एच1बी वीजा जिसने उड़ाई है भारत की नींद उससे जुड़ी 10 बातें

यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्‍स की ओर से एच1बी वीजा धारकों की सैलरी को डबल करने का प्रस्‍ताव दिया गया है। राष्‍ट्रपति ट्रंप विदेशी कामगारों के वीजा को हासिल करने की प्रक्रिया को कठिन बनाने की ओर।

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वॉशिंगटन। राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की ओर से अमेरिकी कांग्रेस में वह बिल पेश कर दिया गया है जो एच1बी वीजा में सुधार और बदलाव की प्रक्रिया से जुड़ा है। अगर कांग्रेस की मंजूरी मिलने के बाद राष्‍ट्रपति ट्रंप ने वीजा से जुड़ा नया एग्जिक्‍यूटिव ऑर्डर साइन कर दिया तो इसका सबसे ज्‍यादा असर भारतीय कंपनियों और अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर पड़ेगा।

सैलरी डबल करने का प्रस्‍ताव

राष्‍ट्रपति ट्रंप के इस ऑर्डर के साइन होने से पहले ही भारतीय कंपनियों जैसे इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस के शेयरों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेव्सि की ओर से इस वीजा के धारकों की न्‍यूनतम सैलरी को डबल यानी 130,000 डॉलर करने का प्रस्‍ताव दिया गया है। वहीं दूसरी ओर राष्‍ट्रपति ट्रंप की ओर से पेश किए गए इस बिल में कंपनियों के लिए अमेरिकियों से अलग भारतीय और दूसरे देशों के कामगारों की नियुक्ति की प्रक्रिया और भी कठिन कर दिया जाएगा। राष्‍ट्रपति ट्रंप की कोशिश है कि विदेशी कामगारों के लिए एच1बी वीजा को हासिल करने की प्रक्रिया को और मुश्किल बना दिया जाए। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से ट्रंप प्रशासन को सभी चिंताओं से अवगत करा दिया गया है। आइए आपको बताते हैं कि एच1बी वीजा क्‍या है क्‍योंकि इस समय आपके लिए इससे जुड़ी कुछ खास बातों को जानना काफी जरूरी है।

रोजगार आधारित वीजा

एच1बी वीजा रोजगार आधारित है और यह अमेरिकी कंपनियों को उच्‍च-क्षमता वाली नौक‍रियों के लिए विदेशी कामगारों की नियुक्ति में मदद करता है।

कंपनी करती है अप्‍लाई

कोई भी कंपनी या फर्म जो किसी विदेशी नागरिक को नौकरी ऑफर कर रही है, उसे कैंडीडेट के लिए अमेरिकी अप्रवासन विभाग में एच1बी वीजा के लिए अप्‍लाई करना होता है।

जॉर्ज बुश सीनियर ने की शुरुआत

इस प्रोग्राम को वर्ष 1990 में उस समय के अमेरिकी राष्‍ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर ने लॉन्‍च किया था।

क्‍या है इसका मकसद

इसका मकसद अमेरिकी फर्म की मजदूरों की कमी से निबटने में मदद करना था। अमेरिका में उस समय नौकरियां बढ़ रही थीं लेकिन उन्‍हें करने के लिए खास तरह के कौशल जैसे सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, रिसर्च और इं‍जीनियंरिंग को करने के लिए लोग नहीं थे।

कंपनी अदा करती है बिल

जो भी कंपनी लोगों को हायर करती है वही वीजा के लिए बिल की अदायगी करती है।

छह वर्षों तक की अनुमति

एच1बी वीजा धारक अमेरिका में तीन से छह वर्षों तक रह सकता है, वह स्‍थायी तौर पर अमेरिका के लिए मंजूरी हासिल कर सकता है और अमेरिका में प्रॉपर्टी खरीद और बेच भी सकता है।

कितनी है सीमा

वर्तमान समय में एच1बी वीजा की कैप 65, 000 है और 20,000 एच1बी वीजा उन लोगों के लिए होते हैं जिनके पास अमेरिका की यूनिवर्सिटीज की डिग्री होती है। कुल मिलाकर सीमा 85,000 होती है।

वीजा के लिए लॉटरी सिस्‍टम

अगर वीजा के लिए अप्‍लाई करने वाले लोगों की संख्‍या तय सीमा से ज्‍यादा है तो सरकार लॉटरी सिस्‍टम से तय करती है कि कौन इसका असली हकदार है।

चिली और सिंगापुर के लिए अलग नियम

हर वर्ष 6,800 वीजा चिली और सिंगापुर के नागरिकों के लिए रिजर्व रखे जाते हैं। ऐसा दोनों देशों के साथ हुए अमेरिका के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की वजह से होता है।

पिछले वर्ष कितनी याचिका

पिछले वर्ष यानी 2016 में अमेरिका को एच1बी वीजा के लिए 200,000 से ज्‍यादा वीजा याचिका मिली थीं।

 

 

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English summary
US President Donald Trump will sign a new executive order for changes in H-1B visa which will impact Indian companies like Infosys, Wipro, and TCS.
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