UP Assembly Election 2017: सपा को 'बोल-बचन' पड़ सकता है भारी!

Written by: हिमांशु तिवारी आत्मीय
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लखनऊ। सूबे में मौजूदा सपा सरकार आगामी 2017 विधानसभा चुनाव के लिहाज से जीतने की खातिर हर जतन कर रही है। सत्तारूढ़ होते हुए तकरीबन सारे फर्ज को फिलवक्त निभाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। फिर वो चाहे हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा के 89 यात्रियों को 50-50 हजार रूपये की चेक देकर हो या फिर बुलंदशहर में गैंगरेप पीड़ित परिवार को नॉएडा के अर्थला में दो फ्लैट और पीड़िताओं को 10-10 लाख की आर्थिक मदद देकर।

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सवाल जनता ने उठाया है तो जवाब भी जनता ही लेगी

हां सभव है कि लोग संवेदना व्यक्त करते हुए सीएम द्वारा दी गई सहायता राशि को एक अलग एंगल देकर उस कीमत में फर्क तय करने लगें। हालांकि सूबे को देखते हुए युवाओं में अखिलेश की लोकप्रियता को लेकर ज्यादा अंतर नहीं आया है।

युवाओं को हैं सीएम अखिलेश से उम्मीदें

समाजवादी सरकार से सवाल कई हैं, लेकिन उनमें अपराध अव्वल दर्जे पर नहीं है। दरअसल सबसे ऊपरी पायदान पर बद्जुबानी है। जिसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ सकता है। एक आंकलन के मुताबिक आज भी और आने वाले चुनाव के समय भी युवाओं को सूबे के मुखिया अखिलेश यादव से उम्मीदें हैं। हां इस बार लैपटॉप की लीक से अलग हटकर।

सीएम अखिलेश यादव की चुनौतियों के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये..

युवाओं का मन अभी अखिलेश से हटा नहीं है

रोजगार की चाह में, पलायन के लिए यूपी से न निकलने की खातिर, दिल्ली, मुंबई की तर्ज पर यूपी को विकसित देखने की, किसानों के सामने कोई भी ऐसी परिस्थिति न उत्तपन्न होने देने की वे आत्महत्या को मजबूर हों, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की, महज फर्जदायगी की खातिर नहीं बल्कि जिम्मेवारी समझकर हर क्षेत्र का विकास होने की, शिक्षा के बेहतर स्तर की, सांप्रदायिकता के नाम पर किसी भी प्रकार के तनाव के पनपने से पहले ही उस तनाव की वजहों को कुचल देने की आदि आदि।

क्यों कुछ लोग हैं नाराज?

लोगों ने वन इंडिया के साथ बातचीत के दौरान ऐसे तमाम मुद्दे गिनवाए, उन्होंने कहा कि लोहिया आदर्श ग्राम जो कि आदर्श से ज्यादा बेबसी से जूझ रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय जिसमें उदासीनता की हद हो चुकी है। ऐसे में सवाल संबंधित मंत्री के साथ पूरी सरकार और सरकार के मुखिया पर उठते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं में अनुशासन के बजाए सत्ता की हनक ठसाठस भरी हुई है, जिसकी वजह से कई दफे अपराध भी कर बैठते हैं। फलस्वरूप लोगों में नाराजगी पनपती है।

आजम खां

लेकिन इन सबसे कहीं ज्यादा आगे विवादित बयान हैं, जिनका हवाला विपक्षी दल देते हैं और जनता के दिलों में घर कर जाते हैं। इन विवादित बयानों को देने वालों में सबसे पहला नाम सपा के कद्दावर नेता आजम खां का है जिन्होंने बुलंदशहर रेप मामले में बेहद ही शर्मनाक बयान दिया है। जिनका कहना था कि बुलंदशहर मामले में ''हम लोगों को इस मामले में जांच करने की जरूरत है कि कहीं सरकार को बद्नाम करने के लिए यह विपक्ष की साजिश तो नहीं''

मुलायम सिंह

बलात्कारियों की वकालत करते हुए कहा था कि लड़के हैं गलतियां हो जाती हैं...लेकिन फांसी देना गलत है।

शिवपाल यादव

अपनी ही पार्टी को देशद्रोहियों का हितैषी बताया।

शाकिर अली

महिलाएं अगर चौकी फूंकेंगे तो क्या हम चुम्मा लेंगे।

राम करन आर्य नेहाथ

आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा कि लोहिया जी प्रदेश से बहुत पहले ही बाहर चले गए, देश से ही बाहर चले गए। मतलब कि दुनिया छोड़कर।

विवादित बयानों से दूर रहने की नसीहत

बहरहाल सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह ने पार्टी नेताओं को विवादित बयानों से दूर रहने की नसीहत तो दी है लेकिन नसीहत के बाद भी मंत्री अपनी जुबान को खामोश मोड पर नहीं ला पाए। हां यह कहना गलत नहीं होगा कि गर बदजुबानी इसी तर्ज पर चलती रही तो सपा को निश्चित तौर पर नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

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English summary
Controversial Statements of SP Ministers may create Trouble for Akhilesh Yadav in Coming UP Assembly Election 2017.
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