चीनी और नेपाली सेनाओं की ज्‍वाइंट एक्‍सरसाइज, भारत का ब्‍लड प्रेशर हाई

चीन और नेपाल की सेनाओं की ज्‍वाइंट मिलिट्र एक्‍सरसाइज के साथ बढ़ाई भारत की चिंताएं। भारत के साथ बनते-बिगड़ते संबंधों के बीच एक्‍सरसाइज चीन-नेपाल की करीबी का सुबूत।

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काठमांडू। वर्ष 2015 से भारत और नेपाल के बीच रिश्‍तों ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। पिछले वर्ष जो रिश्‍ते बिगड़ने के बाद नेपाल, चीन के करीब होता गया। इस वर्ष अगस्‍त में पुष्‍प कमल दहल प्रचंड नेपाल के नए प्रधानमंत्री बनें और उन्‍होंने भारत के साथ रिश्‍तों में एक सधी हुई सोच दिखाई। लेकिन अब उन्‍होंने चीन के साथ नेपाल सेना की ज्‍वाइंट मिलिट्री एक्‍सरसाइज का प्रस्‍ताव दिया है। उनके इस प्रस्‍ताव ने भारत के माथे पर बल डाल दिए हैं।

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भारत, नेपाल के फैसले से असहज

इंग्लिश डेली टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक नेपाली पीएम के इस प्रस्‍ताव से भारत का ब्‍लड प्रेशर थोड़ा बढ़ गया है। नेपाल के इस फैसले ने भारत को असहज कर दिया है। नेपाल के पिछले प्रधानमंत्री केपी ओली के कार्यकाल में
भारत के साथ संबंध काफी बिगड़ गए थे। ऐसे में जब प्रचंड नेपाल के पीएम बने तो भारत को एक नई उम्‍मीद जगी थी। अब यह उम्‍मीद हल्‍की होती नजर आ रही है। भारत में नेपाल के राजदूत दीप उपाध्‍याय ने इस ज्‍वाइंट एक्‍सरसाइज को तरजीह नहीं दी है। उन्‍होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच यह मिलिट्री एक्‍सरसाइज काफी छोटे स्‍तर पर है और भारत को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्‍होंने कहा कि नेपाल ने पूर्व में भी दूसरे देशों के साथ मिलिट्री एक्‍सरसाइज की हैं और हम माओवादियों का सामना करने में सफल हो सके हैं। उन्‍होंने कहा कि नेपाल के भारत के साथ काफी खास रिश्‍ते हैं और ऐसी किसी भी एक्‍सरसाइज से वह बिगड़ नहीं सकते हैं।

और उलझ सकते हैं रिश्‍ते

एक्‍सरसाइज का मकसद काउंटर-टेरर ऑपरेशंस में नेपाल की मदद करना है। भारत नेपाल के साथ इस तरह की एक्‍सरसाइज पिछले एक दशक से करता आ रहा है। चीन के साथ भी वैसी ही एक्‍सरसाइज पहले से ही बिगड़े संबंधों को और जटिल बना सकती है। भारत के संबंध नेपाल और चीन दोनों के साथ और जटिल हो स‍क‍ते हैं। ऐसे में प्रचंड, भारत के साथ रिश्‍तों को सामान्‍य करने के लिए जो भी कोशिशें कर रहे हैं, उसका कोई महत्‍व नहीं होगा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भाारत और नेपाल के बीच रक्षा संबंधों में मिलिट्री एजुकेशनल एक्‍सचेंज, ज्‍वाइंट एक्‍सरसाइज और मिलिट्री स्‍टोर्स और उपकरणों की सप्‍लाई आते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं 32,000 नेपाली गोरखा इस समय इंडियन आर्मी में हैं। नेपाल 1.2 लाख पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों का घर है। इन्‍हें भारत की ओर से पेंशन मिलती है।

चीन ने दी भारत को चेतावनी

वहीं चीन के ग्‍लोबल टाइम्‍स की ओर से भी इस एक्‍सरसाइज के बाद भारत को वॉर्निंग दी गई है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने सोमवार को लिखा है कि यह न तो वास्‍तविक है और न ही संभव कि भारत हमेशा नेपाल को अपने आंगन की तरह प्रयोग नहीं कर सकता और न ही इसकी वजह से वह चीन और नेपाल के बीच जारी सहयोग पर दबाव डाल सकता है। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक अगर चीन और नेपाल के बीच ज्‍वाइंट मिलिट्री एक्‍सरसाइज होती है तो फिर इससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे। सुरक्षा में सहयोग दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे को भी बढ़ाएगा। आने वाले समय में नेपाल और चीन एक सामान्‍य और संस्‍थागत सुरक्षा का खाका तैयार करने में सफल हो पाएंगे।

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English summary
First military exercise between Nepal and China next year causing worries for India. This exercise will be held next year.
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