए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश को स्पष्ट करते हुए ये भी कहा कि यदि संभव हो तो संबंधित अभ्यार्थियों को उसी विद्यालय में नियुक्त की जाए। जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। हालांकि कोर्ट ने इस पर कोई बाध्यता नहीं की है। बल्कि विकल्प दिया है कि रिक्त पद होने पर ही उस विद्यालय को वरीयता दें नहीं तो दूसरे विद्यालय में भी नियुक्ति दी जा सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा जो दरोगा नहीं बन सके उन्हें टीचर बनाओ

क्या है मामला?

दरअसल ये बड़ा ही दिलचस्प मामला है। यूपी में हुई 72,825 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित कुछ अभ्यार्थियों का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा पद (एसआई) पर हो गया। टीचर की अपेक्षा दरोगा पद को अभ्यार्थियों ने वरीयता दी और टीचर की नौकरी को छोड़ दरोगा की ट्रेनिंग पर चले गए लेकिन इसी बीच दरोगा भर्ती विवादों में घिर गई। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो लिखित परीक्षा का परिणाम रद्द कर फिर से परिणाम घोषित कर ग्रुप डिस्कशन कराने का आदेश हो गया। जिससे कई अभ्यार्थियों का भविष्य लटक गया। न अब वो दरोगा रहे और न ही टीचर। इन्हीं लटके हुए अभ्यार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अभ्यार्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया और इन्हें फिर से टीचर बनाने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा जो दरोगा नहीं बन सके उन्हें टीचर बनाओ

कोर्ट में ये बातें आई सामने

लखीमपुर खीरी और कुशीनगर के कई अभ्यार्थियों के साथ इस मामले को शिवलखन सिंह यादव ने याचिका के तौर पर कोर्ट में दायर किया था। जिस पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुनवाई शुरू की। कोर्ट के सामने साक्ष्य पेश किए गए कि 72,825 सहायक अध्यापक भर्ती में याचिकागण चयनित हुए थे। 4 फरवरी 2015 को 6 महीने की ट्रेनिंग कर परीक्षा नियामक की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। लेकिन मौलिक नियुक्ति के पहले ही दरोगा भर्ती 2011 में चयनित हो गए और दरोगा प्रशिक्षण पर चले गए।

22 नवंबर 2016 तक प्रशिक्षण चला लेकिन इस बीच अभिषेक कुमार सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दरोगा भर्ती लिखित परीक्षा का परिणाम रद्द कर दिया और फिर से परिणाम घोषित कर ग्रुप डिस्कशन कराने का आदेश दे दिया। ऐसे में याचिकाकर्ता का भविष्य दांव पर है। याचिकाकर्ता सहायक अध्यापक के पद पर लौटना चाहते हैं। उनको नियुक्ति पत्र दिया जाए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विषय की गंभीरता को देखते हुए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति पत्र दिया जाए और संभव हो तो उसी विद्यालय में नियुक्ति हो, जहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

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English summary
High Court order in a teachers recruitment case
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