बलूचिस्तान के बयान पर कांग्रेस क्यों दे रही है मोदी का साथ?

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से दिए अपने भाषण में बलूचिस्तान में अधिकारों के हनन का मामला उठाया था। पीएम मोदी के इस कदम को विपक्षी पार्टी कांग्रेस का भी समर्थन मिल रहा है। पाकिस्तान के मामले में पीएम मोदी की इस बदली रणनीति को कांग्रेस का समर्थन मिलना ये सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर विपक्षी पार्टी मोदी का साथ क्यों दे रही है।

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यूं तो स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए पीएम मोदी के भाषण के तुरंत बाद पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और बलूचिस्तान में अंतर बताया, लेकिन बाद में कांग्रेस ने खुद ही उनकी बात को दरकिनार कर दिया। सलमान खुर्शीद ने कहा था कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का अंदरूनी मामला है और पीएम मोदी की तरफ से बलूचिस्तान का मामला उठाना पीओके के दावे के कमजोर कर सकता है।

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वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने कहा कि यह सलमान खुर्शीद का निजी बयान है और साथ ही इस बात पर जोर भी दिया कि बलूचिस्तान के साथ भी भारत का लेना-देना है। सलमान खुर्शीद की ओर से मोदी पर निशाना साधे जाने के तुरंत बाद ही कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "भले ही यह बलूचिस्तान हो या पीओके, पाकिस्तान के हर हिस्से में पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी एजेंसियां मानवाधिकारों का हनन कर रही हैं। कांग्रेस मानती है कि बलूचिस्तान के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।"

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कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इस कदम को पॉलिसी से अधिक स्थानीय राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़कर देखा जा सकता है। हाल ही में हुई कश्मीर हिंसा में पाकिस्तान की भूमिका का पता चलने के बाद अब भारत के लोगों का मानना है कि पाकिस्तान को इसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाना चाहिए।

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पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी भावना रखने वालों में अधिकतर युवा और मिडिल क्लास के लोग हैं। भारत में राष्ट्रवाद को लेकर होने वाली हर बहस में पाकिस्तान का एक खास महत्व होता है। यह भारत में हिंदुत्व के ध्रुवीकरण का काम करता है। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ दिया गया को भी बयान उत्प्रेरक का काम करता है, जैसे मोदी का बयान- जैसे को तैसा। ऐसे में ये सारी चीजें बीजेपी के विरोधियों को मिलने वाले समर्थन को कमजोर कर सकती हैं, जिसके चलते कांग्रेस ने मोदी की तरफ से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाए जाने का समर्थन किया है।

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आपको बता दें कि इससे पहले भी पीएम मोदी कांग्रेस को राष्ट्रवाद के मामले में कमजोर दिखाने का काम कर चुके हैं। यहां यह जानना भी जरूरी है कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने पहली बार अपनी रणनीति को बदला है। पार्टी ने मनमोहन सिंह द्वारा साइन किए शर्म-अल-शेख के घोषणा पत्र को भी दरकिनार कर दिया था। इस घोषणा पत्र के जरिए भारत बलूचिस्तान के आंदोलन में अपना हाथ होने के पाकिस्तान के दावे पर बातचीत करने को तैयार हो गया था। अब कांग्रेस मानती है कि अगर मोदी का यह दांव उन्हें सफलता नहीं दिला सका, तो इसके लिए केन्द्र को जिम्मेदार ठहराने में आसानी होगी।

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English summary
why congress giving its support to modi for raising the issue of balochistan in his speech of independence day from lal kila of delhi.
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