इंसेफेलाइटिस से कब मुक्त होगा पूर्वी उत्तर प्रदेश? भयावह हैं आंकड़े

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश का पूर्वी इलाका यानी पूर्वांचल हर साल गर्मी और मानसून के मौसम में जापानी बुखार, इंसेफेलाइटिस का शिकार हो जाता है। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में अस्पतालों के एक बेड पर दो-दो बच्चे सुलाए गए होते हैं क्योंकि संसाधन सीमित हैं। पूर्वांचल के स्थानीय लोगों की भाषा में 'नवकी बीमारी' का रूप इतना विकराल है कि इससे एक समय में 3 से 4 हजार मौतें होती थीं। इस वायरस की पहचान साल 2005 में हुई थी जापानी बुखार को JE Virus कहते हैं और AES को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम नाम से जानते हैं।

इंसेफेलाइटिस से कब मुक्त होगा उत्तर प्रदेश? भयावह हैं आंकड़े
Encephalitis Fever: Know Causes, Symptoms and Cure । वनइंडिया हिंदी

JE Virus क्यूलेक्स प्रजाति की मादा मच्छर के सुअर को काटने के बाद संपर्क में आने पर किसी बच्चे को होता है वहीं AES जहां दूषित पानी के सेवन से होता है।  बता दें कि जापानी बुखार का असर सीधा दिमाग पर होता है और AES दिमाग के साथ -साथ अन्य 100 से अधिक अंगों पर प्रभाव डालता है। बीते 5 साल के आंकडों पर गौर करें तो AES और जापानी बुखार के चलते साल 2012 के जुलाई से दिसंबर तक में 2,056 लोग भर्ती हुए जिसमें 386 लोगों की मौत हुई थी। साल 2013 के जुलाई से दिंसबर तक में 1,897 लोगों लोग भर्ती हुए जिसमें 543 लोगों की मौत हुई थी। जुलाई से दिसंबर 2014 तक 1,678 मामले सामने आए जिसमें 540 की मौत हो गई थी।

अब तक 184

वहीं साल 2015 में जुलाई से दिंसंबर तक 1,500 मामले सामने आए जिसमें 381 की मौत हो गई थी। साल 2016 में भी हालात बहुत अच्छे नहीं थे। 2016 के जुलाई से दिसंबर तक 1,748 मामले सामने आए जिसमें से 438 लोगों की मौत हो गई। साल 2017 की जनवरी से लेकर बीते जून तक 184 लोग भर्ती हुए थे जिसमें से 54 लोगों की मौत हो गई थी।

बता दें कि शुक्रवार (11 अगस्त) को शाम गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में धड़ाधड़ मौतों का सिलसिला शुरू हो गया था क्योंकि ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी गई थी। अभी तक इस मामले में 33 बच्चों की मौत हो चुकी है। अधिकतर मरीज AES और इंसेफेलाइटिस के थे। करीब-करीब सभी की हालत गंभीर थी।

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English summary
encephalitis in uttar pradesh: Here are stats of death troll since 5 years
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