यूपी चुनाव- नोटबंदी ने चाय पिलाना किया मुश्किल, चुनाव प्रचार की बंद दुकान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले जिस तरह से नोटबंदी का फैसला हुआ उसका असर ना सिर्फ आम लोगों पर बल्कि राजनीतिक दलों पर भी पड़ रहा है है। मैनपुरी में भाजपा नेता राजेश कुमार बाल्मीकि पर नोटबंदी का असर साफ देखा जा सकता है।

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राजेश बाल्मीकि से मिलने के लिए दिनभर स्थानीय नेताओं का आना जाना लगा रहता है और वह इन मेहमानों का सत्कार चाय से करते हैं, लेकिन हर बार जब वह चाय लाने को कहते हैं तो उसे एक कागज की पर्ची पर लिखते भी रहते हैं।

बाल्मीकि अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष है। वह कहते हैं कि यह एक छोटा खर्च है और मैनपुरी छोटा शहर है, लिहाजा यहां पैसा थोड़ा देरी से आता है जिसकी वजह से मैं पैसा बाद में देता हूं।

बाल्मीकि को इस बात का पूरा भरोसा है कि अगले विधानसभा चुनाव में वह जरूर जीतेंगे। 2007 और 2012 में भाजपा ने मैनपुरी सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन 2012 में चार में से एक सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी।
सपा को सिर्फ भाजपा से चुनौती

यादव वोटबैंक के बीच समाजवादी पार्टी का एकमात्र प्रतिस्पर्धी पार्टी भाजपा है। बाल्मीकि कहते हैं कि जब सपा का तेजी से उदय हो रहा था तो मैनपुरी में भाजपा ने ही सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी जैसे बड़े फैसले लोगों को गिनाने के लिए हैं जो हमारी जीत को सुनिश्चित करेगा। बाल्मीकि कहते हैं कि जैसे ही नोट से हो रही दिक्कतें खत्म होंगी हम पूरी तरह से इसके फायदे को लेकर लोगों के बीच जाएंगे।

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वहीं मैनपुरी में सपा के एक नेता का कहना है कि नोटबंदी के फैसले से हमपर कोई फर्क नहीं पड़ा है। हम सिर्फ चेक में डील करते हैं, नोटबंदी के फैसले से पहले भी हम ऐसा ही करते थे। हम चाय का पैसा भी एकमुश्त चेक के माध्यम से देते हैं।

पोस्टर छपने हुए तकरीबन बंद

मैनपुरी में कई अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के कई पोस्टर लगे हैं जिसमें हाल ही में उद्घाटन किए गए प्रोजेक्ट्स के लिए दोनों को धन्यवाद दिया है। हालांकि ये पोस्टर तकरीबन एक महीने पुराने हैं। वहीं भाजपा और रालोद के भी कुछ पोस्टर लगे हैं।

मैनपुरी में पोस्टर का काम करने वाले दुकानदार का कहना है कि 14 नवंबर के बाद काम में काफी कमी आई है। भाजपा ने आखिरी पोस्टर छापने का ऑर्डर दिया था वह था परिवर्तन यात्रा के लिए। परिवर्तन यात्रा के लिए बड़े-बड़े पोस्टर छापने का ऑर्डर मिला था लेकिन उसके बाद कोई भी हमारे पास नहीं आया है। हमारे काम में 85 फीसदी का असर पड़ा है।

सपा के कुनबे में भ्रम
यह दिक्कत सिर्फ मैनपुरी में नहीं है बल्कि करहल और सैफई का भी हाल बदस्तूर एक जैसा है। यहां के सपा नेताओं में चाचा-भतीजे के बीच के विवाद के बाद किसका आदेश माने का भ्रम अभी भी बना हुआ है।

करहल से सपा के विधायक सोबारन सिंह यादव का कहना है कि इस पारिवारिक कलह का पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह विवाद परिवार में है जोकि अब खत्म हो गया है और अब सबकुछ ठीक है।

हालांकि सपा विधायक किसी भी तरह के फर्क से इनकार कर रहे हैं लेकिन स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं में भ्रम अभी भी बरकरार है कि किसका आदेश मानें।

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भाजपा की उम्मीदें बढ़ी

वहीं सपा की कलह से भाजपा के भीतर उम्मीद जरूर जगी है। भाजपा नेता विशाल सिंह का कहना है कि गरीबी, स्थानीय मुद्दे, बेरोजगारी, खराब सड़क सहित सपा परिवार की कलह का मुद्दा हमारे लिए अहम होगा और इसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा।

आम आदमी की जीवन तितर-बितर
सपा विधायक सोबारन सिंह का कहना है कि नोटबंदी के चलते आम आदमी का जीवन तितर-बितर हो गया है, किसान की जीवन दूभर हो गया है। मैनपुरी के स्थानीय प्रिंटिंग की दुकान में काम करने वाले कर्मचारी का कहना है कि वह दिनभर कंप्यूटर में फिल्म देखता है क्योंकि काम है नहीं।

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English summary
Cash crunch has started to hit the political parties ahead of Poll. Both SP and BJP are facing the problem due to demonetisation.
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