उत्तर प्रदेश : 'बलात्कार होते नहीं तैयार किए जाते हैं'

By: हिमांशु तिवारी आत्मीय
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लखनऊ। बलात्कार के 9000 मामलों के साथ सूबे के लोगों के जहन में सवाल ही सवाल हैं। प्रशासन की नाकामी का, शासन के कमजोर रवैये का, महिलाओं के साथ हुए अपराध में न्यायिक प्रक्रिया के लंबे वक्त तक घिसटने का। लोग अपनी अपनी सुविधा के मुताबिक आईने तैयार कर पीड़िता को दिखाने का प्रयास करते हैं। रूढ़िवादी सोच के मालिक जीने का तरीका, कपड़ों का सलीका बताते हैं।

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Who is responsible for a Rape in Uttar Pradesh?

शायद यही कारण है कि हर बार..या कहें बार-बार सशक्तिकरण की दिशा में जिस नारी को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है, वो दो कदम आगे आने की बजाए चार कदम पीछे आ जाती है। लेकिन इन सबके इतर उन बातों पर कभी गौर नहीं किया जाता, हां किया भी गया तो मामले के पुराने होने के साथ तमाम सवाल पीले पन्नों में खो जाते हैं।

सेक्स वीडियो का बड़ा कारोबार

आम तौर पर आज गली मुहल्लों में सीडी-डीवीडी कैसेट्स की दुकानें संचालित हो रही हैं। जहां हॉलीवुड-बॉलीवुड के इतर सेक्स वीडियो बेचे जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं साइबर कैफे में भी कम उम्र के लड़के इन तमाम वीडियो को देखते हैं। जानकारों के मुताबिक इस तरह के वीडियो में अधिक संलिप्तता मानसिकता को अत्यधिक सिकोड़कर रख देती है। फिर दोयम दर्जे की मानसिकता के साथ सवाल उठाये जाते हैं पहनावे पर, विचारों पर।

निम्नकोटि के इन सवालों से व्यक्ति विशेष हर बार नारीत्व को नए सवाल के साथ कठघरे में खड़ा करता है। तो भला कैसे की जाए परिवर्तन की उम्मीद ?

सियासतदां के विवादित बयान

सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह का बयान लड़के हैं गलतियां हो जाती हैं, सूबे के मुखिया से कानून व्यवस्था पर सवाल पूछे जाने पर जवाब दिया जाता है कि आप सुरक्षित हैं न, सपा नेता आजम खां के द्वारा बलात्कार को राजनीतिक साजिश करार देना, कांग्रेसी नेता रेणुका चौधरी ने बुलंदशहर गैंगरेप वाले मामले पर बीते दिनों कहा था कि "रेप तो चलते ही रहते हैं (रेप इज कॉमन)।" इन बयानों का असर समाज में क्या पड़ता है शायद इस दिशा में इन सियासतदां ने कभी सोचा हो। हालांकि बयान और भी हैं और विवाद भी। लेकिन इन बयानों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जाता है। पर, इन्हें रोकने के लिए सख्त हिदायत शायद ही कभी दिये जाते हों। जनता के बीच संदेश जाता है कि जब जिम्मेवार लोग इस तरह के अशोभनीय बयान दे रहे हैं तो वे क्या करें ? सचमुच क्या करें, पर भेड़चाल में चलने की आदत बनानी जरूरी है क्या ? नहीं। जनता के प्रति भी तो जिम्मेवारी है, देश के नागरिक के नाते।

रेप के मामलों में यूपी की पोजीशन

एनसीआरबी की पिछली रिपोर्ट में बलात्कार के मामले में उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर था। इस साल की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की स्थिति बिगड़ने की आशंका है। महिला अपराधों में तेजी से हुई वृद्धि और पीड़ितों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के चलते एनसीआरबी की आने वाली रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर आ सकता है। पुलिस थानों में दर्ज शिकायत को लेकर मीडिया में आ रही रिपोर्टों के अनुसार 2015 में राज्य में बलात्कार के 9,000 से ज्यादा अपराध दर्ज हुए हैं।

चीफ जस्टिस ने भी पुलिस पर उठाए सवाल

दुष्कर्म की घटनाओं पर सख्त रूख अख्तियार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी0 भोसले ने कहा कि मैं महाराष्ट्र से आता हूं। वहां हालात इतने खराब नहीं हैं, महिलाएं आधी रात को भी घर से निकल जाएं तो कोई उन पर अंगुली उठाने वाला नहीं है। लेकिन यहां पूरा परिवार कार से जा रहा है और कार रोककर महिलाओं से रेप किया जाता है। हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की दो और घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि तीन माह से कम समय में हाईवे पर दुष्कर्म की पांच घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से कुछ में तो पुलिस ने प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की।

नियम तो बहुत बनते हैं लेकिन पालन एक पर भी नहीं होता

राज्य की हों या फिर केंद्र में, वोट के मद्देनजर महिलाओं के लिए ढ़ेर सारी योजनाओं लाई जाती हैं...सशक्त करने की दिशा में खुद को अव्वल बताया जाता है। लेकिन इस तरह की घटनाओं के बाद कामकाज हाशिए पर चला जाता है। बलात्कार के मामलों पर लगाम लगाने के लिए एक सिरे से सख्त रूख अपनाना होगा, विवादित बयानों, पुलिस की ढ़ूीला-हवाली, समाज के भद्दे रवैये, अश्लील कैसेट्स के सरेआम व्यापार पर पूर्णतया रोक लगानी होगी, गर इन सभी मामलों का उल्लंघन पाया जाए तो कठोर कार्यवाही की जानी जरूरी है।

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English summary
Uttar Pradesh Women and Child Welfare Minister Aruna Kori said it was not the government but the society which was responsible for incidents of rape.
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