हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है बरेली में चुन्ना मियां का मंदिर

लक्ष्मी नारायण का यह मंदिर उनके किसी भक्त ने नहीं बल्कि बरेली के सेठ फजरुल रहमान उर्फ़ चुन्ना मियां ने बनवाया।

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बरेली। भारत के हर कोने से प्यार और सांप्रदायिक सौहार्द की खुशबू महकती है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के कटरा मानराय में बना चुन्ना मियां का मंदिर भी एक ऐसी जगह है जहाँ अमन और सौहार्द के फूल महकते हैं। लक्ष्मी नारायण का यह मंदिर उनके किसी भक्त ने नहीं बल्कि बरेली के सेठ फजरुल रहमान उर्फ़ चुन्ना मियां ने बनवाया था।ये भी पढ़े: बरेली: रेलवे स्टेशन अधीक्षक को रास्ते में ट्रक ने कुचला, हुई दर्दनाक मौत

अशोक की लाट से सजा हुआ है मंदिर

अशोक की लाट से सजा हुआ है मंदिर

दरअसल, गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक और इंसानियत को अपना धर्म मानने वाले चुन्ना मियां का यह मंदिर धर्म और मजहब को बांटने वालों के लिए एक नजीर से कम नहीं। इस मंदिर के प्रवेश पर अशोक की लाट लगी हुई है, जो आमतौर पर देश के किसी भी मंदिर में दिखाई नहीं देती। इस मंदिर के निर्माण की कई खासियतों में एक खासियत यह भी है कि इस मंदिर की आधारशिला देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने रखी थी।

मंदिर के लिए दिया सबसे ज्यादा दान

मंदिर के लिए दिया सबसे ज्यादा दान

इस मंदिर के योगदान में कई दानदाताओं की भूमिका रही है लेकिन फजरुल रहमान उर्फ़ चुन्ना मियां जैसा योगदान किसी का नहीं रहा। बताया जाता है कि चुन्ना मियां ने तमाम विरोधों को झेलने के बाद भी मंदिर बनाने के लिए दान दिया। साथ ही श्रमदान करके भी मिशाल पेश की। बुजुर्ग कहते है उस समय में चुन्ना मियां शहर के सबसे रहीस सेठ हुआ करते थे।

पंजाबी समुदाय ने कर लिया था कब्जा

पंजाबी समुदाय ने कर लिया था कब्जा

मिली जानकारी के अनुसार, आजादी के बाद वर्ष 1957 में पाकिस्तान से विस्थापित पंजाबी समाज के कुछ लोग बरेली में आकर बसे। उनके पास पूजा पाठ करने के लिए कोई जगह नहीं थी। लेकिन जहां इन लोगों ने अपने रहने के लिए आशियाना बनाया था। उसी के पास चुन्ना मियां की खाली जमीन पड़ी थी। जिसे पंजाबी समाज के लोगों ने अपने कब्जे में ले ली और दोनों पक्षों ने इस संबंध में कोर्ट का सहारा भी लिया। बाद में चुन्ना मियां ने इस भूमि को पंजाबी समाज के लोगों को दान दे दी और कोर्ट कचहरी में आया खर्च भी वापस कर दिया ।

राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से करवाया मंदिर का उद्घाटन

राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से करवाया मंदिर का उद्घाटन

इसके बाद सनातन धर्म पंजाबी फ्रंटियर सभा का पंजीकरण कराया गया और उसके लिए 20,700 रुपये अनुदान भी दिया। आस्था का प्रतीक इस मंदिर में गंगा-जमुनी तहजीब बहती है। हर धर्म और जाति के लोग इस मंदिर में आते हैं। जब मंदिर 16 मई 1960 में बनकर तैयार हुआ तो इसके उद्घाटन के लिए सेठ फजरुल रहमान उर्फ़ (चुन्ना मियां) ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से करवाया।

चुन्ना मियां का परिवार निभा रहा है परंपरा

चुन्ना मियां का परिवार निभा रहा है परंपरा

बता दें कि चुन्ना मियां तो अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनका परिवार आज भी इस मंदिर से जुड़ा हुआ है उनके पोते आज भी यहां आते हैं और साथ ही मंदिर के कार्यों में हिस्सा भी लेते हैं। बरेली में इस मंदिर को हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इस मंदिर को देखने के लिए आते हैं। ये भी पढ़े:बनारस की इन तीन मुस्लिम बहनों को आमिर खान ने भी किया सलाम

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English summary
laxmi narayan temple built by fazrul rehman alias chunna miyan is placed in bareilly
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