बरेली: दलित दबदबे का गवाह 'फरीदपुर' कभी बीजेपी तो कभी सपा का रहा है गढ़

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बरेली। जिले की 9 विधानसभाओं में से एक फरीदपुर आरक्षित विधानसभा सीट है। इस विधानसभा को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है और ये विधानसभा आंवला लोकसभा क्षेत्र में आती है। दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के इर्द-गिर्द और रामगंगा, बहगुल नदी के तराई क्षेत्र में बसा फरीदपुर कृषि बाहुल्य इलाका है। यहं गेंहू, धान, गन्ना, दलहन के अलावा कैश क्रॉप के रूप में सब्जियों का भी बहुतायत में उत्पादन होता है। मुगलकाल के दौरान फरीद खां के नाम पर बने इस कस्बाई क्षेत्र को आज बरेली जिले की समृद्ध तहसीलों में गिना जाता है। ब्रिटिशकाल में फरीदपुर नगर के कलेक्टर रहे जमींदार लाला रामकुमार अग्रवाल और उनके बेटे लाला लक्ष्मी नारायण अग्रवाल के समय यहां सर्राफा कारोबार की भी जड़ें मजबूत हुई। मुस्लिम आबादी होने के चलते फरीदपुर ने जरी के काम में भी अपनी खास पहचान बनाई।

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बरेली: दलित दबदबे का गवाह 'फरीदपुर' कभी बीजेपी तो कभी सपा का रहा है गढ़

1922 में यहां के लाला छंगामल द्वारा बनाए गए छंगामल एंग्लो संस्कृत इंटर कॉलेज की पहचान तत्कालीन समय में शिक्षा के अच्छे संस्थानों में होती थी। इंडो यूरोपियन आर्किटेक्ट में बने इस कॉलेज के भवन के समकालीन कुछ ही भवन अब बरेली जिले में सही हालत में देखे जा सकते हैं। यहां के पचौमी गांव स्थित बारहवीं सदी का शिवमन्दिर धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। लगभग सत्तर फीसदी शिक्षा स्तर वाले इस क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर व्यवसायिक शिक्षण संस्थानों के नाम पर कई प्राइवेट कॉलेज खोले गए हैं। जिनका लाभ स्थानीय युवाओं को मिल रहा है। फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से भाजपा और सपा का गढ़ रहा है। नगरपालिका फरीदपुर और फतेहगंज पूर्वी में फैले इस विधानसभा क्षेत्र में चार ब्लॉक और 329 ग्राम पंचायतें आती हैं। फरीदपुर विधानसभा लंबे समय से एससी आरक्षित है इसलिए यहां लंबे समय तक दलित विधायक का प्रतिनिधित्व रहा है।

मुख्य मुकाबला :

सिया राम सागर (सपा विधायक )

विजय पाल (पूर्व विधायक बसपा )

डॉक्टर श्याम बिहारी (भाजपा )

फरीदपुर की समस्याएं और मुद्दे

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में नगरपालिका क्षेत्र के अलावा ज्यादातर इलाका कस्बाई या ग्रामीण परिवेश का है। समाजवादी पार्टी के विधायक होने के कारण यहां की सत्तर फीसदी मुख्य सड़के सरकार द्वारा हॉटमिक्स बनाई गई हैं। लेकिन गांवों के संपर्क मार्ग लगभग सभी जगह खस्ताहाल हैं। गांवों के विकास के लिए विधायक साहब ने कोई खास ध्यान नहीं दिया है। क्षेत्र के साठ फीसदी गांव अभी भी विकास से अछूते हैं। लोहिया आवास योजना का लाभ हो या फिर लोहिया गांवों की स्थित सभी योजनाओं पर ठेकेदारों ने पलीता लगाया हुआ है। क्षेत्र में स्वीकृत बसंतपुर गांव का एकमात्र इंटर कॉलेज भवन निर्माण के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। यहां के एक मात्र डिग्री कॉलेज में आर्ट के अतिरिक्त कोई विषय स्वीकृत नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए यहां महिला डिग्री कॉलेज खोले जाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। जिस पर स्थानीय विधायक ने कोई ध्यान नहीं दिया। फरीदपुर नगरक्षेत्र में मठिया क्रॉसिंग पर ओवब्रिज बनाने का विधायक का वायदा अधूरा ही रह गया जिस कारण लोगों को भारी जाम झेलना पड़ता है।

शहर में नगर पालिका से किए गए विकास तो दिखाई देते हैं लेकिन पेयजल की समस्या के निराकरण के लिए कोई ध्यान नहीं दिया गया। डार्क जोन में होने के बावजूद यहां अवैध पंपिंग सेट और बोरिंग से भूमिगत जल का दोहन हो रहा है। इसके लिए भी कोई दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई गई है। शहर में रोडवेज, बस अड्डे की मांग हो या फिर सीएचसी पर मरीजों के बढ़ते दवाब के मद्देनजर यहां अतिरिक्त चिकित्सकों की जरूरत जनप्रतिनिधियों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। विधायक के सरकार में होने के कारण यहां की जनता को बिजली का लाभ जरूर मिला है। जिससे व्यापारी वर्ग खुश है लेकिन लचर कानून व्यवस्था से यहां लूट और चोरी की वारदातें बढ़ी हैं। ये वो क्षेत्रीय मुद्दे हैं जिनसे स्थानीय जनता प्रभावित रहती हैं। पार्टी की घोषणाओं के अलावा आगामी विधानसभा चुनाव में यह सारी समस्याएं भी स्थानीय मतदाताओं पर असर डालेंगे।

फरीदपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

1956 में अस्तित्व में आई फरीदपुर विधानसभा पर समाजवादी पार्टी और भाजपा का वर्चस्व रहा है। यहां पहला चुनाव 1957 में हुआ जिसमें कांग्रेस ने अपना प्रतिनिधित्व किया। 1967 के दूसरे निर्वाचन में यह सीट जनसंघ ने हथिया ली। 1967 के चुनाव में कांग्रेस और फिर 1969 और 74 के चुनाव में भारतीय क्रांति दल ने सीट पर कब्जा जमाया। वर्तमान विधायक डॉक्टर सियाराम सागर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत करते हुए यहां 1977 में जनता पार्टी से अपना पहला चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1980 में भाजपा से नन्दराम विजयी हुए और 1985 में लंबे समय बाद कांग्रेस ने फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया और नत्थू लाल विकल यहां से विधायक बने।

क्षेत्रीय जनता के बीच पकड़ लेकिन राष्ट्रीय पार्टी में पहुंच न होने से सियाराम सागर ने 1989 में निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की। जीतने के बाद सियाराम सागर ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन की और इसके बाद फरीदपुर विधासनसभा सीट पर सपा और भाजपा के बीच नूरा-कुश्ती शुरू हो गई। 1991 में भाजपा से नंदराम, 1993 में सपा से फिर सियाराम यहां से विधायक बने। इस दौरान नंदराम ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी से नजदीकियां बढ़ा ली और 1996 का चुनाव उन्होंने सपा से जीतकर तीसरी बार जीत हासिल की।

सियाराम सागर को निर्दलीय चुनाव लड़कर संतोष करना पड़ा। 2002 के चुनाव में सियाराम ने समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ा और साइकिल को फिर जीत दिलाई। 2007 में मायावती की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले ने पहली बार इस सीट को बसपा की झोली में डाला और बसपा के विजय पाल ने सपा से सियाराम सागर को हराया। बीते विधानसभा चुनाव में सपा से सियाराम सागर ने फरीदपुर विधानसभा से पांचवीं बार चुनाव जीतकर इस सीट पर अपना कब्जा बनाया। उन्होंने भाजपा के श्याम बिहारी को 16 हजार 7 सौ वोटों से हराया और बसपा के विजय पाल को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा।

फरीदपुर विधानसभा

कुल मतदाता - 3,06,856

पुरुष मतदाता - 1,68,346

महिला मतदाता - 1,38,333

अन्य - 06

फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के जातिगत आंकड़े

ब्राह्मण - 32 हजार

वैश्य- 20 हजार

मुस्लिम- 65 हजार

कायस्थ- 12 हजार

सिंधी पंजाबी खत्री - 08 हजार

क्षत्रिय- 50 हजार

दलित- 40 हजार

यादव- 28 हजार

कुर्मी - 07 हजार

अन्य- 5,792

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव और मुलायम सिंह दोनों ने ही मौजूदा विधायक डॉक्टर सियाराम सागर पर अपना भरोसा जताया है। बसपा ने विजय पाल को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं बीजेपी से श्याम बिहारी को अपना प्रत्याशी बनाया गया है।

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English summary
Dalit decide power of Government in Faridpur assembly seat from a long time in Bareilly
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