सीएम जयललिता के हेल्थ के बारे में क्यों नहीं दी जा रही जानकारी, जानिए

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नई दिल्ली। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता पिछले दो सप्ताह से हॉस्पिटल में हैं और उनके स्वास्थ्य के बारे में सही-सही जानकारी पाने के लिए समर्थक परेशान हैं।

सीएम जयललिता की हेल्थ कंट्रोवर्सी से यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर हॉस्पिटल प्रशासन स्पष्ट सूचना देने या तस्वीर जारी करने से क्यों बच रहा है?

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एक न्यूरोसर्जन का कहना है कि कुछ आपात स्थितियों को छोड़कर हॉस्पिटल या डॉक्टर को इलाज के दौरान मरीज के बारे में सूचना देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

ईटी में छपी रिपोर्ट में न्यूरोसर्जन ने बताया है कि मरीज के बारे में सूचनाओं को कॉन्फिडेंशियल रखना मेडिकल प्रैक्टिस का पार्ट है। मरीज की प्राइवेसी की रक्षा करने के लिए ऐसा किया जाता है।

क्या होता है मरीज और डॉक्टर का रिश्ता

मरीज अपनी बीमारी के बारे में सारी बातें डॉक्टर को बताता है। उन बातों को डॉक्टर मरीज से बिना पूछे किसी को नहीं बता सकते, यहां तक कि उसके परिजनों या पत्नी तक को नहीं। मरीज की दी हुई सूचनाओं के आधार पर डॉक्टर इलाज करते हैं।

इसलिए मेडिकल प्रैक्टिस में मरीज की प्राइवेसी और कॉन्फिडेंशियलिटी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। अगर डॉक्टर इसकी उपेक्षा कर मरीज के बारे में गुप्त सूचनाओं को किसी को बताते हैं तो फिर यह एक तरह का विश्वासघात है। इसके बाद हो सकता है कि मरीज डॉक्टर को कुछ बताने से बचें। इससे मरीज का इलाज मुश्किल हो जाएगा।

इन परिस्थितियों में मरीज के बारे में सूचना दी जा सकती है

अगर मरीज को ऐसी बीमारी है जिसके फैलने की आशंका हो या अदालत का आदेश हो तो कॉन्फिडेंशियलिटी सिद्धांत का उल्लंघन किया जा सकता है।

मरीज के बीमारी से अगर उनके परिजनों या अन्य मरीजों या अन्य किसी को भी नुकसान की आशंका हो तो इस बारे में डॉक्टर सूचनाएं किसी को भी दे सकते हैं

लेकिन ऐसी आपात स्थितियों को छोड़कर अगर डॉक्टर सूचनाएं उजागर करते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है और उनको दंड भी मिल सकता है।

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क्या नेताओं की बीमारी के बारे में जनता को जानने का हक है?

सीएम जयललिता के मामले में यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या उनके जैसे नेताओं या मुख्यमंत्रियों के स्वास्थ्य के बारे में जानने का हक जनता को है?

नेता के स्वास्थ्य के बारे में जानने का हक जनता को है, इसके पक्ष में कई तर्क दिए जा सकते हैं। जैसे कि, अगर नेता बीमार होंगे तो खराब स्वास्थ्य की वजह से वह सही निर्णय नहीं ले सकते और इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। गुड गवर्नेंस के लिए गुड हेल्थ की जरूरत होती है।

इसलिए अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और हिलेरी क्लिंटन की हेल्थ रिपोर्ट की मांग उठी ताकि अगले राष्ट्रपति खराब स्वास्थ्य वाले न हों।

लेकिन मरीज की प्राइवेसी का क्या?

सूचना उजागर करने से मरीज के निजता के अधिकार और मेडिकल प्रैक्टिस के कॉन्फिडेंशियलिटी सिद्धांत का उल्लंघन होता है। यह तब तक नहीं किया जा सकता जब तक मरीज जिंदा है और खुद फैसला लेने में सक्षम है।

बड़े उद्योगपतियों और शक्तिशाली नेताओं जैसे मामले में सूचनाएं नहीं देने की और भी कई वजहें हैं। नेताओं के हेल्थ के बारे में सूचनाएं लीक होने से राज्य में अस्थिरता और अशांति का खतरा हो सकता है।

बड़े उद्योगपतियों के हेल्थ के बारे में सूचनाएं सार्वजनिक होने से कंपनी और शेयर मार्केट पर बुरा असर पड़ सकता है।

इसलिए सीएम जयललिता के बारे में छुपाई जा रही है जानकारी

सीएम जयललिता के वकील ने अगर पहले से बता रखा हो तो ऐसी स्थिति में किसी भी सूचना को हॉस्पिटल प्रशासन और डॉक्टर सार्वजनिक नहीं कर सकते।

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English summary
As per ethics of medical practice, hospital administration can not reveal any information regarding its patient health due to confidentiality.
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