बुलंद इरादे और जिद की पक्की इरोम शर्मिला, पढ़ें संघर्ष के 16 साल की कहानी

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नयी दिल्ली। आयरन लेडी की नाम से मशहूर इरोम शर्मिला आज 16 सालों से जारी अपना अनशन खत्म करने जा रही है। इरोम ने अनशन खत्म करने के साथ ही राजनीति में आने और शादी करने का ऐलान किया है। इरोम ने ऐलान किया है कि वो अगले साल होने वाले मणिपुर विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगी।

16 साल बाद 'आयरन लेडी' इरोम शर्मिला आज तोड़ेंगी अपना अनशन

वहीं उन्होंने ये भी कहा है कि अनशन तोड़ने के बाद अपने ब्वॉयफ्रेंड से शादी कर वो सामान्य जीवन जीना चाहती है। ऐसे में ये जानना बेहद अहम है कि आखिर वो कौन सा शख्स है, जिसने इरोम को अनशन तोड़ने पर मजबूर कर दिया। स्लाइड के जरिए जानें कौन हैं इरोम शर्मिला और किस शख्स की वजह से उन्होंने तोड़ा अपना 16 साल का अनशन...

कौन हैं इरोम शर्माला

इरोम चानू शर्मिला का जन्म 14 मार्च 1972 को मणिपुर में हुआ। मणिपुर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को हटाने की मांग को लेकर इरोम पिछले 16 सालों से अनशन पर हैं। इस कानून के खिलाफ शर्मिला इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल कर रही हैं।

यहां से शुरू हुआ संघर्ष

2 नवंबर 2000 में मणिपुर की राजधानी इंफाल के मालोम में असम राइफल्स के जवानों के हाथों दस लोग मारे गए थे। ये लोग स्टॉप पर बस के इंतजार में खड़े थे। मरने वालों में दो नेशनल ब्रेवरी अवार्ड विजेता भी थे। इस घटना से इरोम इतनी दुखी हुई कि उन्होंने अफस्पा हटाने को लेकर बेमियादी भूख हड़ताल शुरू कर दी।

खुदकुशी का आरोप में गिरफ्तार

साल 2000 में मणिपुर में सुरक्षा बलों के हाथों 10 नागरिकों की मौत के बाद आफ्स्पा हटाने की मांग करते हुए इरोम ने भूख हड़ताल शुरू की थी। लेकिन भूख हड़ताल पर बैठने की तीन दिन बाद ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। क्योंकि यह गिरफ्तारी एक साल से अधिक नहीं हो सकती इसलिए हर साल उन्हें रिहा करते ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाता था।

संघर्ष के 16 साल

जब शर्मिला ने नवंबर, 2000 में अनशन शुरू किया था, तब वह 27 साल की थीं। अब उनकी उम्र लगभग 44 साल है। अपनी जवानी उन्होंने संघर्ष के नाम कर दी, अब जाकर वो भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक से शादी करने जा रही है।

भूख हड़ताल का रिकॉर्ड

दुनिया में सबसे लंबी भूख हड़ताल करने का रिकॉर्ड इरोम के नाम पर दर्ज है। उनके अंग ठीक से काम करते रहें, इसके लिए उन्हें नाक में लगी नली से पोषक तत्व दिए जाते हैं। उन्हें सरकारी अस्पताल में रखा गया।

नहीं की बालों में कंघी

भूख हड़ताल के दौरान उन्होंने अपने बाल एक बार भी नहीं झाड़े। वह अपने दांत भी कपड़े से साफ करती हैं जिससे खानपान न ग्रहण करने का उनका प्रण कायम रहे।

नाक से खा रही हैं इरोम

अनशन पर बैठी इरोम को पिछले 16 सालों से नाक से लगी एक नली के जरिए खाना दिया जा रहा है। इसके लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था।

एक पत्रकार से करती हैं प्रेम

वह ब्रिटिश मूल के भारतीय पत्रकार डैसमंड कुटीन्हो से प्रेम करती हैं और अनशन खत्म करने के बाद वो उन्हीं से शादी करने जा रही है। डैसमंड केरल में रहते हैं।

क्यों लिया चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला?

इरोम की माने तो सरकारे आईं और चली गईं, लेकिन किसी ने उनकी बात सुनने तक की कोशिश नहीं की। इतने सालों से सत्ता के असंवेदनशील रवैये ने शर्मिला को सक्रिय राजनीति में आने को मजबूर कर दिया।

आम आदमी पार्टी ने मिला निमंत्रण

जस्ट पीस फाउंडेशन ट्रस्ट के जरिए शर्मिला को आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने मणिपुर की लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया, लेकिन इरोम ने इसे अस्वीकर कर दिया।

कई पुरस्कारों से नावाजा गया

उनके दृढ़ निश्चय के लिए उन्हें 2007 में मानवाधिकार के लिए ग्वांगजू पुरस्कार, एशियाई मानवाधिकार आयोग ने 2010 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट ने उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर अवार्ड से नवाजा।

 

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English summary
Who was Irom Sharmila before her extraordinary protest against the AFSPA took over her existence? As her fast enters its 15th year, a look at the life she has lost, and the memories that sustain her.
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