चाहे भारत की सेना हो या इंग्लैंड की, सभी पहनते हैं बनारस में बना बैज

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वाराणसी। भारत चाइना के बीच बढ़ रही तल्खी और विवाद से चीनी सामानों का भारत में आना भले ही कम न हुआ हो लेकिन भारत से चाइना को एक्सपोर्ट होने वाले सामानों के निर्यात में कमी जरूर आ गयी है। इसका सीधा असर वाराणसी में हाथ से बनने वाले सेना के बैज के निर्यात और मिलने वाले आर्डर पर देखा जा सकता है। दरसअल, वाराणसी में बैज बनाने का काम अग्रेजी हुकूमत के जमाने से होता आ रहा है।

आज भी कई देशों की सेना पहनती है ये बैज

आज भी कई देशों की सेना पहनती है ये बैज

जब यहां पर अग्रेजो का शासन था तो पुरे देश में सुरक्षा बलों के कंधो और टोपी पर सजने वाले बैज का निर्माण वाराणसी में ही होता था। यही नहीं अग्रेजी हुकूमत पूरी दुनिया में जहां जहां थी वहां भी सेना और सुरक्षा बलो के लिए बैज यही बनारस से ही बन कर सप्लाई किये जाते थे। अग्रेजों के जाने के बाद भी इंग्लैण्ड सहित तमाम मुल्को में बैज के लिए आर्डर यहां आज भी दिए जाते है। यही कारण है की वाराणसी में बैज का धंधा सौ प्रतिशत एक्सपोर्ट ओरिएंटेड धंधा के रूप में आज भी जाना जाता है।

चीन से आर्डर में आई कमी

चीन से आर्डर में आई कमी

समय बीतने के साथ साथ इस बैज निर्माण के काम में भी विस्तार हुआ और वाराणसी के अलावा बिहार सहित अन्य जगहों पर भी होने लगा। लेकिन वाराणसी का बैज क्वालिटी में सबसे अच्छा होता है इसलिए वाराणसी में आज भी इसकी डिमांड सबसे ज्यादा होती है। हालांकि चाइना को छोड़कर अन्य देशो से आने वाली डिमांड में कमी तो नहीं आई है लेकिन चाइना से आने वाले आर्डर लगभग बंद हो गए हैं। मोदी की काशी में बैज बनाने वालो कारीगरों की संख्या सैकड़ों में नहीं हजारो में है।

मशीन से नहीं बनता है ये बैज

मशीन से नहीं बनता है ये बैज

बैज बनाने वाले कारीगर वाराणसी के बहेलिया टोला, कोयला बाजार, आदमपुर, मदनपुरा और बजरडीहा इलाके में मुख्य रूप से पाये जाते हैं। सौ प्रतिशत निर्यात का आइटम होने के कारण कारीगर से लेकर निर्यातक तक को अच्छी आमदनी होती है। लेकिन चाइना से इन दिनों बढ़ी तल्खी की वजह से बैज व्यापार में बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन असर पड़ा है। इसके बावजूद इस कुटीर उद्योग में काम जोरों पर चल रहा है क्योंकि यह बैज मशीन से बनता नहीं और अगर कहीं बन भी जाता है तो लोग मशीन मेड की जगह हैण्ड मेड ही ज्यादा पसंद करते है।

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English summary
Army badges made in Varanasi has demand in England and China too
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