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एक मिसाइल को लेकर भिड़े इजरायल और भारत, DRDO से भिड़ी इजरायली कंपनी

नई दिल्‍ली। भारत और इजरायल आमने-सामने हैं। सुनकर आपको हैरानी होगी मगर यह सच है और एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल की वजह से डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) और इजरायली कंपनी में जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों टैंक किलर्स या एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) को लेकर भिड़े हुए हैं। गुरुवार को पहला हमला इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस्‍ड सिस्‍टम्‍स की तरफ से किया गया। इसके बाद गुस्‍से में लाल-पीले डीआरडीओ की तरफ से ट्विटर पर इसका जवाब दिया गया है।

क्‍या है इजरायली कंपनी का दावा

क्‍या है इजरायली कंपनी का दावा

राफेल की तरफ से एक बयान जारी किया गया और पब्लिक रिलेशंस एजेंसी की तरफ से जारी इस बयान में कहा गया कि मध्‍य प्रदेश के महू स्थित इंफ्रेंट्री स्‍कूल में दो नई स्‍पाइक एलआर एंटी-टैंक मिसाइल को टेस्‍ट फायर किया गया है। कंपनी की मानें तो आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत भी टेस्‍ट लॉन्चिंग पर मौजूद थे। अपने बयान में राफेल ने डीआरडीओ के एटीजीएम प्रोग्राम को भी जमकर फटकारा। राफेल ने कहा, 'डीआरडीओ के प्रोग्राम में कुछ तरक्‍की जरूर हुई है मगर यूजर तक पहुंचने में अभी इसे लंबा समय लगेगा।' कंपनी की तरफ से कहा गया सेना को तीसरी पीढ़ी की मिसाइल लेने के अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है जबकि उसका सिस्‍टम चौथी पीढ़ी का है।

डीआरडीओ ने ट्वीट पर दिया जवाब

इसके बाद डीआरडीओ ने ट्विटर पर इजरायली कंपनी को जवाब दिया। गुस्‍साए संस्‍थान की ओर से ट्वीट किया गया कि डीआरडीओ की तरफ से तैयार एटीजीएम एक स्‍टेट-ऑफ-द-आर्ट मिसाइल है तो अब डेवलपमेंट के एडवांस्‍ड स्‍टेज में हैं। डीआरडीओ ने कहा, 'मध्‍य प्रदेश के महू स्थित इंफ्रेंट्री स्‍कूल में स्‍पाइक मिसाइल की टेस्टिंग से जुड़ी एक खबर को जान-बूझकर उस प्रेस रिलीज के आधार पर सच माना जा रहा है जिसमें कई तरह के झूठे तथ्‍य मौजूद हैं। डीआरडीओ की तरफ से इस वेपन सिस्‍टम के तीन सफल ट्रायल किए जा चुके हैं। संस्‍थान की मानें तो साल 2020 से यह मिसाइल यूजर ट्रायल के लिए मौजूद होगी।

क्‍यों छिड़ा है युद्ध

क्‍यों छिड़ा है युद्ध

राफेल को सेना के लिए 3,200 करोड़ रुपए का टेंडर हासिल हुआ था। इस टेंडर के बाद उसे 8,356 स्‍पाइक मिसाइलों को निर्माण करना है। इसके साथ ही 321 लॉन्‍चर्स और 15 सिम्‍यूलेटर्स भी तैयार करने थे। लेकिन साल 2017 में इस ऑर्डर को कैंसिल कर दिया गया। सरकार की तरफ से यह फैसला तब लिया गया जब डीआरडीओ ने दावा किया कि वह देश में ही इतने सक्षम सिस्‍टम को तैयार कर सकती है। सेना को पिछले एक दशक से अगली पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जिसे 'फायर एंड फॉरगेट' भी कहते हैं, इसकी जरूरत है। सिर्फ आठ हजार से ज्‍यादा स्‍पाइक मिसाइलों की जगह सेना के लिए बस 210 स्‍पाइक मिसाइलों का ऑर्डर करीब एक दर्जन लॉन्‍चर्स के साथ दिया गया। राफेल को यह ऑर्डर 280 करोड़ रुपए में मिला।

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