संभल: खुद की दबंगई से राजनीति से खत्म हो गया डीपी यादव का अस्तित्व

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संभल। राजनीति में दबंगई की बाते सुनकर खुद ही डीपी यादव का नाम जुबान पर आ जाता है। डीपी यादव ने दबंगई के बूते अपना सियासी मुकाम बनाया था। फिलहाल, डीपी यादव देहरादून की जेल में मर्डर के आरोप में बंद है। डीपी यादव सियासी दिग्गज थे और संभल जिले की राजनीति में हमेशा सक्रिय रहे हैं।

लोकसभा चुनाव में मुलायम से ली थी टक्कर

लोकसभा चुनाव में मुलायम से ली थी टक्कर

संभल जिला सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का गढ़ माना जाता रहा है। मुलायम सिंह यादव के अलावा उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव को यहां की जनता ने लोकसभा में पहुंचाया है। जिसके चलते उनका यहां की जनता से ज्यादा लगाव है। 1998 में मुलायम सिंह यादव संभल सीट से पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे थे। उनके सामने मुकाबले करने बाहुबली डीपी यादव रहे। जिन्होंने उन्हें सीधे टक्कर दी थी लेकिन पराजित हो गये। अब चुनाव में लोग डीपी यादव को बहुत कम याद कर रहे हैं।डीपी यादव के करीबी रहने वाले लोग सपा का दामन थाम चुके हैं।

संभल की राजनीति में डीपी का सफर 1996 में शुरू हुआ

संभल की राजनीति में डीपी का सफर 1996 में शुरू हुआ

डीपी यादव ने दबंगई के बूते राजनीति में अलग पहचान बनाई। काफिले में एक से एक चमचमाती लग्जरी गाड़ियों का काफिला डीपी यादव के साथ चलता था। दबंगई के साथ राजनीति में चमकने वाले डीपी का अपराधिक इतिहास भी बढ़ता चला गया। हत्या जैसे मामले भी डीपी पर चल रहे हैं। डीपी यादव के खिलाफ हर कोई शिकायत करने से डरता था। संभल की राजनीती में डीपी का सफर 1996 में शुरू हुआ। बसपा के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

1993 में पंचायती राज्यमंत्री भी बने।

1993 में पंचायती राज्यमंत्री भी बने।

2007 में डीपी यादव ने अपनी राष्टीय परिवर्तन दल पार्टी बनाकर सपा के गढ़ सहसवान सीट पर कब्जा किया और अपनी पत्नी उर्मिला यादव को विधायक बनाया। वहीं, 2012 में फिर सहसवान विधानसभा सीट से किस्मत आजमाई लेकिन हार गये। हारने के बाद अपने भतीजे जितेंद्र यादव को बसपा से एमएलसी बनाया। डीपी यादव पहली बार जनता दल से बुलंदशहर से विधायक बने। बता दें कि 1993 में पंचायती राज्यमंत्री भी बने।

1996 में संभल से बसपा के सांसद भी रहे

1996 में संभल से बसपा के सांसद भी रहे

वहीं, 2014 में डीपी यादव भाजपा से बदायूं और संभल लोकसभा सीट से दावेदारी की लेकिन टिकट हासिल नहीं कर सके। टिकट न मिलने के चलते उन्होंने अपनी ही राष्टीय परिवर्तन दल से संभल और गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़े। लेकिन दोनों जगह से उन्होंने हार ही मिली। डीपी यादव के काफिले में एक से एक महंगी कार चलती थी। डीपी यादव 1996 में संभल से बसपा के सांसद भी रहे। जिस वक्त डीपी का काफिला सड़क पर दौड़ता था तो लोग चर्चाएं करनी शुरू कर देते थे। डीपी का संभल से काफी लगाव रहा है। फिलहाल उनका बेटा सहसवान से रापद से चुनाव मैदान में है।

ये है इनकी अपराधिक पृष्ठभूमि

ये है इनकी अपराधिक पृष्ठभूमि

बता दें कि डीपी यादव के खिलाफ संभल के धनारी, गाजियबाद, साहिबाबाद में तमाम मुकदमें चल रहे हैं। विधायक की हत्या करने का आरोप भी उनके ऊपर है। सियासी रसूख में तमाम मामलों में एफआईआर लग गयी। वहीं, हर कोई उनके डर से शिकायत नहीं करता था। कई बार वारंट जारी होने के बाद भी डीपी गिरफ्तार नहीं हो सके।फिहलाल डीपी यादव विधायक महेंद्र सिंह भाटी की हत्या के मामले में देहरादून जेल में बंद है। उनके खिलाफ 307, 328, 120 वीं, 506, व धारा 34 के तहत केस दर्ज हुए। वहीं, गजियाबाद कोतवाली में 307 में एक केस दर्ज हुआ था।

एक नजर राजनीतिक प्रोफाइल पर

एक नजर राजनीतिक प्रोफाइल पर

1989 में जनता दल से बुलंदशहर सीट से विधायक बने।
1993 में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रहे।
1996 में संभल लोकसभा सीट से बसपा के सांसद चुने गए।
1998 में सपा मुखिया मुलायम सिंह के सामने चुनाव हारे।
1999 में भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सांसद बनाया।
2006 में सहसवान से राष्टीय परिवर्तन दल से विधायक रहे। ये भी पढ़ें:बहराइच: गठबंधन में हुई रार, अखिलेश ने उतारा कांग्रेस के खिलाफ अपना उम्मीदवार

 
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English summary
dp yadav ends his political career sambhal uttar pradesh.
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