जानिए क्‍या है विएना संधि जिस पर ICJ में पाक को मिली फटकार

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हेग। गुरुवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) की ओर पाकिस्‍तान की मिलिट्री कोर्ट की ओर से कुलभूषण जाधव को सुनाई गई मौत की सजा पर रोक लगा दी गई है। भारत ने आरोप लगाया था कि पाकिस्‍तान ने जाधव को सजा सुनाते हुए विएना संधि का पालन नहीं किया और जाधव को काउंसलर एक्‍सेस नहीं दिया गया था। आईसीजे ने अपने फैसले में कहा कि पाक को विएना संधि के तहत काउंसलर एक्‍सेस मुहैया कराना चाहिए और यह भारत का अधिकार है।

जानिए क्‍या है विएना संधि जिस पर ICJ में पाक को मिली फटकार

वर्ष 1963 में हुई थी संधि की शुरुआत

काउंसलर संबंधों पर विएना संधि की शुरुआत वर्ष 1963 में हुई थी और यह एक अंतराष्‍ट्रीय संधि है। इसका मकसद आजाद देशों के बीच काउंसलर के संबंधों का एक खाका तैयार करना है। किसी दूसरे देश में काउंसल, दूतावास से अपना काम करता है और इसके दो अहम काम होते हैं। पहला वह मेजबान देश में अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करता है। दूसरा दो देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध स्‍थापित करत है। काउंसल को राजनयिक नहीं होता है लेकिन वह दूतावास से ही अपने काम को अंजाम देता है। इस संधि में 79 आर्टिकल हैं। एक नजर डालिए क्‍या हैं विएना संधि के कुछ खास आर्टिकल्‍स पर जिनका जिक्र जाधव के केस के दौरान हुआ है।

कौन-कौन से जरूरी कानून

आर्टिकल 5- इसके तहत काउंसल के पांच कामों को लिस्‍ट किया गया है। इन कामों में मेजबान देश में अपने देश और नागरिकों के हितों की रक्षा करना। साथ ही आर्थिक, सांस्‍कृति और वै‍ज्ञानिक रिश्‍तों को दो देशों के बीच कायम करना।

आर्टिकल 23- इसके तहत कोई भी मेजबान देश किसी भी समय किसी भी काउंसलर को देश से बाहर निकाल सकता है। ऐसे में उस काउंसलर को भेजने वाले देश को एक तय समय के अंदर इस व्‍यक्ति को वापस बुलाना होगा नहीं तो वह व्‍यक्ति अपने बचाव का अधिकार खो देगा।

आर्टिकल-31- मेजबान देश अपनी सीमा में किसी भी समय काउंसलर को दूतावास में दाखिल होने से रोक सकता है। साथ ही वह अपने क्षेत्र को घुसपैठ या नुकसान होने से बचाने के लिए पूरी तरह से आजाद होगा।

आर्टिकल 35-किसी भी काउंसल और उसके देश के बीच कम्‍यूनिकेशन की आजादी होगी और इस अधिकार को कोई नहीं छीन सकता है। काउंसलर का बैग कभी भी नहीं खोला जाना चाहिए और न ही उसके कुरियर को भी कभी हिरासत में लिया जाएगा।

आर्टिकल-36-विदेशी नागरिक जिन्‍हें गिरफ्तार किया गया है या हिरासत में लिया गया है उन्‍हें बिना किसी देरी के उनके देश के दूतावास या फिर कांसुलेट से संपर्क कराया जाना चाहिए और उन्‍हें सूचना दी जानी चाहिए। अगर विदेशी नागरिक अनुरोध करता है तो फिर पुलिस को नोटिस फैक्‍स के जरिए दूतावास या फिर कांसुलेट तक भेजना होगा। इस नोटिस में उस व्‍यक्ति का नाम, उसकी गिरफ्तारी कहां से हुई है इसकी जानकारी और अगर संभव हो तो गिरफ्तारी की वजह की जानकारी दी जानी चाहिए।

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English summary
What is Vienna Convention on Consular Relations.
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