इलाहाबाद: भाजपा-अपना दल में कलह, क्या ये नाराजगी दोनों को ले डूबेगी?

नाटकीय ढंग से एक दिन पहले ही सोरांव से भाजपा का उम्मीदवार बनने का दावा करने वाले सुरेन्द्र चौधरी ने कलेक्ट्रेट में हजारों समर्थकों के साथ नामांकन किया।

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इलाहाबाद। सूबे में चौथे चरण का नामांकन सोमवारा को ही समाप्त हो गया। लेकिन आखिरी दिन कई ऐसे नामांकन हुये। जिन्होंने सियासी उठा पटक को तेज कर दिया। बड़े ही नाटकीय ढंग से एक दिन पहले ही सोरांव से भाजपा का उम्मीदवार बनने का दावा करने वाले सुरेन्द्र चौधरी ने कलेक्ट्रेट में हजारों समर्थकों के साथ नामांकन किया। जबकि सुरेन्द्र से पहले ही भाजपा-अद गठबंधन प्रत्याशी जमुना प्रसाद सरोज ने भी नामांकन कर दिया। हालांकि भाजपा द्वारा सोरांव की गठबंधन सीट पर अपना प्रत्याशी लड़ने की अभी तक न तो कोई आधिकारिक घोषणा हुई और न ही कोई सूची जारी की गई है। ये भी पढ़ें:इलाहाबाद: सोरांव से बीजेपी और अपना दल के प्रत्याशी आमने-सामने, करेंगे नामांकन! कैसे निभेगा गठबंधन?

पार्टी को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

अपना दल सोनेलाल पार्टी की हाईकमान व मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस बावत अपनी नाराजगी भी व्यक्त की। दोहरे नामांकन से क्षेत्र में जा रही गलत सूचनाओं से आगाह करते हुये कहा कि इससे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अपना दल प्रवक्ता बृजेन्द्र प्रताप ने बताया कि अनुप्रिया के आदेशानुसार व गठबंधन की वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही अपना दल की ओर से जमुना सरोज ने नामांकन किया हैं। अनुशासन बनाये रखने के लिये आगे पार्टी अपना निर्णय लेगी।

कट्टर हिंदूवादी चेहरा

सोरांव विधानसभा सीट पर मुस्लिम वोट निर्णयक साबित होते हैं। ऐसे में इस सीट पर हिंदूवादी चेहरे का दांव खेलकर भाजपा सियासी समीकरण दुरूस्त करना चाहती है। क्योंकि सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद इस सीट पर मुस्लिम वोटों के एकीकरण का अनुमान लगाया जा रहा था। ऐसे में मुस्लिम वोटों के विरुद्ध एक हवा बनाकर भाजपा के लिये वोटों की संख्या बढाई जायेगी। सुरेन्द्र चौधरी पिछले कुछ सालों से लोकल राजनीति में हिंदूवादी चेहरे के रूप में उभरे हैं। जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नजदीकी भी माने जाते हैं। ऐसे में जब सोरांव विधानसभा आरक्षित हैं तो भाजपा जरूर हिंदू कार्ड खेलना चाहेगी।

कुर्मी बाहुल्य है इलाका

सोरांव विधानसभा सीट पर हमेशा से कुर्मी बिरादरी का वोट पहले स्तर का रहा है। राजनीतिक समीकरणों में भी पूर्व विधायक जंग बहादुर पटेल, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल ने इन वोटों की उपयोगिता साबित भी की है। ऐसे मे अपना दल को नाराज कर यहां भाजपा का बगावती प्रत्याशी उतारना नुकसानदेह भी हो सकता है। निश्चित तौर पर अगर अपना दल के समर्थक व कार्यकर्ता नाराज हुये दो गठबंधन के दोनों दल यहां डूब जायेंगे।

 

 

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English summary
allahabad bjp akali dal collision for assembly seat
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