सऊदी अरब में पहली बार चुनाव जीतने वाली महिलाओं का दर्द, कितनी बदली जिंदगी

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नई दिल्ली। सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति किसकदर खराब है ये किसी से छिपा हुआ नहीं है। साल 2011 में सऊदी प्रशासन ने महिलाओं को नगरपालिका चुनाव लड़ने की इजाजत दी थी। उस समय ये माना गया था कि इससे महिलाओं की स्थिति में सुधार आएगा, लेकिन ऐसा क्या वाकई में हुआ?

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सऊदी अरब में महिलाओं का हाल

साल 2015 में सऊदी अरब की महिलाएं जब नगरपालिका चुनाव उतरी तो ये चुनाव दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया। ऐसा माना जा रहा था कि इस कदम से महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुई।

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उस समय कुल 900 महिलाएं चुनाव में उतरी, चुनाव परिणाम में 21 महिला प्रत्याशी जीत हासिल करने में कामयाब हो गई। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही उनकी स्थिति बदलेगी। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार मोना अल नग्गार की बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री 'लेडीज फर्स्ट' में महिलाओं के मौजूदा हालात पेश किया गया।

इस डॉक्यूमेंट्री से पता चलता है कि महिलाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है। उन्होंने चुनावों में जीत तो हासिल की है। लेकिन उन्हें अभी बैठकों में खुलेआम शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई है। अगर उन्हें कुछ बातें कहनी होती है तो वो सीधे तौर पर नहीं टेली कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसमें शरीक होती हैं।

डॉक्यूमेंट्री में छलका महिलाओं का दर्द

डॉक्यूमेंट्री पर काम करने वाली मोना ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब में चुनाव लड़ने वाली तीन महिलाओं को फोकस किया। उनके बारे में जानकारी हासिल की। उनसे संपर्क किया और फिर उनसे ताजा हालात की जानकारी ली।

महिलाओं को यहां नहीं है कार तक चलाने की इजाजत

मोना ने जिन कुछ महिलाओं से बात की। उनसे मिली जानकारी के मुताबिक ही वहां के असल हालात का पता चलता है। मोना के डॉक्यमेंट्री के मुताबिक जिन प्रत्याशियों ने चुनाव लड़कर जीत हासिल की उनका अनुभव भी खास नहीं रहा।

नगरपालिका चुनाव के दौरान महिलाओं को प्रचार की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि देश के कुल दो करोड़ वोटरों हैं इनमें केवल एक लाख 30 हजार महिला वोटर हैं। उनकी जीत या हार पर महिला वोटरों के वोटों का ज्यादा असर नहीं होता।

न प्रचार की इजाजत और न खुले में सभा करने की इजाजत

उन महिला प्रत्याशियों ने बताया कि उनको प्रचार में जाने की इजाजत नहीं थी। वो स्नैपचैट के जरिए प्रचार करने की स्थिति में थी।

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पुरुष जहां खुले आम प्रचार करते, महिलाएं गुपचुप तरीके से मैदान में उतरी थी। ये हाल तब है जब यहां की महिलाएं शिक्षा के मामले में पुरुषों से काफी आगे हैं।

फिलहाल पूरी डॉक्यूमेंट्री से पता यही चलता है कि सऊदी अरब में महिलाओं कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। उन्हें अभी भी खुले में सभा करने, चुनाव प्रचार करने और लोगों के बीच जाने की इजाजत नहीं है।

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English summary
woman in Saudi Arabia described her pain lives after election
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