जानिए क्‍या है पैलेट गन और क्‍यों होती है इतनी खतरनाक

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श्रीनगर। कश्‍मीर में पैलेट गन के प्रयोग का मुद्दा एक बार फिर से गर्मा गया है। बुधवार को सीआरपीएफ ने जम्‍मू कश्‍मीर हाई कोर्ट को जानकारी दी है कि अगर पैलेट गन का प्रयोग बंद हुआ तो फिर मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

पढ़ें-पैलेट गन के प्रयोग पर सीआरपीएफ का जवाब 

आठ जुलाई से कश्‍मीर में जारी हिंसा के बीच पैलेट गन के प्रयोग को लेकर इस बार काफी विवाद रहा है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में पिछले दिनों कहा था कि वह यह बात सुनिश्चित करेंगे कि कश्‍मीर में पैलेट गन का प्रयोग न हो।

पढ़ें-कश्‍मीर के लोगों से इंडियन आर्मी की एक अपील 

वहीं दूसरी ओर सीआरपीएफ के जवाब से तो नहीं लगता है कि इसके उपयोग को आने वाले समय में बंद किया जाने वाला है।आज आपको बताते हैं कि पैलेट गन क्‍या हैं और क्‍यों इनका प्रयोग खतरनाक माना जाता है।

क्‍या हैं पैलेट गन

क्‍या हैं पैलेट गन

पैलेट के प्रयोग को दुनियाभर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बिना खतरे वाला आसान जरिया माना जाता है। पैलेट के अलावा आंसू गैस, वॉटर कैनन, पेपर स्‍प्रे, टीजर गैस को भी भीड़ नियंत्रण के काम के लिए प्रयोग करते हैं। पैलेट गन शिकार और पेस्‍ट कंट्रोल के लिए भी काफी लोकप्रिय हैं।

क्‍या होता है मकसद

क्‍या होता है मकसद

पैलेट गन का प्रयोग किसी व्यक्ति को घायल कर उसे चोट पहुंचाना है। पैलेट गन 500 यार्ड के हिस्‍से तक अपना असर रखती हैं। लेकिन अगर इन्‍हें बहुत ही करीब से फायर किया जाए तो फिर यह काफी खतरनाक हो सकती हैं। अगर आंखों में लग जाए तो फिर आंखों की रोशनी तक चली जाती है।

लेड होता है नुकसानकारी

लेड होता है नुकसानकारी

पैलेट पूरी तरह से लेड से लोडेड होता है। फायरिंग के बाद अगर शरीर के किसी हिस्‍से में इसका शॉट लगता है तो फिर यह टिश्‍यूज को पूरी तरह से खत्‍म कर देता है। सुरक्षाबलों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर सिर्फ कमर के नीचे ही प्रदर्शनकारियों पर इस फायर किया जाना चाहिए।

कैसी दिखती है पैलेट

कैसी दिखती है पैलेट

पैलेट के एक कार्टिरेज में करीब 100 पैलेट्स होते है। यह कई तरह की आकृति में हो सकती हैं और बिल्‍कुल बॉल बेयरिंग्‍स जैसी नजर आती हैं। जब इन्‍हें फायर‍ किया जाता है तो कार्टिरेज करीब 100 मीटर की दूरी तक 100 पैलेट्स की बौछार करता है।

कौन करता है निर्माण

कौन करता है निर्माण

पैलेट गन का निर्माण पश्चिम बंगाल स्थित इशपुर राइफल फैक्‍ट्री में होता है।

 कब से शुरू हुआ प्रयोग

कब से शुरू हुआ प्रयोग

जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने पहली बार अगस्‍त 2010 में इसका प्रयोग किया था। सीआरपीएफ के पास करीब 600 पैलेट गन्‍स हैं।

किस तरह की गन प्रयोग में

किस तरह की गन प्रयोग में

शुरुआत में 4/5 पैलेट टाइप का प्रयोग होता था लेकिन कश्‍मीर में वर्ष 2010 में करीब 110 लोगों की मौत इससे हुई थी। इसके बाद से इसके 8/9 टाइप को प्रयोग करने का फैसला किया गया। दो वर्षों से इसका प्रयोग हो रहा है और इसे बिल्‍कुल भी खतरनाक नहीं माना जाता है।

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English summary
CRPF has filed an affidavit saying that there will be more causalities if use of pallet guns will be stopped. Know why pallet guns are so dangerous.
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