अपराधों का प्रदेश: सपा सरकार में इसलिए मायावती को याद करते रहे लोग

यूपी चुनाव से पहले अखिलेश सरकार की कानून व्यवस्था का पूरा लेखा जोखा, अखिलेश के अपने ही नेताओं और मंत्रियों के क्षेत्र में बढ़ा है अपराध।

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लखनऊ। देश में जब भी अपराध के राज्य भी बात होती है तो उत्तर प्रदेश में उसमें सबसे आगे खड़ा नजर आता है, प्रदेश की कानून व्यवस्था पर हमेशा से ही सवाल उठता आया है। यूपी में खासकर जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो अपराध के आंकड़े बढ़ जाते हैं जिसके चलते लोग बसपा की सरकार को याद करते हैं। लोग दोनों सरकार की तुलना करते हैं और बसपा की सरकार में कानून व्यवस्था को बेहतर मानते हैं।

कटघरे में सपा सरकार

सपा सरकार में अपराध की घटनाओं के बढ़ने की तस्दीक राज्य अपराध ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध ब्यूरों के आंकड़े भी करते हैं। लिहाजा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर अगर प्रदेश की कानून व्यवस्था का आंकलन करे तो समाजवादी पार्टी की सरकार कटघरे में खड़ी नजर आती है।

आंकड़े बयान करते हैं हकीकत

अगर मायावती के शासनकाल पर नजर डालें तो सपा के कार्यकाल में बसपा की सरकार की तुलना में 16 फीसदी अपराध बढ़ा है। एक तरफ जहां बसपा के शासनकाल में हर रोज 5783 घटनाएं होती थी तो सपा के कार्यकाल में यह आंकड़ा 6433 तक पहुंच गया। लेकिन इन आंकड़ों पर सपा का कहना है कि यह संख्या इसलिए बढ़ी है क्योंकि अब एफआईआर दर्ज की जाती है।

उत्तर प्रदेश में 2014-15 में दुष्कर्म की घटनाओं में 161 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी, राज्य अपराध ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2014 में 3467 दुष्कर्म की घटनाए हुई जोकि 2015 में बढ़कर 9075 पहुंच गई। यही नहीं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरों की आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में 70 फीसदी घटनाएं सपा विधायकों और सपा मंत्रियों के इलाके में हुई है। पिछले चार सालों में 93 लाख से ज्यादा आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिसमें प्रदेश की राजधानी सबसे आगे रही।

अकेले लखनऊ में 2.78 लाख आपराधिक घटनाएं दर्ज हुई, यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि लखनऊ में 9 मे से 7 विधायक सपा के हैं जिसमें से तीन विधायकों के पार मंत्री का दर्जा है।

सपा के नेताओं ने जमकर काटा उत्पात

प्रदेश में अपराध बढ़ाने में सत्ता पक्ष के नेता ही सबसे आगे हैं इसका अंदाजा आपको इन तमाम आंकड़ों से लग गया होगा। लेकिन हम आपको कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में भी बताते हैं जिसमें सपा के नेताओं सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी दबंगई दिखाई।

सपा के नेताओं की गुंडई भी प्रदेश में लोगों के लिए मुश्किल का सबब बनी रही, कानपुर, शामली, लखनऊ सहित प्रदेश के तमाम जगहों पर ऐसी घटनाए हुई जहां सपा के नेताओं ने पुलिस के साथ हाथापाई की, टोलकर्मी को पीटा या फिर अवैध कब्जे को लेकर लोगों के साथ मारपीट की।

कानपुर के कल्याणपुर में जमीन खरीद के लिए सपा नेता अशोक शुक्ल ने दो सिपाहियों को चौकी में घुसकर मारा, तो शामली में यातायात पुलिस के सिपाही विपिल यादव को सपा नेता को बेटों ने रोड़ पर ही मारना शुरु कर दिया और उन्हें धमकी दी।

राजधानी लखनऊ में सर्वोदय नगर में दो सिपाहियों को सपा के नेताओं ने जमकर पिटाई की, दोनों सिपाही रवि शंकर और अनूप तिवारी ने कथित नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया। ये वो चंद मामले हैं जिनकी हमने आपको जानकारी दी है लेकिन ऐसी तमाम अनगिनत घटनाओं के चलते ही उत्तर प्रदेश को जंगलराज का नाम दिया गया।

सपा सरकार में बड़े मामले जिसने प्रदेश को दागदार किया

 

बुलंदशहर गैंग रेप

दिल्ली कानपुर हाईवे पर बुलंदशहर के करीब दोस्तपुर गांव मे कुछ बदमाशों ने एक परिवार पर धावा बोला और महिला और उसकी बेटी के साथ घिनौनी गैंग रेप की घटना को अंजाम दियाष जिसके बाद देशभर में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठे। लेकिन इस घिनौनी घटना पर कैबिनेट मंत्री आजम खान विवादित बयान दिया कि मुमकिन है कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश हो, जिसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ी थी।

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English summary
Complete law and order history of Uttar Pradesh during Akhilesh Yadav government. crime rate in UP has rise which is key concern for Akhilesh ahead of poll.
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