NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के 50 FACTS: 8 KM दूर था स्कूल, चबूतरे पर पढ़ते थे...

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नोएडा। भारतीय राजनीति में अब राष्ट्रपति चुनाव बड़ा मुद्दा होगा। एनडीए ने अपनी आम सहमति से रामनाथ कोविंद का नाम तय कर दिया है जिसके बाद हर कोई रामनाथ की तमाम बातें जानने का इच्छुक है। राजनीति में प्रशासनिक पद की गरिमा का सम्मान यूं नहीं हो सकता इसलिए बीजेपी के ऐलान के बाद ये जानना खास हो गया है कि आखिर जिस नाम पर किसी राजनीतिक पंडित की भविष्यवाणी तक नहीं हुई उसकी कौन सी खासियत बीजेपी को भा गई। तो रामनाथ कोविंद एक नहीं अनेकों कारनामें किए बैठे हैं। ऐसे में जब रामनाथ को जानने की होड़ मची है हम आपको बताते हैं रामनाथ कोविंद की वो पचास बातें जो बताती हैं आखिर रामनाथ ही क्यों हैं बीजेपी की पहली पसंद...

यूं ही नहीं हैं रामनाथ कोविंद बीजेपी की पहली पसंद, ये खास हैं 50 बातें...

1. रामनाथ कोविंद ने कानपुर नगर के बीएनएसडी से इंटरमीडिएट किया।

2. डीएवी कॉलेज से बी. कॉम और डीएवी लॉ कॉलेज से लॉ की डिग्री ली।

3. रामनाथ कोविंद ने इसके बाद दिल्ली में रहकर तीसरे प्रयास में आईएएस की परीक्षा पास की।

4. इसके बाद उन्‍होंने नौकरशाह बनने की जगह वकालत को तरजीह दी।

5. वर्तमान में रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं।

6. रामनाथ कोविंद यूपी में कानपुर के रहने वाले हैं।

7. रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को यूपी के कानपुर देहात के एक छोटे से गांव परौख के झींझक कस्बे में हुआ।

8. इनकी शुरुआती पढ़ाई संदलपुर ब्लॉक के गांव खानपुर से हुई।

9. किस्से ये भी मशहूर हैं कि घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठ पढ़ा करते थे रामनाथ कोविंद।

10. बचपन के दोस्त वीरेंद्र सिंह ने दैनिक जागरण पर बताया, ''हमारे फ्रेंड सर्किल में रामनाथ पढ़ाई में सबसे तेज थे। जब हम खेलते थे, तो वे घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठ पढ़ाई किया करते थे।''

11. ''उस समय गांव में स्कूल न के बराबर होते थे। इस वजह से गांव के ज्यादातर बच्चे 5वीं के बाद पिता के काम-धंधों में हाथ बंटाने लगते थे।''

12. ''रामनाथ 5 भाइयों में सबसे छोटे हैं। इनके पिता मैकूलाल गांव में ही स्थ‍ित एक प्राचीन मंदिर के पुजारी थे।

13. ये खेती किसानी भी करते थे। लेकिन पूजा-पाठ और किसानी से कम ही इनकम होती थी, किसी तरह वो परिवार का भरण-पोषण करते थे।''

14. शुरू से ही मेहनती रहे हैं कोविंद, वो 8 किमी दूर जाते थे पढ़ने।

15. इन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से 12वीं की पढ़ाई की।

16. डीएवी लॉ कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। इस दौरान वे कई बार गांव अपने घर आए। हालांकि, माता-पिता के देहांत के बाद उन्होंने गांव आना छोड़ दिया।''

17. तीसरी बार में क्लीयर किया था IAS एग्जाम।

18. राम नाथ कोविंद देश की सर्वोच्च सिविल सेवा में जाना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने IAS का एग्जाम दिया। पहले और दूसरे अटेम्पट में वे असफल रहे। तीसरी बार में उन्होंने एग्जाम क्लियर किया।

19. उन्होंने IAS की जॉब ठुकरा दी, क्योंकि उन्हें एलाइड सेवा में नौकरी मिल गई थी।

20. घाटमपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में रखा कदम।

21. कानपुर से ग्रैजुएशन करने के बाद रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की।

22. इस दौरान वो सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर रहे।

23. साल 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने।

24. इसके बाद बीजेपी के संपर्क में आए कोविंद को पार्टी ने साल 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से चुनाव के मैदान में उतारा।

25. हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

26. इसके बाद साल 2007 में उन्हें भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया गया, लेकिन इस बार भी उनकी किस्मत ने धोखा दिया और वे हार गए।

27. 1994 से 2000 तक रामनाथ कोविंद यूपी से राज्यसभा के सदस्य रहे।

28. पेशे से एडवोकेट कोविंद 1994 से 2006 के बीच दो बार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं।

29. कोविंद 1998 से 2002 के बीच बीजेपी दलित मोर्चा के प्रेसिडेंट और ऑल इंडिया कोली समाज के प्रेसिडेंट भी रहे।

30. बीजेपी के नेशनल स्पोक्सपर्सन भी रह चुके हैं।

31. पीएम ने कहा- कोविंद अलग तरह के राष्ट्रपति होंगे

32. नरेंद्र मोदी ने कहा- "मैं आश्वस्त हूं कि रामनाथ कोविंद अलग तरह के राष्ट्रपति होंगे। वे गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। वे कानून के अच्छे जानकार हैं और संविधान के एक्सपर्ट भी हैं। इसका फायदा देश को मिलेगा।"

33. रामनाथ किसान के बेटे हैं और साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी गरीबों के लिए काम करते वक्त बिताई है।

34. रामनाथ कोविंद के परिवार में पत्नी सविता कोविंद, बेटे प्रशांत और बेटी स्वाति हैं।

35. दलित छवि के चलते एक समय में भााजपा उन्हें उत्तर प्रदेश में मायावती के खिलाफ भी प्रोजेक्ट करने की सोच रही थी। रामनाथ कोविंद को जब बिहार का गवर्नर नियुक्‍त किया गया था, तब नीतीश कुमार ने विरोध दर्ज किया था। उनका कहना था यह नियुक्ति उनसे सलाह के बगैर की गई।

36. बीजेपी ने बिहार के मौजूदा राज्यपाल राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया है। तमाम अटकलें तमाम कयास फेल साबित हुए हैं।

37. दलित समाज से आने वाले रामनाथ कोविंद यूपी कानपुर में रहने वाले हैं और 12 साल तक राज्यसभा सांसद रहें हैं।

38. रामनाथ कोविंद के साथ खास बात ये है कि जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के पीएम थे तब उनके खास थे अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनके बेहतर रिश्ते हैं।

39. इन सब के बीच सवाल है कि आखिर एनडीए ने रामनाथ कोविंद को किन वजहों से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है? संघ से भी रामनाथ के अच्छे रिश्ते हैं। मतलब ये की बीजेपी ने ऐसा नाम आगे किया है जिससे संघ को किसी तरह की नाराजगी नहीं होगी।

40. एनडीए ने राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर विपक्ष का खेल खराब करने की कोशिश की है।

41. राम नाथ कोविंद साफ सुथरी छवी के राजनेता रहे हैं और इनकी छवि एक हमेशा से धर्मनिरपेक्ष रही है।

42. इन पर किसी तरह का सांप्रदायिक आरोप नहीं है।

43. ऐसे में रामनाथ कोविंद के नाम का विरोध करना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।

44. विपक्ष के कई नेताओं से राम नाथ कोविंद के अच्छे संबंध भी हैं। लिहाजा कोविंद के नाम का विरोध करना कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं होगा।

45. बीजेपी ने खेला दलित और यूपी कार्ड राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर रामनाथ कोविंद का नाम आगे कर बीजेपी ने एक साथ यूपी और दलित दोनों कार्ड एक साथ खेल दिया है।

46. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तरप्रेदश से सांसद है और लोकसभा चुनाव में यूपी ने बीजेपी को दिल खोलकर सीटें दी थी। ऐसे में अगला राष्ट्रपति यूपी से होगा तो देश के सबसे बड़े राज्य में अच्छा संदेश जाएगा।

47. वहीं यूपी के कानपुर से रहने वाले रामनाथ कोविंद का दलित होना भी बीजेपी के लिए फायदे का सौदा साबित होगा।

48. पीएम मोदी हमेशा से दलितों के विकास की बात करते रहे हैं। इससे शायद नीतीश, लालू का साथ मिल जाए, रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल है और बिहार के सीएम से उनके संबंध बुरे नहीं है।

49. आरजेडी चीफ लालू यादव शायद ही रामनाथ कोविंद के नाम का विरोध करें। पीएम मोदी ने एक राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर ऐसा नाम देने की कोशिश की है जिसका विरोध उनके विरोधी भी शायद ही करें।

50. मुलायम-मायावती का भी समर्थन इन्हें मिल सकता है, ऐसी बहुत कम संभावना है कि उनके नाम का विरोध सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती करें। एक तीर से बीजेपी ने कई निशाने लगाएं हैं।

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English summary
BJPs President Choice Ramnath kovind 50 stories
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