देश में पहला आधार कार्ड पाने वाली रंजना सोनेवने के गांव का हाल, आज भी है बेहाल

देश में पहला आधार कार्ड पाने वाली रंजना के गांव का हाल आज भी बेहाल है। छह साल पहले जब रंजना को वर्ष 2010 में आधार कार्ड दिया तो लगा था कि बहुत कुछ बदल जाएगा। पर ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है।

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मुंबई। देश में पहला आधार कार्ड पाने वाली रंजना के गांव का हाल आज भी बेहाल है। छह साल पहले जब रंजना को वर्ष 2010 में आधार कार्ड दिया तो लगा था कि बहुत कुछ बदल जाएगा। पर ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने जब देश का पहला आधार कार्ड पाने वाली रंजना की जिंदगी की हकीकत जानने की कोशिश तो होश फाख्‍ता हो जाने वाली तस्‍वीर सामने आई। टीओआई के रिपोर्ट को हम हुबहू आपके सामने रख रहे हैं। दोपहर के 2.30 बज रहे थे और सुबह से काम की तलाश में भटककर रंजना सोनावने घर लौट चुकी थीं। घर लौटते ही कुछ काम करते हुए उन्‍होंने सबसे पहले चूल्हा जलाया और अपने घर के सदस्‍यों के लिए खाना पकाना शुरु कर दिया। जैसे-जैसे चूल्‍हे की आग पकड़ती जा रही थी, वैसे-वैसे धुंआ फैलता जा रहा था। रंजना सोनावने के घर में वर्ष 2016 में भी न तो रसोई गैस पहुंची थी और न ही बिजली का कोई नामोनिशां था। 8 नवंबर, 2016 के बाद हुई नोटबंदी ने रंजना से काम छीन लिया है क्‍योंकि उनको कोई काम ही नहीं मिल पा रहा है। देश में भले ही रंजना सोनावने को पहला आधार कार्ड पाने के लिए जाना जाता हो पर इससे उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है।

देश में पहला आधार कार्ड पाने वाली रंजना सोनावने के गांव का हाल, आज भी है बेहाल

आपको बताते चलें कि आधार कार्ड रंजना सोनावने और उनके जैसे लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के साथ-साथ वित्‍तीय लेन-देन को सरल बनाने के जरिए किया गया था। पर रंजना के मुताबिक उनका जीना ही मुश्किल हो गया है। रंजना ने साफतौर पर कहा कि देश की सरकारें गरीब लोगों को सिर्फ राजनीति करने के लिए इस्‍तेमाल करती हैं और इसका फायदा अमीरों तक पहुंचा देती हैं। रंजना गांव के मेले में खिलौने बेचने का काम करती हैं और इसी के जरिए होने वाली आमदनी से अपनी जिंदगी को बेहतर बनाती हैं। रंजना सोनावने का गांव तेंभली पुणे से करीब 47 किलोमीटर दूर इलाके में है। यह गांव उन्हें देश का पहला आधार कार्ड मिलने के बाद सुर्खियों में आ गया था। रंजना से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर कहा कि हमारे पास तो पहले ही पैसा नहीं था, हम किस्‍मत के मारे कैशलेस थे। उन्‍होंने बताया कि उनके गांव में कोई नोट जमा करने के लिए लाइनों में नहीं लगा क्‍योंकि यहां लोगों के पास 500-1000 रुपए के नोट ही नहीं थे। यहां तो लोग छोटे-छोटे नोटों में लेन-देन करते थे।

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English summary
First Indian ranjana sonewane to get Aadhaar card & her village are not cashless
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