टिकट के चक्कर में न रहे घर के न घाट के! पहले बसपा ने किया हताश तो अब बीजेपी से भी निराश

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हरदोई। कहते हैं न घर के न घाट के, यह बात पूर्व विधायक बृजेश वर्मा पर एकदम सटीक बैठती है। दरअसल हरदोई के बिलग्राम मल्लावां से पूर्व विधायक बृजेश वर्मा को पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित किया था। उसके बाद बृजेश वर्मा ने बीजेपी का दामन थाम लिया। लेकिन उनकी चुनावी आस क्या टूटी अब उन्हें बीजेपी भी नहीं भा रही है।

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टिकट के चक्कर में न रहे घर के न घाट के! पहले बसपा ने किया हताश तो अब बीजेपी से भी निराश

चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची तैयार की और इसमें बृजेश वर्मा का नाम न होकर आशीष सिंह 'आशु' को टिकट दे दिया गया। बस फिर क्या था बृजेश वर्मा ने अपनी गाड़ी से बीजेपी का झंडा उतार फेंका।

टिकट के चक्कर में न रहे घर के न घाट के, पहले बसपा ने किया हताश तो अब बजेपी से भी निराश

बृजेश वर्मा मल्लावा ने बिलग्राम सीट से साल 2012 में बसपा के टिकट से चुनाव लड़ा था और उन्हें जीत भी नसीब हुई थी। लेकिन करीब 5 महीने पहले अनुशासनहीनता के आरोप में मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। इसके बाद बृजेश वर्मा करीब 4 महीने से भाजपा का गुणगान करते आ रहे थे।

टिकट न मिलने से उनका अब बीजेपी से भी मोह भंग हो गया है। उनकी इस नाराजगी से भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि परिवर्तन के लिए बहुत से लोग भाजपा में आए थे, इसमें कुछ लोग सत्ता के समर्थन में रहते हैं लेकिन इन्हें जनता से नहीं सत्ता से मतलब होता है। ऐसे लोगों को जनता खुद जवाब देगी।

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English summary
BSP expelled leader join BJP but BJP dissapoint him on ticket
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