भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता उड़ाएगा चीन और पाक की नींद

By:
Subscribe to Oneindia Hindi

वाशिंगटन। भारत और अमेरिका ने वह सैन्‍य समझौता साइन कर लिया है जिसके बाद दोनों देश एक दूसरे के नेवी और एयरबेस का प्रयोग रिपेयर और सप्‍लाई के लिए कर सकेंगे। इस एग्रीमेंट के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में औरनजदीकी आएगी। वहीं इस समझौते को समुद्र में चीन के बढ़ते दखल को जवाब देने के मकसद से उठाया गया कदम भी माना जा रहा है।

us-india-military-agreement

पढ़ें-भारत में जहां होगा अमेरिकी जेट वह हिस्‍सा होगा अमेरिका का

क्‍या है समझौता

इस द्विपक्षीय समझौते का नाम 'लॉजिस्टिक एक्‍सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' या लेमोआ है। भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस समझैाते का स्‍वागत किया है तो वहीं अमेरिकी रक्षा सचिव एश्‍टन कार्टर ने कहा है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए कई नए मौके लेकर आएगा।

us-india-military-agreement-gif.jpg

अमेरिका साझा करेगा तकनीक

इस समझौते के बाद दोनों देशों की ओर से एक साझा बयान जारी हुआ। इस बयान में कहा गया है कि दोनों देश इस बात पर राजी हुए हैं कि इस समझौते के जरिए आपस में नई और आधुनिक रक्षा तकनीक और व्‍यापार को बढ़ावा दिया जाए।अमेरिका इस बात को लेकर राजी हुआ है कि वह अपने करीबी साथी भारत के साथ व्‍यापार और तकनीक साझा करेगा।

पढ़ें-भारत-अमेरिका के बीच व्‍यापार ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड्स

क्‍यों है यह समझौता खास

  • लेमोआ लॉजिस्टिक सपोर्ट के अलावा अमेरिकी और भारतीय सेनाओं को सप्‍लाई और सर्विस की सुविधा भी मिलेगी।
  • समझौता भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाला है।
  • विशेषज्ञों की मानें तो न सिर्फ इसकी राजनीतिक अहमियत है बल्कि घरेलू स्‍तर पर भी यह काफी खास है।
  • ज्‍चाइंट ऑपरेशंस के दौरान लॉजिस्टिक काफी आसान होगा और काफी प्रभावी भी साबित होगा।
  • अमेरिकी और भारत की नौसेनाओं को किसी ऑपरेशन के समय एक-दूसरे की मदद करना काफी आसान होगा।
  • इसके अलावा अभ्‍यास के समय और मानवीय मदद में भी काफी मदद मिलेगी।
  • एक सुरक्षित संवाद और नॉटिकल डाटा जैसे अहम डाटा को आदान-प्रदान हो सकेगा।
  • इस समझौते का मतलब सह नहीं है कि अमेरिकी सेनाएं भारत में अपना बेस बनाएंगी।
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
India and US have signed an agreement on Monday and with this agreement both the nations can use each other's land, air and naval bases for repair and resupply.
Please Wait while comments are loading...