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तीस्ता सीतलवाड़ पर लटकी तलवार, उनके खिलाफ केस दर्ज कर सकती है मोदी सरकार

नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ केस दर्ज करने का प्रस्ताव दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तीस्ता सीतलवाड़ को दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने और सामंजस्य भंग करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और इसके लिए उन पर आईपीसी की धारा 153-A और 153-B के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

teesta setalvad

यूपीए शासनकाल के अधिकारी भी जिम्मेदार

कमेटी ने यह भी कहा है कि तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट को 1.39 करोड़ का ग्रांट देने वाले यूपीए शासनकाल के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कमेटी का कहना है कि जांच के बाद यह पता चला है कि सबरंग ट्रस्ट यह ग्रांट पाने के लिए योग्य नहीं था फिर भी अधिकारियों ने इसे मंजूरी दी।

कमेटी के इस प्रस्ताव के बाद तीस्ता सीतलवाड़ के साथ-साथ अब यूपीए शासनकाल के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

कहां लगाई जा सकती है यह आईपीसी की धारा

इन आरोपों पर आईपीसी की धारा 153-A औरर 153-B के तहत मुकदमा चलाया जाता है।

  • समूहों या धर्मों के बीच नफरत फैलाना
  • समाज में सामंजस्य भंग करने के लिए पूर्वाग्रह से कोई काम करना
  • राष्ट्रीय अखंडता को क्षति पहुंचाने वाला कोई काम करना

इन आरोपों के साबित होने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के पास पहुंचा प्रस्ताव

तीस्ता सीतलवाड़ और यूपीए शासनकाल के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के प्रस्तावों की यह रिपोर्ट कानून मंत्रालय की सलाहो के साथ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय में जून 2015 में जमा की गई थी। उस समय स्मृति ईरानी मंत्री थीं।

अब इन प्रस्तावों पर वर्तमान मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के फैसले का इंतजार हो रहा है।

इस बारे में पूछे जाने पर जावड़ेकर बोले, 'मैंने रिपोर्ट मंगाई है और अभी इसे ठीक से देखा नहीं है। रिपोर्ट से गुजरने के बाद ही इस पर कुछ कह पाऊंगा।'

कौन-कौन थे इस कमेटी में?

तीस्ता सीतलवाड़ और उनके एनजीओ की जांच के लिए बनी इस कमेटी के हेड गुजरात सेंट्रल युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सैयद ए बारी रहे। इस कमेटी के सदस्य थे - सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अभिजित भट्टाचार्य और मानव संसाधन मंत्रालय में डायरेक्टर गया प्रसाद।

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क्या है इस रिपोर्ट में?

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यूपीए शासनकाल में मानव संसाधन मंत्रालय ने शिक्षा फैलाने के एक स्कीम के तहत तीस्ता सीतलवाड़ के सबरंग ट्रस्ट के दो साल के प्रोजेक्ट के लिए 2.06 करोड़ रुपए की मंजूरी दी और 1.39 करोड़ रुपए जारी भी कर दिया जबकि मंत्रालय को ऐसा नहीं करना चाहिए था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव संसाधन मंत्रालय को यह मंजूरी नहीं देनी चाहिए थी क्योंकि इस एनजीओ के आवेदन की ठीक से जांच की जाती तो यह वहीं रिजेक्ट हो जाता। शिक्षा फैलाना सबरंग ट्रस्ट का उद्देश्य कभी नहीं रहा।

सबरंग ट्रस्ट के कागजातों और लेखों से पता चलता है कि राजनीतिक एजेंडा फैलाना इसका काम है। इसने गुजरात सरकार के खिलाफ एजेंडे के तहत काम किया और इतिहास लेखन को लेकर पूर्व मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी की आलोचना करते हुए आरएसएस के साथ संबंध होने की बात कही।

कमेटी का कहना है कि सबरंग ट्रस्ट से पूछा जाना चाहिए कि वह शिक्षा के लिए काम करता था या फिर भाजपा और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ राजनीतिक अभियान चलाता था।

तीस्ता सीतलवाड़ के पति ने रिपोर्ट पर यह कहा

कमेटी की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए तीस्ता सीतलवाड़ के पति जावेद आनंद ने कहा, 'इस रिपोर्ट में शिक्षा के बारे में संकीर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया है। पिछले दो दशकों से तीस्ता बच्चों की शिक्षा के लिए खोज प्रोग्राम चला रही हैं। महाराष्ट्र के नगरपालिका स्कूलों में इस प्रोग्राम को चलाने के लिए साल दर साल मंजूरी मिली जबकि वहां शिवसेना-भाजपा का शासन था। कमेटी ने कैसे निष्कर्ष निकाल लिया कि शिक्षा फैलाना सबरंग ट्रस्ट का उद्देश्य नहीं है।'

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