देवी के वश में महिला ने की थी पति-बेटों की हत्या, सुप्रीम कोर्ट ने किया रिहा

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नई दिल्ली। अपने पति और दो बेटों की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा पा चुकी एक महिला को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। महिला के दिए एक तर्क पर सर्वोच्च अदालत ने उसे रिहा करने का फैसला सुनाया।

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सुप्रीम कोर्ट से महिला को मिली बड़ी राहत

पूरा मामला चार साल पुराना है, जिसमें मध्य प्रदेश की 30 वर्षीय महिला राजवा कौल मुख्य आरोपी है। महिला पर चार साल पहले अपने पति और दो बेटों की हत्या का आरोप लगा।

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साथ ही सात अन्य लोगों को घायल करने का भी उस पर आरोप था। इस मामले में महिला को पहले स्थानीय अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।

फिर हाईकोर्ट ने केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन जैसे ही ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, उन्होंने राजवा कौल को रिहा करने का फैसला सुनाया।

महिला ने खुद को बताया था 'देवी'

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जिस समय उसने ये हत्याएं की वो अपने वश में नहीं थी। उसने 'देवी' के भ्रम में पूरी वारदात को अंजाम दिया।

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महिला ने सर्वोच्च अदालत में बताया कि उसके पास अपने पति समेत पूरे परिवार को मारने का कोई खास उद्देश्य नहीं था। जिस समय उसने इस पूरी घटना को अंजाम दिया वो मानसिक तौर पर बीमार थी और तांत्रिक के पास इलाज करा रही थी। महिला ने बताया कि जिस समय उसने घटना को अंजाम दिया वो खुद को 'देवी' समझ रही थी।

निचली अदालत और हाईकोर्ट से आजीवन कारावास की सजा के बाद राजवा कौल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जस्टिस बीए बोबदे की बेंच ने महिला की अपील को स्वीकार करके सुनवाई शुरू की।

निचली अदालत से मिली थी फांसी, हाईकोर्ट ने दी थी आजीवन कारावास

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान महिला राजवा कौल के वकील ने बताया कि उनकी मुवक्किल बीमार थी। उसकी डॉक्टरी रिपोर्ट भी निचली अदालत और हाईकोर्ट में पेश किया गया, लेकिन कोर्ट ने महिला को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान कर दिया।

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महिला के वकील ने बताया कि जिस समय महिला उस स्थिति में थी उसका इलाज कर रहे डॉक्टर ने रिपोर्ट बनाई थी जिसमें उन्होंने बताया था कि जब महिला को अस्पताल लाया गया वो गुस्से से भरी हुई थी। वह सामान्य स्थिति में नहीं थी। वह खुद को देवी बता रही थी, जो अपने दुश्मनों को सजा दे रही थी।

पूरे मामले में महिला के वकील की ओर से आए तर्कों और डॉक्टर के रिपोर्ट के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महिला को बरी कर दिया।

मध्य प्रदेश के सीधी का है पूरा मामला

मध्य प्रदेश के सीधी की रहने वाली महिला ने 3 मार्च 2012 में अपने परिवार के सदस्यों की हत्या की थी। 2012 में उसे निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी।

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इसके बाद हाईकोर्ट में मामला जाने पर उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। कोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं माना। अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी तर्कों को समझने के बाद महिला का रिहा करने का फैसला सुनाया है।

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English summary
MP woman killing her husband-children, Supreme Court set free because committed she was a goddess.
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