बेटी के सामने अनैतिक संबंधों के पत्नी के आरोप खारिज, तलाक को मंजूरी

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पति पर यौन विकृति का झूठा आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि ये तलाक का आधार भी है।

delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान महिला के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि पति आठ वर्षीय बेटी के सामने ही अनैतिक कार्य करता था।

फर्जी फ्रीडम फाइटर्स को ताउम्र मिलती रहेगी पेंशन: सुप्रीम कोर्ट

इतना ही नहीं वह बेडरुम की प्राइवेसी को भी भंग करता था। जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और प्रतिभा रानी की पीठ ने महिला के आरोपों को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने जिस तरह से पूरे मामले को पेश किया वह बेहद गंभीर है। इन आरोपों में पिता और बेटी के पवित्र रिश्ते को बदनाम करने की कोशिश की गई है।

जुलाई 2016 में हाईकोर्ट पहुंचा मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पति पर यौन विकृति का झूठा आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि ये तलाक का आधार भी है।

शिक्षा की गलत जानकारी देना उम्मीदवारों को पड़ेगा भारी, रद्द हो सकता है निर्वाचन

बता दें कि निचली अदालत के फैसले के बाद महिला ने इसी साल जुलाई में इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत ने पति की अपील पर तलाक का फैसला दिया था।

हाईकोर्ट में अपील के बाद पीठ ने महिला के आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

पति ने निचली अदालत में दिया था तलाक की अर्जी

कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर अगर उसकी पत्नी ऐसे आरोप लगाए तो वह शादीशुदा संबंध जारी नहीं रख सकता। पति पर पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप झूठे और बेहद गंभीर है। इसमें पिता-बेटी के पवित्र रिश्ते पर भी सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 10 जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ

बता दें कि फरवरी 2005 में इस जोड़े ने शादी की थी। अक्टूबर 2012 तक वो साथ रहे। अक्टूबर 2012 में पति ने तलाक की अर्जी डाली। जिसमें निचली अदालत ने तलाक को मंजूरी दे दी थी।

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Delhi HC Raising questions of sexual perversity mental cruelty grant of divorce.
Please Wait while comments are loading...