Pics: काशी में खतरे के निशान से ऊपर गंगा, छतों पर हो रहा है अंतिम संस्कार

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वाराणसी। इस समय पूरा उत्तर भारत बाढ़ से ग्रसित है जिससे जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लेकिन सबसे गंभीर स्थिति वाराणसी घाट पर नजर आ रही है। यहां गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जिसके कारण यहां के घाट जलमग्न हो गयेे हैंं और इस वजह से अंतिम संस्कारों में भी बहुत मुश्किलें पैदा हो गई हैं।

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काशी के गंगा घाट में दो ही जगह अंतिम संस्कार होता है, जिसमें एक है मणिकर्णिका घाट और दूसरा है हरिशचंद्र घाट। दोनों ही घाट पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं इसलिए यहां होने वाले क्रिया-क्रम अब लोग छतों में करवाने पर विवश हैं। सेंट्रल वॉटर कमीशन ने जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक इस समय काशी में गंगा खतरे के निशान 71.26 मीटर से बढ़कर 72.54 मीटर पर बह रही है और रोजाना 1 सेमी की रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं जो कि किसी भी लिहाज से अच्छा संकेत नहीं है।

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गंगा घाट की मौजूदा हालात जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर एक बार क्लिक कीजिये..

अव्यवस्था की स्थिति

घर की छतों पर अंतिम क्रिया-क्रम होने से काफी अव्यवस्था उत्पन्न हो गई है।

जलमग्न मणिकर्णिका घाट और हरिशचंद्र घाट

आपको बता दें कि मणिकर्णिका घाट और हरिशचंद्र घाट तीर्थ माने जाते हैं और मान्यता के मुताबिक यहां से जला शरीर सीधे अपने पापों से मुक्ति पा लेता है।

काशी में मरने की इच्छा

इसलिए लोगों की अंतिम इच्छा होती है वो काशी में ही अंतिम सांस लें लेकिन बाढ़ के पानी ने इस समय यहां विकट स्थिति उत्पन्न कर दी है।

इलेक्ट्रिक क्रिमेशन भी बंद

हरिशचंद्र घाट पर बने इलेक्ट्रिक क्रिमेशन को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है।

राज्य भर के लोग आते हैं यहां अंतिम संस्कार के लिए

घाटों के डूबने के कारण लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं क्योंकि राज्यभर से और अन्य जगहों से भी लोग मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए इन्हीं घाटों पर आते हैं।

बनारस मेंं बााढ़

उत्तर प्रदेश में भारी बाढ़ से 11 लोगों की मौत हो गई।

बनारस में बाढ़

जन-जीवन अस्त-व्यस्त।

मां गंगा का तांडव

काशी में खतरे के निशान से ऊपर गंगा।

काशी में गंगा का रौद्र रूप

काशी में गंगा खतरे के निशान 71.26 मीटर से बढ़कर 72.54 मीटर पर बह रही है।

बाढ़..बाढ़ और बाढ़

आम लोग हैरान-परेशान।

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English summary
Varanasi ghats are not available for cremation, the roofs of havelis and other old houses along the ghats are being used for cremation, but with great difficulty said govt spokesman Shailendra Pandey.
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