पूर्वांचल से 8वें सीएम बने आदित्यनाथ क्या खत्म कर पाएंगे इलाके में विकास का सूखा! ये हैं चुनौतियां

Written by: राहुल सांकृत्यायन
Subscribe to Oneindia Hindi

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की तस्वीर अब एकदम स्पष्ट है। 11 मार्च को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद शनिवार शाम को यूपी को उसका मुख्यमंत्री मिल गया। यूं तो नया मुख्यमंत्री मिलना पूरे प्रदेश के लिए खास है लेकिन पूर्वांचल के लिए इसके अलग ही महत्व है। ऐसा इसलिए क्योंकि 29 साल बाद पूर्वांचल से कोई नेता मुख्यमंत्री बना है।

बता दें कि आदित्यनाथ से पहले सम्पूर्णानंद, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी,त्रिभुवन नारायण सिंह, कमलापति त्रिपाठी, राम नरेश यादव, वीर बहादुर सिंह, वो नाम थे पूर्वांचल से मुख्यमंत्री थे। ऐसे में पूर्वांचल से 8वें मुख्यमंत्री बनें आदित्यनाथ के सामने इलाके के 29 साल के विकास के सूखे को खत्म करने की बड़ी चुनौती होगी।

ठप पड़ चुकी है अर्थव्यवस्था

ठप पड़ चुकी है अर्थव्यवस्था

बीते कुछ सालों में पूर्वांचल की हालत ऐसी हो गई है कि यहां के युवाओं के लिए दिल्ली और मुंबई सरीखे बड़े औद्योगिक शहरों में इनकी नौकरी के लिए जगह सुरक्षित रहती हैं। मस्तिष्क ज्वर,इंसेफेलाइटिस, खराब सड़कें और ठप पड़ चुकी अर्थव्यवस्था यहां की पहचान बन चुकी है।

हर साल सूनी होती है सैकड़ों माताओं की गोद

हर साल सूनी होती है सैकड़ों माताओं की गोद

देश का शायद ही कोई ऐसा इलाका होगा जहां माताओं की गोद सूनी होती रहीं और सरकारें चुप रहें लेकिन पूर्वांचल यह दंश भी झेला है। मस्तिष्क ज्वर से लगभग हर साल सैंकड़ों मौतें होती रही हैं और सरकारों ने सिर्फ वादे और दावों पर ही ध्यान दिया।

117 विधायक और 23 सांसद फिर भी हाल ये

117 विधायक और 23 सांसद फिर भी हाल ये

समय का साथ ना मिलना और बेहतर नेतृत्व के अभाव में पूर्वांचल में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, भ्रष्ट्राचार, कानून व्यवस्था सरीखी समस्याएं आज भी सुरसा की तरह मुंह खोले खड़ी हैं। पूर्वांचल के गाजीपुर , बलिया, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, गोरखपुर, बहराइच, बस्ती, संतकबीरनगर समेत 17 अन्य जिलों में 117 विधानसभा सीटें हैं जो किसी भी दल के लिए निर्णायक साबित होती हैं। देश की संसद में 23 सांसद भेजने वाले इलाके में नदियां और आसमान कहर ढाती हैं तो किसान की कमर टूट जाती है।

बंद हैं मिलें

बंद हैं मिलें

पूर्वांचल का मैनचेस्टर कहे जाने वाले मऊ में कताई मिलें बंद हैं। बुनकरों की हालत बद से बद्तर हो चली है। 1991 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना की जिसका उद्देश्य था कि, क्षेत्रीय विकास परियोजनायों के लिये पैसा जमा किया जाए और संतुलित विकास हो लेकिन भ्रष्ट वितरण माध्यम के कारण परिस्थितिया अभी भी वही हैं।

फिर भी छात्र आते हैं दिल्ली लखनऊ

फिर भी छात्र आते हैं दिल्ली लखनऊ

क्षेत्रफल के हिसाब से प्रदेश का सबसे बड़ा जिला बस्ती भी इसी पूर्वांचल का हिस्सा है। जहां की सारी चीनी मिलें ठप पड़ी हैं। लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के पहले ये मुद्दे तो खूब उठाए जाते हैं लेकिन फिर ढाक के वही तीन पात। कहने को तो इस इलाके में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय समेत 5 अन्य नामी गिरामी विश्वविद्यालय हैं लेकिन उच्च शिक्षा के गिरते स्तर के कारण छात्रों को लखनऊ और दिल्ली सरीखें शहरों का रुख करना पड़ता है।

ये भी पढ़े: महंत आदित्यनाथ: गोरखनाथ मंदिर से 5 काली दास मार्ग तक का सफर, एक नजर में

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Challenge for new cm of uttar pradesh regarding poorvanchal
Please Wait while comments are loading...