अपराध में यूपी ने देश में किया टॉप, एनसीआरबी के आंकड़ों ने खोली कानून-व्यवस्था की पोल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश को यूं ही नहीं अपराधियों के प्रदेश कहा जाता है, बल्कि आंकड़ें इस बात की तस्दीक करते हैं कि यूपी में अपराधी बेखौफ और बेलगाम है और पुलिस इनके सामने लाचार है। आंकड़ों पर नजर डालें तो आप इस बात को समझ पायेंगे कि क्यों यूपी को अपराध का प्रदेश कहा जाता है। देश में अपराध का आंकड़ा रखने वाली संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़े चौकाने वाले हैं।

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NCRB data exposes the law and order system in Uttar Pradesh

हर रोज 250 से अधिक आपराधिक घटनायें

यूपी में हर रोज 24 बलात्कार, 21 बलात्कार की कोशिश के मामले, 13 हत्या, 33 अपहरण, 19 दंगे 136 चोरी के मामले दर्ज होते हैं। ऐसे में अगर एक चार साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यूपी में किस कदर अपराध की घटनायें बढ़ी हैं।

पहली बार पांच अपराध की श्रेणी में यूपी ने किया टॉप

पिछले चार साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो हत्या, दंगा, बलात्कार, अपरहणर व दहेज के लिए हत्या के मामले में यूपी देश के किसी भी राज्य से सबसे आगे नंबर एक पर है। यह देश के इतिहास में पहली बार है जब इतने अपराध के मामलों में यूपी नंबर एक पर पहुंचा है। इससे पहले मायावती के कार्यकाल में तीन मामलों में यूपी देश में सबसे आगे रहा था।

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सपा के मंत्रियों और विधायकों के क्षेत्र में सबसे अधिक अपराध

यहां गौर करने वाला आंकड़ा यह है कि 70 फीसदी घटनायें उन जगहों पर हुई है जहां सपा सरकार के मंत्री या विधायक हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार साल में 93 लाख से ज्यादा आपराधिक घटनायें हुई हैं।

सिर्फ लखनऊ में एक साल में 2.78 लाख आपराधिक घटनायें

अकेले लखनऊ में पिछले साल सबसे अधिक 2.78 लाख आपराधिक घटनायें हुई है। लखनऊ में कुल 9 में से 7 सपा के विधायक हैं। यही नहीं इन सात विधायकों में तीन राज्य सरकार के मंत्री भी हैं।

दंगा कराने में भाजपा और बसपा आगे

वहीं अगर सबसे अधिक दंगे वाले इलाकों पर नजर डालें जहां यह घटनायें हुई हैं तो भाजपा और बसपा के विधायकों के क्षेत्र में यह सबसे अधिक हुई हैं। गत वर्ष आगरा, गोरखपुर और आजमगढ़ में सबसे अधिक दंगे हुए हैं। आजमगढ़ में 10 में से 9 सपा के विधायक हैं। इसके अलावा जिन जगहों पर दंगे हुए हैं वहां बसपा और भाजपा के विधायक सबसे अधिक हैं।

मायावती की तुलना में अखिलेश कहीं आगे निकलें

पिछली मायावती सरकार में कुल 22347 दंगे हुए थे जबकि अखिलेश सरकार में यह आंकड़ा 25007 तक पहुंच गया है। ऐसे में आंकड़ों के लिहाज से मायावती सरकार की तुलना में अखिलेश सरकार में 16 फीसदी आपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। बसपा सरकार में औसतन हर रोज 5783 आपराधिक घटनायें हो रही थी तो अखिलेश सरकार में यह बढ़कर 6433 हो गयी है।

पिछले चार महीनों के आंकड़ों 15 मार्च से 18 जुलाई पर नजर डालें तो यूपी में 1012 बलात्कार, 4520 महिला उत्पीड़न, 1386 लूट, 86 डकैती के मामले दर्ज हुए हुए हैं। वहीं इन आंकड़ों पर सफाई देते हुए अखिलेश के मंत्री एसपी यादव यह कह रहे हैं कि पिछली सरकारों में एफआईआर दर्ज नहीं होती थी जबकि इस सरकार में एफआईआर दर्ज होती है, लिहाजा यह आंकड़ा बढ़ा है।

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English summary
NCRB data exposes the law and order system in Uttar Pradesh. Crime has increased in UP in Akhilesh government compared to Mayawati.
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