ऑटो चलाकर पेट पाल रहे हैं बुमराह के दादा, एक बार गले लगाना चाहते हैं पोते को

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi

नई दिल्ली। जसप्रीत बुमराह, आज टीम इंडिया का वो सितारा है, जो किसी भी परिचय का मोहताज नहीं, उसकी छनछनाती गेंद को खेलना अच्छे-अच्छों के बस में नहीं है लेकिन भारत के इस नायाब सितारे की पर्सनल लाइफ के कुछ ऐसे रंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो लोगों को काफी हैरान कर रहे हैं।

सहवाग ने कारगिल के हीरो कैप्टन मनोज को किया दिल से सलाम, Tweet की तस्वीरें

जसप्रीत बुमराह के दादा संतोख सिंह

जसप्रीत बुमराह के दादा संतोख सिंह

दरअसल इन दिनों जसप्रीत बुमराह के दादा संतोख सिंह की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वो काफी बदहाल नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि संतोख सिंह इन दिनों ऊधमसिंह नगर के किच्छा में गरीबी में जीवन गुजार रहे हैं।

84 वर्षीय संतोख सिंह बुमराह

84 वर्षीय संतोख सिंह बुमराह

किसी समय अहमदाबाद में तीन कारखानों के मालिक रहे 84 वर्षीय संतोख सिंह बुमराह कभी जसप्रीत के पिता जसवीर के साथ फैब्रीकेशन के कारखाने चलाते थे लेकिन साल 2001 में जसवीर सिंह का निधन हो गया। उस समय जसप्रीत बहुत छोटा था। जसवीर की बीमारी ने संतोख सिंह को बदहाल कर दिया था और वो कर्ज में डूब गए थे।

ऑटो चलाकर पेट पाल रहे हैं

ऑटो चलाकर पेट पाल रहे हैं

जिसको चुकाने के लिए उन्होंने अपनी फैक्ट्री बेच दी और उनकी परिवार टूट गया, इस वक्त संतोख सिंह उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के छोटे से कस्बे किच्छा में ऑटो चलाकर अपनी और अपने छोटे पोलियोग्रस्त बेटे की रोजी चला रहे हैं।

आंखें गर्व से छलछला उठती हैं..

आंखें गर्व से छलछला उठती हैं..

84 साल के संतोख सिंह जब भी अपने पोते को टीवी पर क्रिकेट खेलते हुए देखते हैं, तो उनकी आंखें गर्व से छलछला उठती हैं, उनकी दिली इच्छा अपने पोते को गले लगाकर उसकी पीठ थपथपाने की है, वो बस उससे मिलकर एक बार उसे आशीर्वाद देना चाहते हैं।बूढ़े हो गए संतोख सिंह ने अपने पोते जसप्रीत बुमराह के बचपन की फोटो बहुत सहेज कर रखी है।

जसप्रीत के घरवाले आखिर संतोख सिंह के साथ क्यों नहीं?

जसप्रीत के घरवाले आखिर संतोख सिंह के साथ क्यों नहीं?

सोशल मीडिया में चल रही खबर के मुताबिक क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के दादा की आर्थिक संकट की जानकारी मिलने पर एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर जानकारी ली और उनको आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया। नरेश दुर्गापाल का कहना है कि इस मामले में सत्यापन कराया जा रहा है। फिलहाल ये सोचने वाली बात है कि जसप्रीत के घरवाले आखिर संतोख सिंह के साथ क्यों नहीं हैं, आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज वो पोते के लिए तरस रहे हैं। इस पर अभी बुमराह के परिवार में से किसी की भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।

देश-दुनिया की तबरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
At a time when the Gujarat pacer Jasprit Bumrah is achieving success, his octogenarian grandfather is earning his living by driving an auto-rickshaw in Uddham Singh Nagar, Uttarakhand.
Please Wait while comments are loading...