पीके का मुलायम फॉर्मूला चला तो यूपी में बीजेपी की बढ़ेगी परेशानी

यूपी की सियासत में सपा और कांग्रेस हैं एक दूसरे कि लिए जरूर, पीके का फार्मूला बढ़ा सकता है भाजपा की मुश्किल

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लखनऊ। यूपी सियासत में उठापटक का दौर लगातार जारी है, बदलते घटनाक्रम के दौर में हर वक्त सियासत नई करवट ले रही है। एक तरफ जहां नीतीश कुमार ने सपा के रजत जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है तो दूसरी तरफ कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गठबंधन की नई कवायद शुरु कर दी है।

यूपी में कांग्रेस को एक बार फिर से जीवित करने के लिए प्रशांत किशोर तमाम गठजोड़ की संभावनाओं को तलाश रहे। इस कड़ी में उन्होंने पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। मुलायम सिंह के साथ ही उन्होंने पार्टी के महासचिव अमर सिंह से भी मुलाकात की।

भाजपा की राह में पीके बनेंगे रोड़ा

ऐसे में अगर पीके सपा और कांग्रेस को एक साथ लाने में सफल होते हैं तो भाजपा की प्रदेश में मुश्किलें बढ़ सकती है। प्रदेश में मुस्लिम और ओबीसी वोट बैंक अगर एक साथ आता है तो यह जीत का फार्मूला साबित हो सकता है। ऐेसें में भाजपा इस गठबंधन की सुगबुगाहट पर जरूर नजर रख रही होगी। प्रदेश में भाजपा को मजबूत होने के लिए मुस्लिम वोटों के बिखराव की दरकार है लेकिन पीके की यह नई रणनीति भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर सकती है।

कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई

माना जा रहा है कि पीके ने सपा के नेताओं से मुलाकात के दौरान महागठबंधन की बन रही तस्वीर पर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो सपा के साथ कांग्रेस गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। इस मुलाकात में पीके ने कांग्रेस को कम से कम 140 सीटें दिए जान की भी मांग की है।

यूपी में कांग्रेस अपनी जमीनी हकीकत से अच्छी तरह से वाकिफ है, उसे इस बाद का अंदाजा है कि अकेले चुनावी मैदान में उतरने पर पार्टी को खास लाभ होता नहीं दिख रहा है, लिहाजा पार्टी सपा के साथ गठबंधन की कोशिशें कर रही है।

 

 

मुस्लिम व ओबीसी वोट बैंक जीत का मंत्र

यूपी में मुस्लिम और ओबीसी वोटबैंक बड़ी ताकत है और सपा को प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा पैरोकार माना जाता है। लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में पार्टी के भीतर फूट पड़ी उसने मुस्लिम वोटर्स को काफी हताश किया है।

प्रदेश में मुस्लिम और ओबीसी वोट बैंक मिलकर तरीबन 40 फीसदी है जोकि प्रदेश में जीत का मंत्र साबित हो सकता है। हालांकि पार्टी का पारंपरिक यादव वोट बैंक अभी भी पार्टी के साथ नजर आ रहा है लेकिन सपा कुनबे में विवाद के बाद माना जा रहा है कि मुस्लिम वोटबैंक पार्टी से थोड़ा नाराज है।

इस बात का अंदाजा आजम खान के उस बयान से भी लगाया जा सकता है कि प्रदेश का मुसलमान हारने वालों के साथ नहीं जाएगा। ऐसे में यह साफ हो गया है कि मुसलमान प्रदेस में भाजपा के खिलाफ वोट करने के लिए एकजुट हो सकता है।

 

 

मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकना बड़ी चुनौती

ऐसे में प्रदेश के मुसलमानों के पास सपा के इतर बसपा ही एकमात्र विकल्प निकलकर सामने आता है। कांग्रेस पहले से ही इस तस्वीर से इसलिए बाहर है क्योंकि वह किसी भी हाल में बिना गठबंधन के सरकार बनाना तो दूर विपक्ष की भूमिका निभाने में भी असमर्थ दिख रही है।

ऐसी राजनीतिक परिदृश्य में अगर सपा और कांग्रेस एक साथ आते हैं, तो एक बार फिर से मुसलमान इस गठजोड़ के साथ आ सकते हैं। जीत की प्रबल संभावना मुस्लिम वोट बैंक को इस गठबंधन के साथ आने के लिए मजबूर कर सकती है और इसी समीकरण को साधने के लिए पीके पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं।

 

 

बिहार का फार्मूला हो सकता है कारगर

बिहार चुनाव में जब महागठबंधन की कवायद फेल हुई थी तो जदयू, आरजेडी और कांग्रेस ने एक साथ चुनावी ताल ठोंकी थी। इसमें ना सिर्फ नीतीश का फायदा हुआ बल्कि कांग्रेस भी पिछले चुनाव की तुलना में मजबूत हुई। कुछ इसी सियासी गणित को पीके यूपी में भी साधने में जुटे हुए हैं।

सपा के लिए भी कांग्रेस जरूरी

बहरहाल देखने वाली बात यह होगी कि पीके की इस कोशिश में सपा किस तरह से साथ देती है। यहां समझने वाली बात यह भी है कि गठबंधन ना सिर्फ कांग्रेस की मजबूरी है बल्कि सपा को भी इसकी सख्त जरूरत है। जिस तरह से परिवार के मतभेदों के चलते पार्टी कमजोर हुई है और मुस्लिम वोट बैंट खिसक रहा है वह सपा को इस गठबंधन के लिए आगे आने को मजबूर कर सकता है।

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English summary
Alliance of Congress and Saamajwadi party a new move in UP politics. Alliance of Congress and Saamajwadi party a new move in UP politics. Both parties are in need of one another.
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