शाहजहांपुर: आत्महत्या करने जा रहे शख्स की पत्रकार ने बचाई जान

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शाहजहांपुर। जाको राखे साइयां मार सके ना कोय। यूपी के शाहजहांपुर में एक शख्स के ऊपर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठता है। यहां एक शख्स ने पत्नी से हुए विवाद के बाद रोड किनारे पेड़ से लटक कर फांसी लगा ली। तभी एक शख्स फरिश्ता बनकर उधर से गुजरा तो फांसी पर लटका शख्स छटपटा रहा था तभी उसने उस शख्स को फांसी पर से उतार लिया और गले मे कसे फंदे को ढीला कर दिया। उसके बाद शख्स ने पुलिस चौकी पर सूचना थी तो मौके पर पहुची पुलिस ने उसका फंदा खोला। हालांकि उस वक्त युवक की सांसे चल रही थी। जरूरत उसे इलाज की लेकिन पुलिस वाले एक दूसरे से कहे रहे थे कि एंबुलेंस को फोन करो। खास बात ये है कि जब 108 नंबर पर फोन किया तो कहा गया कि एंबुलेंस आने मे कुछ देर लगेगी थोड़ा इंतजार कर लो। इतनी देर मे एक रिपोर्टर ने अपनी गाड़ी पर बैठाकर उस युवक को जिला अस्पताल लाया ओर उसकी जान बचा ली।

पत्रकार ने बचाई जान, फांसी पर लटकने के बाद भी नहीं आई मौत

दरअसल मामला बृहस्पतिवार की रात करीब दस का है। चौक कोतवाली क्षेत्र के काशीराम कालोनी निवासी 40 वर्षीय राजकुमार ने अपनी पत्नी से शराब के लिए पैसे मांगे इंकार करने पर दोनों मे विवाद हुआ और मारपीट भी हुई। राजकुमार के पांच बच्चे है। विवाद होने के बाद राजकुमार अपने घर से चला गया। उसके बाद राजकुमार ने जिला अस्पताल से कुछ मीटर की दूरी पर सूनसान गली मे अपने पड़ पर लटक कर फांसी लगा ली। लेकिन फांसी लगाए राजकुमार को कुछ ही देर हुई होगी तभी शाहजहांपुर ढाबे से खाना खाकर लौट रहे मयूर खन्ना नाम का शख्स लौट रहा था। मयूर की नजर फांसी पर लटक रहे युवक पर पड़ी। मयूर ने बताया कि उसे लग रहा था कि फांसी पर लटका शख्स मर चुका होगा लेकिन जब मैंने उसे छूकर देखा तो उसकी कुछ सांसे चल रही थी। जिसके बाद मयूर ने फांसी के फंदे को ढीला किया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवक के गले मे कसा फंदा खोल दिया। उसके बाद ये खबर जिला अस्पताल में मौजूद एक पत्रकार को लगी तो वह खबर बनाने मौके पर पहुचा।

पत्रकार ने बचाई जान, फांसी पर लटकने के बाद भी नहीं आई मौत

पत्रकार मेहराज उददीन जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि शख्स की हालत और बिगड़ रही है और पुलिस एंबुलेंस का इंतजार कर रही है। अस्पताल से कहा गया था कि एंबुलेंस अबी तिलहर गई है इसलिए आने में देर लगेगी। घटनास्थल से पुछ ही दूर पर अस्पताल था लेकिन कोई पुलिसवाला उसे अपनी गाड़ी पर बिठाकर ले जाने को तैयार नहीं था। शख्स की हालात बिगड़ती देखकर पत्रकार मेहराज उददीन ने एक पुलिस कर्मी की मदद से उस शख्स को अपनी बाईक पर बैठाकर अस्पताल लाए और डाक्टर ने इलाज शुरू कर दिया। वहीं डाक्टर मेहराज अहमद का कहना है कि अगर कुछ देर और लेट हो जाती तो शायद इसकी जान जा सकती थी।

वहीं राजकुमार की पत्नी का कहना है कि उसकी आए दिन शराब को लेकर पति राजकुमार से मारपीट होती थी। उसके पांच बच्चे है। उसका पति एक वकील सहाब की गाड़ी चलाता है। आए दिन उसका पति शराब पीने के लिए पैसे मांगता है। गरीबी के चलते नही पैसे नही दे पाती है। जिसके बाद विवाद होता है। कल भी शराब के लिए पैसे मांग रहा था। जब पैसे नही दिए तो वह घर से कहीं चला गया था जिसके बाद उसकी पति ने ऎसा कदम उठा लिया।

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English summary
A journalist saved life of a man who commit suicide in shahjahanpur
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